नयी शिक्षा नीति करेगी मौजूदा एजुकेशन सिस्टम की सर्जरी
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :20 Oct 2019 7:43 AM (IST)
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जमशेदपुर : भारत में मौजूदा शिक्षा नीति में कई खामियां हैं. हालत यह है कि देश में ऐसे लोगों के पास भी बीए, बीएससी, एमकॉम, बीएड, बीटेक, एमबीए, नेट जैसी डिग्री मौजूद हैं, जिन्होंने आज तक अपने कॉलेज का क्लास रूम भी नहीं देखा. डिग्री लेकर वे घूम रहे हैं. सरकारी स्कूलों में भी विचित्र […]
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जमशेदपुर : भारत में मौजूदा शिक्षा नीति में कई खामियां हैं. हालत यह है कि देश में ऐसे लोगों के पास भी बीए, बीएससी, एमकॉम, बीएड, बीटेक, एमबीए, नेट जैसी डिग्री मौजूद हैं, जिन्होंने आज तक अपने कॉलेज का क्लास रूम भी नहीं देखा. डिग्री लेकर वे घूम रहे हैं.
सरकारी स्कूलों में भी विचित्र स्थिति है. कई स्कूल सिंगल टीचर स्कूल हैं. एक ही टीचर बच्चों को गणित से लेकर इतिहास तक की पढ़ाई करा रहे हैं, तो कहीं स्कूल में टीचर हैं, लेकिन बच्चे डबल डिजिट में भी नहीं हैं.
इस प्रकार के एजुकेशन सिस्टम में बड़े पैमाने पर सर्जरी की जरूरत है. इसके लिए 2016 से नयी राष्ट्रीय शिक्षा नीति तैयार की जा रही थी. नयी शिक्षा नीति के ड्राफ्ट को तैयार कर सरकार को सौंप दिया गया है. सरकार फिलहाल इसकी रिव्यू कर रही है. उम्मीद है कि अगले वर्ष तक उसे लागू कर दिया जायेगा.
उक्त बातें अंतरिक्ष वैज्ञानिक सह राष्ट्रीय शिक्षा नीति तैयार करनेवाली टीम के अध्यक्ष डॉ के कस्तूरीरंगन ने कही. वे शनिवार को जमशेदपुर के जुस्को स्कूल कदमा में आयोजित एक समारोह के दौरान शहर के शिक्षाविदों को संबोधित कर रहे थे. डॉ कस्तूरीरंगन ने कहा कि नयी शिक्षा नीति का जो ड्राफ्ट उन्होंने तैयार किया है, उसमें 80 से 90 फीसदी बातों को शामिल किया जा रहा है.
नयी शिक्षा नीति से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां दीं
स्कूली शिक्षा, उच्च शिक्षा के साथ कृषि शिक्षा, कानूनी शिक्षा, चिकित्सा शिक्षा और तकनीकी शिक्षा जैसी व्यावसायिक शिक्षाओं को भी दायरे में लाया गया है.
शिक्षा का अधिकार कानून के दायरे में 6 से 14 वर्ष तक की आयु वाले बच्चों को लाने की बात करती है. नयी शिक्षा नीति का दायरा प्राथमिक-पूर्व शिक्षा से लेकर 12वीं क्लास तक की शिक्षा के लिए लागू करने की सिफारिश की गयी है.
नर्सरी से 12वीं क्लास तक की पढ़ाई को 5+3+3+4 के फॉर्मूले के तहत चार चरणों में बांटा गया है. पांच साल का पहला चरण 3 से 8 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए है, इसे फंडामेंटल स्टेज कहा गया है.
दूसरा चरण तीसरी से पांचवीं यानी पांच साल से आठ साल तक के उम्र के बच्चों के लिए है. इसे प्रीप्रेटरी स्टेज कहा गया है. तीसरा चरण छठी क्लास से आठवीं तक के यानी 6 से 8 तक 11 से 14 वर्ष के बच्चों के लिए है, इसे मिडिल स्टेज कहा गया है. चौथा और अंतिम चरण नौवीं से बारहवीं तक यानी 14 से 18 वर्ष के बच्चों के लिए है, इसे सेकेंडरी स्टेज कहा गया है.
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