झारखंड के इंजीनियरिंग व मैनेजमेंट कॉलेजों से डिग्री लेकर 72 प्रतिशत विद्यार्थी बेरोजगार

Updated at : 03 Jun 2019 6:14 AM (IST)
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झारखंड के इंजीनियरिंग व मैनेजमेंट कॉलेजों से डिग्री लेकर 72 प्रतिशत विद्यार्थी बेरोजगार

संदीप सावर्ण, जमशेदपुर : झारखंड के इंजीनियरिंग व मैनेजमेंट कॉलेजों से डिग्री लेकर करीब 72% युवक बेरोजगार हैं. राज्य के विभिन्न सरकारी व प्राइवेट इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट व पॉलिटेक्निक कॉलेजों की ओर से उच्च तकनीकी शिक्षा एवं कौशल विकास विभाग को भेजे गये आंकड़ों के अनुसार, इस साल राज्य के कुल 14,691 विद्यार्थियों में से सिर्फ […]

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संदीप सावर्ण, जमशेदपुर : झारखंड के इंजीनियरिंग व मैनेजमेंट कॉलेजों से डिग्री लेकर करीब 72% युवक बेरोजगार हैं. राज्य के विभिन्न सरकारी व प्राइवेट इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट व पॉलिटेक्निक कॉलेजों की ओर से उच्च तकनीकी शिक्षा एवं कौशल विकास विभाग को भेजे गये आंकड़ों के अनुसार, इस साल राज्य के कुल 14,691 विद्यार्थियों में से सिर्फ 4108 की ही नौकरी लगी. यानी 28% विद्यार्थियों को ही रोजगार मिल सका.

आंकड़ा अपलोड : उच्च तकनीकी शिक्षा एवं कौशल विकास विभाग की ओर से तकनीकी कॉलेजों को पत्र भेजा गया था.
इसमें उन्हें कुल सीटों के अलावा कितने विद्यार्थियों का प्लेसमेंट हो चुका है, इससे संबंधित जानकारी मांगी गयी थी. सभी सरकारी व प्राइवेट कॉलेजों की अोर से तीन जनवरी तक इससे संबंधित आंकड़ा भेज दिया गया. सभी कॉलेजों को विभाग के जॉब पोर्टल पर भी आंकड़ा अपलोड करने का आदेश दिया गया था.
उच्च, तकनीकी शिक्षा एवं कौशल विकास विभाग को राज्य के कॉलेजों ने सौंपा आंकड़ा
सरकारी पॉलिटेक्निक की स्थिति अच्छी, प्राइवेट मैनेजमेंट कॉलेजों का हाल सबसे बुरा सरकारी पॉलिटेक्निक कॉलेज की स्थिति सबसे अच्छी है. सरकारी पॉलिटेक्निक कॉलेज में कुल 2590 सीटें हैं, जिसमें 1412 विद्यार्थियों को नौकरी मिल चुकी है. यानी 54.51 प्रतिशत विद्यार्थियों को
नौकरी मिल चुकी है
राज्य में कुल नौ प्राइवेट मैनेजमेंट कॉलेज चलते हैं. इनमें कुल 1035 सीटें हैं. लेकिन कुल 103 विद्यार्थियों का ही प्लेसमेंट जनवरी माह तक हो पाया है
मौजूदा हालात
2009-2010 तक इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल करनेवाले करीब 60 फीसदी विद्यार्थियों को नौकरी मिलती थी. पर अब केवल 30 से 35 फीसदी इंजीनियरों का ही प्लेसमेंट हो पा रहा है
जानकारों के अनुसार इसके पीछे रिक्रूटमेंट के पैटर्न में बदलाव मुख्य कारण है. कंपनी प्रबंधकों द्वारा अब बीइ के स्थान पर बीएससी पास युवाअों को ज्यादा तरजीह दी जा रही है.
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