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जमशेदपुर : नौ वर्ष में जिले के सिर्फ चार स्कूलों को मिली मान्यता

Updated at : 11 Feb 2019 6:28 AM (IST)
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जमशेदपुर  :  नौ वर्ष में जिले के सिर्फ चार स्कूलों को मिली मान्यता

संदीप सावर्ण, जमशेदपुर : राज्य के सरकारी विभागों में फाइलों के निष्पादन की रफ्तार को अगर जानना हो, तो स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग इसका सबसे बेहतर उदाहरण है. हालत यह है कि इस विभाग ने पिछले नौ साल में पूर्वी सिंहभूम के सिर्फ चार प्राइवेट स्कूलों को आरटीइ की मान्यता दी है. बगैर मान्यता […]

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संदीप सावर्ण, जमशेदपुर : राज्य के सरकारी विभागों में फाइलों के निष्पादन की रफ्तार को अगर जानना हो, तो स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग इसका सबसे बेहतर उदाहरण है. हालत यह है कि इस विभाग ने पिछले नौ साल में पूर्वी सिंहभूम के सिर्फ चार प्राइवेट स्कूलों को आरटीइ की मान्यता दी है.

बगैर मान्यता के पूर्वी सिंहभूम में 464 प्राइवेट स्कूलों का संचालन किया जा रहा है. ऐसी भी बात नहीं है कि मान्यता देने के लिए जरूरी प्रक्रिया को पूरा नहीं किया गया. जिले के 163 प्राइवेट स्कूलों ने आरटीइ की मान्यता हासिल करने के लिए एक बार नहीं, बल्कि दो बार आवेदन किया.
पहली बार स्कूली शिक्षा निदेशालय ने दस्तावेजों में त्रुटि होने की बात कह कर सारी फाइलों को वापस कर दिया. इसके बाद दोबारा आवेदन किया गया, लेकिन आवेदन किये हुए भी करीब दो साल पूरे हो गये. लेकिन हालत जस की तस है. इसके कारण बगैर मान्यता के ही जिले में प्राइवेट स्कूलों का धड़ल्ले संचालन हो रहा है.
31 मार्च 2013 तक ही मान्यता लेने का था अल्टीमेटम : राज्य में एक अप्रैल 2010 को अनिवार्य शिक्षा का अधिकार कानून लागू हुआ था. इस कानून के लागू होने के बाद उसे सही प्रकार से अमल में लाने के लिए सभी प्राइवेट स्कूलों को अधिकतम तीन साल का अल्टीमेटम दिया गया था.
यह समय सीमा 31 मार्च 2013 को ही खत्म हो चुकी है. अनिवार्य शिक्षा का अधिकार कानून में बगैर आरटीइ की मान्यता के स्कूल संचालन पर कार्रवाई का भी प्रावधान तय किया गया है. जानकारी के अनुसार अगर कोई स्कूल बगैर मान्यता के चल रहा है और डीएसइ की ओर से उक्त स्कूल पर कार्रवाई की जाती है, तो उस स्कूल को अर्थदंड के रूप में एक लाख रुपये तक का जुर्माना देना पड़ सकता है.
अगर इसके बाद भी तय समय पर स्कूल द्वारा मान्यता नहीं ली जाती है, तो स्कूल प्रबंधन को प्रतिदिन 10 हजार रुपये की राशि आर्थिक दंड का प्रावधान तय किया गया है. इसके बाद भी अगर स्कूल द्वारा मान्यता नहीं ली जाती है, तो उक्त स्कूल की मान्यता रद्द भी की जा सकती है.
इस सत्र में नेताजी सुभाष और जेवियर स्कूल को मिली मान्यता : मौजूदा सत्र में जिले के सिर्फ दो स्कूलों को ही आरटीइ की मान्यता दी गयी है, जिसमें नेताजी सुभाष पब्लिक स्कूल व जेवियर इंग्लिश स्कूल शामिल हैं. उक्त दोनों ही स्कूलों की मान्यता संबंधी पत्र जिला शिक्षा विभाग में भेज दी गयी है. इससे पूर्व जिले में मात्र दो स्कूलों के पास आरटीइ की मान्यता थी.
क्या कहते हैं प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के पदाधिकारी : अनएडेड प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के महासचिव बी. चंद्रशेखर ने कहा कि मान्यता के लिए शहर के अधिकांश स्कूलों ने आवेदन कर दिया है. पहली बार आवेदन करने पर बताया गया कि स्कूल का फोटो नहीं था.
फाइल सही तरीके से नहीं बनाया गया था. इसके बाद दोबारा आवेदन किया गया. जिस प्रकार से विभाग की अोर से बताया गया, उसी तरह से आवेदन हुआ, लेकिन करीब दो साल से मान्यता ही नहीं मिली है. विभाग के स्तर से मामला लंबित है.
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