शहर की ड्रेनेज व्यवस्था होगी हाईटेक, 86.61 करोड़ से बनेगा 44 एमएलडी का सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट

Updated at : 21 Mar 2026 8:48 PM (IST)
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शहर की ड्रेनेज व्यवस्था होगी हाईटेक, 86.61 करोड़ से बनेगा 44 एमएलडी का सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट

शहर की ड्रेनेज व्यवस्था और साफ-सफाई को लेकर जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति (जेएनएसी) ने 86 करोड़ की योजना को धरातल पर उतारने की तैयारी शुरू कर दी है.

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जेएनएसी ने शुरू की टेंडर प्रक्रिया; मोहरदा, बागुनहातु, भोजपुर और बारीडीह के नालों का पानी सीधे नदी में गिरने से रुकेगा

वरीय संवाददाता, जमशेदपुर.

शहर की ड्रेनेज व्यवस्था को सुधारने और प्रदूषण कम करने के लिए जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति (जेएनएसी) ने 86.61 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी योजना को धरातल पर उतारने की तैयारी कर ली है. इसके तहत मोहरदा, बागुनहातु, भोजपुर कॉलोनी और बारीडीह (जिला स्कूल) के बड़े नालों का स्वरूप बदला जायेगा और 44 एमएलडी क्षमता का आधुनिक सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाया जायेगा.

नदियों में सीधे नहीं गिरेगा गंदा पानी

इस योजना का मुख्य उद्देश्य शहर के इन चार प्रमुख क्षेत्रों से निकलने वाले गंदे पानी को साफ करना है. अब तक इन नालों का पानी बिना किसी ट्रीटमेंट के सुवर्णरेखा नदी में बहता था. नई योजना के तहत इन नालों के पानी को मोड़कर (इंटरसेप्शन और डायवर्जन) सीधे नये प्लांट तक ले जाने की व्यवस्था की जायेगी. इससे न केवल नदी प्रदूषण मुक्त होगी, बल्कि स्थानीय लोगों को भी बदबू व गंदगी से निजात मिलेगी.

दो साल में काम पूरा, 5 साल तक रखरखाव : कृष्ण कुमार

जेएनएसी के उप नगर आयुक्त कृष्ण कुमार ने बताया कि योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए प्रक्रिया तेज कर दी गयी है. 28 मार्च से 17 अप्रैल तक एजेंसियों के चयन के लिए आवेदन प्रक्रिया चलेगी. इसके बाद जल्द ही काम सौंप दिया जायेगा. निर्माण करने वाली एजेंसी को दो साल के भीतर काम पूरा करना होगा और अगले पांच वर्षों तक इस पूरे सिस्टम के संचालन व देखरेख की जिम्मेदारी भी उसी की होगी.

एसबीआर तकनीक का होगा इस्तेमाल

इस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी खासियत इसमें इस्तेमाल होने वाली कंप्यूटर आधारित ””एसबीआर”” (सीक्वेंसिंग बैच रिएक्टर) तकनीक है. पुराने प्लांटों की तुलना में यह बेहद स्मार्ट है और कम जमीन पर भी काम करती है. इसमें पानी भरने से लेकर सफाई तक की प्रक्रिया स्वतः होती है, जिससे मानवीय चूक की गुंजाइश खत्म हो जाती है. यह पानी से न केवल कचरा हटाती है, बल्कि उसमें घुले हानिकारक तत्वों (नाइट्रोजन व फास्फोरस) को भी पूरी तरह साफ कर देती है.

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