जमशेदपुर :केयू ने नहीं भेजी यूटिलाइजेशन रिपोर्ट, करोड़ों का फंड फंसा
Updated at : 02 Feb 2019 7:45 AM (IST)
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जमशेदपुर : कोल्हान विश्वविद्यालय की संचित निधि को सरकारी बैंक में जमा करने को लेकर कारण बताओ नोटिस का सामना करने जा रहे वित्त सलाहकार मधुसूदन पर विवि को आवंटित राशि का यूटिलाइजेशन रिपोर्ट भेजने में देरी करने का आरोप लगा है. कहा जा रहा है कि रिपोर्ट भेजने में देरी के कारण विवि को […]
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जमशेदपुर : कोल्हान विश्वविद्यालय की संचित निधि को सरकारी बैंक में जमा करने को लेकर कारण बताओ नोटिस का सामना करने जा रहे वित्त सलाहकार मधुसूदन पर विवि को आवंटित राशि का यूटिलाइजेशन रिपोर्ट भेजने में देरी करने का आरोप लगा है.
कहा जा रहा है कि रिपोर्ट भेजने में देरी के कारण विवि को आवंटित होने वाला करोड़ों का फंड फंस गया है. विवि के सिंडिकेट सदस्य मनोज कुमार सिंह ने यह मामला उठाया है. सिंडिकेट की अगली बैठक में यह स्पष्ट करने को कहा है कि कितनी राशि की यूटिलाइजेशन रिपोर्ट नहीं भेजी तथा इससे विवि का कितने का आवंटन फंसा.
किन-किन मदों में आवंटन प्राप्त होने वाला था. सिंडिकेट सदस्य की आपत्ति के बाद यूटिलाइजेशन रिपोर्ट भेजने की जवाबदेही को लेकर नियमावली पेश की गयी. इसमें कहा गया कि विवि में पदस्थापित वित्त सलाहकार का यह दायित्व है कि वह सरकारी राशि की यूटिलाइजेशन रिपोर्ट समर्पित करे. सिंडिकेट सदस्य ने अगली बैठक तक मांगी गयी जानकारी का पूरा ब्योरा पेश करने का अनुरोध किया है. दावा किया जा रहा है कि करीब 11 करोड़ रुपये की यूटिलाइजेशन रिपोर्ट नहीं भेजी गयी है.
10 कॉल और वाट्सएप पर मैसेज, जवाब नहीं
पूरे प्रकरण पर वित्त सलाहकार मधुसूदन का पक्ष लेने के लिए 24 घंटे में 10 कॉल व वाट्सएप मैसेज किये गये. इसके बावजूद उन्होंने अपना पक्ष नहीं रखा. विवि के प्रवक्ता डॉ एके झा ने कहा कि वह मुख्यालय में नहीं हैं. इस प्रकरण की जानकारी नहीं है.
वाहन खरीद में देरी के लिए भी जिम्मेदार
सिंडिकेट ने प्रतिकुलपति के वाहन खरीद की स्वीकृति के बावजूद प्रक्रिया लंबित रखने के मामले में जिम्मेदार पदाधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी करने का निर्णय लिया है. इसके लिए विवि को पूर्व के वर्षों में संचालित की गयी पूरी प्रक्रिया से जुड़ी फाइलों की जांच करानी होगी.
यूटिलाइजेशन रिपोर्ट में हुई देरी का मुद्दा उठाया
सिंडिकेट के समक्ष मैंने यूटिलाइजेशन रिपोर्ट भेजने में हुई देरी का मुद्दा उठाया है. इस संबंध में विवि से विस्तृत ब्योरा उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है, ताकि सच्चाई सामने अा सके.
मनोज कुमार सिंह, सिंडिकेट सदस्य, केयू
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