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जमशेदपुर में मेजर जनरल (रि) जी डी बख्शी ने कहा- नयी पीढ़ी गांधी नहीं, भगत सिंह की फैन है

Updated at : 04 Nov 2018 7:43 PM (IST)
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जमशेदपुर में मेजर जनरल (रि) जी डी बख्शी ने कहा- नयी पीढ़ी गांधी नहीं, भगत सिंह की फैन है

– यह वैचारिक लड़ाई का वक्त है वरीय संवाददाता, जमशेदपुर मेजर जनरल (रि) जी डी बख्शी ने कहा कि अब गांधीवाद नहीं चलने वाला. ‘कोई थप्पड़ मारे तो दूसरा गाल भी सामने कर दो’ इस फलसफा का आज कोई मतलब नहीं. चीनी कहावत है कि कोई एक चाटा मारता है उसकी गलती है, दूसरा चाटा […]

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– यह वैचारिक लड़ाई का वक्त है

वरीय संवाददाता, जमशेदपुर

मेजर जनरल (रि) जी डी बख्शी ने कहा कि अब गांधीवाद नहीं चलने वाला. ‘कोई थप्पड़ मारे तो दूसरा गाल भी सामने कर दो’ इस फलसफा का आज कोई मतलब नहीं. चीनी कहावत है कि कोई एक चाटा मारता है उसकी गलती है, दूसरा चाटा मारता है तो आपकी गलती है. यह बात उचित नहीं कि भारत की आजादी ‘बिना खड्ग, बिना ढाल’ के मिल गयी. आजाद हिंद फौज के 26 हजार जवानों की शहादत आजादी के लिए ही थी. यह देखकर खुशी होती है कि आज नयी पीढ़ी महात्मा गांधी के बजाय चंद्रशेखर आजाद, सुभाषचंद्र बोस और भगत सिंह को पसंद कर रही है.

जी डी बख्शी ने यह बातें प्रभात खबर कार्यालय में कही. एक कार्यक्रम में शरीक होने जमशेदपुर पहुंचे बख्शी प्रभात खबर कार्यालय भी आये और कई मुद्दों पर अपनी बेबाक राय रखी.

अल्बर्ट एक्का हैं हमारे हीरो

अल्बर्ट एक्का झारखंड के हीरो हैं. उनके बारे में बच्चों को बताया जाना चाहिए. तभी बच्चे फौज और उसकी वीरता के बारे में जान पायेंगे. फिल्म इंडस्ट्री को भी इस बारे में उचित काम करना चाहिए. वे लोग जैसी फिल्में (गैंग्स ऑफ वासेपुर, डॉन, गैंगस्टर, गुंडे) बना रहे हैं उसे देखकर दुख होता है. यही वजह है कि स्कूली बच्चों को देश के असली हीरो के बारे में बहुत जानकारी है. वह क्रिमिनल को तो जानता है पर परमवीर चक्र विजेता के बारे में उसे नहीं मालूम. स्थानीय सैनिकों को हीरो के रूप में दिखाया जाना चाहिए.

लोकगीतों व कविता से देशप्रेम जगाएं

जी डी बक्शी ने कहा कि पहले हमारे में देश में लोकगायक व कवि लोगों में वीरता की भावना जगाते थे. बाद के दिनों में धीरे-धीरे यह खत्म हो गया. गज भर छाती पृथ्वीराज की…, आला उदल बड़े लड़ैया…, बुंदेले हरबोले के मुंह हमने सुनी कहानी थी/खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थी. यह सब हमने बचपन में सुना और आज भी याद है. आज भी ऐसे लोकगीत व कविताओं की जरूरत है.

लड़ो नहीं तो वे तुम्हें मार डालेंगे

वामपंथी विचारधारा के इतिहासकारों ने भारत का इतिहास अकबर से शुरू किया. अकबर तो उज्बेक का था. वहां चले जाइये आज भी वे लोग भारत से लूट कर ले गये सोना से बनी इमारतों को बड़े गर्व से दिखाते व बताते हैं. गीता के पहले अध्याय में भगवान श्रीकृष्ण ने कहा है- लड़ो अर्जुन लड़ो. तुम नहीं मारोगे तो वे तुम्हे मार डालेंगे. हमारे देश के हुक्मरान वर्षों से पाकिस्तान के साथ अहिंसा की बात करते हैं. आज वैचारिक स्तर पर युद्ध की जरूरत है. उठो जागो! और लड़ो.

सिरसा हरियाणा में डेरा सच्चा सौदा पुलिस की कार्रवाई से 36 लोग मारे गये. क्या पुलिस पर एफआइआर दर्ज हुई? जब चंडीगढ़ में यह हो सकता है तो कश्मीर में क्यों नहीं हो सकता? वहां जवानों पर पत्थर मारे जा रहे हैं. वहां सेना के हाथ बंधे हुए हैं. फ्री हैंड कीजिये. दस-बारह के करते ही पत्थर बरसाने वालों के होश ठिकाने आ जायेंगे.

नयी पीढ़ी में क्षात्र भाव लाना होगा

1971 की लड़ाई में अहम भूमिका निभाने वाले सेवानिवृत सेना अधिकारी बख्शी ने कहा कि कि हमें नयी पीढ़ी में क्षात्र भाव लाना होगा. वीरता के भाव श्मशान में आते हैं. क्योंकि वहां सब कुछ स्वाहा हो जाता है. शरीर का कण-कण खत्म हो जाता है. लेकिन आत्मा नहीं मरती, नैनं छिंदंति शस्त्राणि नैनं दहति पावकः/ न चैनं क्लेदयंत्यापो न शोषयति मारुतः. जब हम इस तरह से सोचेंगे तो वीरता का भाव पैदा होगा.

उन्होंने कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध के समय 25 लाख भारतीय सेना थी, और मात्र 40 हजार अंग्रेज थे. परंतु हममें लड़ने की भावना नहीं थी.

…और साइड हो गये पटेल

उन्होंने कहा कि आजादी किसी ने दिलायी और मलाई खायी किसी और ने. राज किया नेहरू ने. प्रधानमंत्री बनने के लिए कांग्रेस के 16 में से 14 वोट पटेल को मिले थे. लेकिन पटेल साइड हो गये. इसे उजागर करना बहुत जरूरी है. हमारे आइकन सरदार पटेल हैं. जिसकी स्टैच्यू ऑफ यूनिटी प्रतिमा बनी है. जिसे अब बच्चा-बच्चा जान पायेगा. हमारे हीरो भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद हैं.

आम आदमी की जान की कीमत नहीं?

तीस साल से हमारे लोग मारे जो रहे हैं. 1980 के दशक में पंजाब में 21 हजार लोग मारे गये. जम्मू-कश्मीर में 45 हजार लोग शहीद हुए. 1993 से शहरों में बम से लोगों को मारना शुरू हो गया. इसमें अब तक 15 हजार लोग मारे जा चुके हैं. क्या आम आदमी की जान की कीमत नहीं है? हमारे एक भी लोग क्यों मारे जा रहे हैं. ऐसे में पाकिस्तान से बातचीत क्यों जारी रहनी चाहिए?

रोहिंग्या की आड़ में सेना पर नजर

उन्होंने करगिल विजय गाथा का जिक्र करते हुए कहा कि पंजाब में उग्रवाद फिर से पनप रहा है. वहां ड्रग्स और हथियार भेजे जा रहे हैं. रफाल देश में आया नहीं पर हल्ला पहले ही मच गया. रोहिंग्या को जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में सेटल किया जा रहा है. आर्मी कैंप के इर्द-गिर्द उसे बसाया जा रहा है. वे उसकी आड़ में सेना की गतिविधियों पर पर नजर रख सकते हैं. इस देश के लोगों को इस बारे में आवाज उठानी चाहिए. इसका विरोध करना चाहिए. अब वक्त आ गया है कि हमें दुश्मन को उसके घर में जाकर मारना होगा. हर लड़ाई पानीपत में क्यों लड़ी जाये, पेशावर, करांची में क्यों नहीं?

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