नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ अर्बन अफेयर्स के डायरेक्टर डॉ जगन शाह बोले, शहरों के विकास में आबादी व पॉलिटिकल प्रेशर बाधक
Updated at : 10 Feb 2019 6:13 AM (IST)
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एक्सएलआरआइ में सोशल इंटरप्रेन्योरशिप कॉन्क्लेव जमशेदपुर : एक्सएलआरआइ के फादर टॉम अॉडिटोरियम में शनिवार को सोशल इंटरप्रेन्योरशिप कॉन्क्लेव की शुरुआत हुई. इसका उदघाटन जेआरडी टाटा बिजनेस एथिक्स के चेयरपर्सन फादर अोल्वाल्ड मास्केरेंश ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया. मौके पर उन्होंने एक्सएलआरआइ की टीम सिग्मा की सराहना की. कहा कि पढ़ाई कर नौकरी करना ही सिर्फ […]
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एक्सएलआरआइ में सोशल इंटरप्रेन्योरशिप कॉन्क्लेव
जमशेदपुर : एक्सएलआरआइ के फादर टॉम अॉडिटोरियम में शनिवार को सोशल इंटरप्रेन्योरशिप कॉन्क्लेव की शुरुआत हुई. इसका उदघाटन जेआरडी टाटा बिजनेस एथिक्स के चेयरपर्सन फादर अोल्वाल्ड मास्केरेंश ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया.
मौके पर उन्होंने एक्सएलआरआइ की टीम सिग्मा की सराहना की. कहा कि पढ़ाई कर नौकरी करना ही सिर्फ जीवन का लक्ष्य नहीं होना चाहिए. किसी भी उद्यम के केंद्र में समाज अगर रहे, तो देश के विकास के साथ-साथ सामाजिक व आर्थिक रचना मजबूत होगी. कॉन्क्लेव के दौरान अलग-अलग क्षेत्र के वक्ताअों ने अरबन डेवलपमेंट के लिए जरूरी आयामों की जानकारी दी.
भारत में शहरों की संख्या 2,774 बढ़े : मुख्य वक्ता नेशनल इंस्टीट्यूट अॉफ अरबन अफेयर्स के डायरेक्टर डॉ जगन साह ने कहा कि भारत के इतिहास पर नजर डालें, तो मोहनजोदड़ो व गुप्त काल में किस प्रकार शहरों को पूरे प्लान के साथ बसाया जाता था. धीरे-धीरे भारत में शहरों की संख्या में वृद्धि हुई है.
लेकिन इसके विकास में सबसे बड़ी कमी देश की आबादी व विविधता है. शहरों में विधिवत सड़क, नाली, बिजली, पानी, सीवरेज सिस्टम तैयार करने के लिए कई कड़े एक्शन लेने पड़ते हैं. लेकिन इनमें पॉलिटिकल प्रेशर बाधक बनते हैं. एक आंकड़ा पेश करते हुए कहा कि 1951 से लेकर 2011 तक के बीच भारत में 7935 शहर हैं, जबकि 2001 के पूर्व 5161 शहर थे.
10 साल में 2774 शहर बसे. डॉ जगन ने कहा कि हर शहर अपने आप में हैरिटेज के साथ ही उनकी अपनी हिस्ट्री होती है. लेकिन जिस प्रकार से आबादी बढ़ रही है अौर उसकी वजह से जहां स्लम बढ़ रहे, वहीं शहरों की खासियत भी खो रही है. इसे संभाल कर रखने की आवश्यकता है.
देश में 1.18 अरब टेलीफोन आबादी का 91.17 फीसदी लोग करते हैं फोन पर बात
श्री शाह ने कहा कि देश में फिलहाल 1.18 अरब टेलीफोन कनेक्शन हैं. इनमें 1.17 अरब लोगों के पास मोबाइल फोन है. जिनमें 22 .02 मिलियन के पास बेस फोन है. देश के 91.17 फीसदी लोगों के पास फोन है. इंटरनेट यूजर्स की संख्या भी पिछले कुछ सालों में बढ़ी है. करीब 5.6 करोड़ लोग इंटरनेट इस्तेमाल करते हैं.
देश के शहरों के पास नहीं है डाटा : टाटा ट्रस्ट की प्रतिनिधि पूर्णिमा डोरे ने कहा कि भारत के शहरों के पास इकोनॉमी, जीडीपी का डाटा नहीं है. डाटा मार्केटिंग के लिहाज से भारत दुनिया के टॉप 10 देशों में शुमार है. भारतीय शहरों के विकास में आबादी, फेडरल स्ट्रक्चर, डिलिवरी इंसेटिव अौर डायवर्सिटी मुख्य रूप से बाधक हैं.
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