एमजीएम की दुर्दशा को जल्द सुधारने की जरूरत : काले

Updated at : 01 Oct 2018 5:32 AM (IST)
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एमजीएम की दुर्दशा को जल्द सुधारने की जरूरत : काले

जमशेदपुर : भाजपा नेता अमरप्रीत सिंह काले ने कहा कि केंद्र सरकार की आयुष्मान भारत योजना सराहनीय कदम है अौर लाखों गरीब लोगों को इस योजना से लाभ मिल सकता है. लेकिन शहर अौर कोल्हान के सबसे बड़े अस्पताल में व्याप्त खामियों के कारण योजना का पूरा फायदा मिलना संभव नहीं लग रहा है. काले […]

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जमशेदपुर : भाजपा नेता अमरप्रीत सिंह काले ने कहा कि केंद्र सरकार की आयुष्मान भारत योजना सराहनीय कदम है अौर लाखों गरीब लोगों को इस योजना से लाभ मिल सकता है. लेकिन शहर अौर कोल्हान के सबसे बड़े अस्पताल में व्याप्त खामियों के कारण योजना का पूरा फायदा मिलना संभव नहीं लग रहा है. काले ने एमजीएम अस्पताल की दुर्दशा को जल्द सुधारने की जरूरत बताया है.
उन्होंने बयान जारी कर कहा कि आये दिन गरीब मरीज की हो रही मौत की घटनाअों से अस्पताल की छवि पर प्रश्न चिन्ह लग रहे हैं. इस अस्पताल के संबंध में ज्ञात जानकारी अौर आंकड़े डराने अौर चौंकाने वाले हैं, इस लिए शहरवासी होने के नाते उनका कर्तव्य है कि इसकी बेहतरी के लिए प्रयास करें.
काले ने कहा कि इस गंभीर विषय को लेकर जल्द ही क्षेत्र के जन प्रिय विधायक सह मुख्यमंत्री रघुवर दास, स्वास्थ्य मंत्री, मुख्य सचिव एवं स्वास्थ्य सचिव से मिलेंगे. कहा कि जब तक स्थानीय स्तर पर ऐसे अत्यंत महत्वपूर्ण एवं गरीबों से जुड़े अस्पताल पर ध्यान नहीं दिया जायेगा, तब तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आयुष्मान भारत योजना फलीभूत नहीं हो पायेगी.
डॉक्टरों की कमी
वरीय रेजीडेंट- स्वीकृत पद 121, वर्तमान में कार्यरत 23, रिक्त पद 98
प्रमुख विभागों की स्थिति इन विभागों में एक भी वरीय रेजीडेंट नहीं- पीडियाट्रिक, डर्मेटोलॉजी, लेप्रोसी, साइकेट्री, आर्थो, आई, रक्त अधिकोष, फिजिकल मेडिसीन एंड रिहैबिलिटेशन, आइसीयू, आइसीसीयू. जूनियर डॉक्टर व ट्रेनी भी यूनिट में रहते हैं, पर इनका कोई स्वीकृत पद नहीं है. कॉलेज के सीनियर छात्र ही जूनियर डॉक्टर गिने जाते हैं. एक यूनिट में एक से दो वरीय रेजीडेंट, तीन जूनियर डॉक्टर व एक से दो ट्रेनी होते हैं.
दवा की कमी
अस्पताल में स्वीकृत दवा-120
उपलब्ध दवायें- 34
अोपीडी में स्वीकृत दवायें-56
उपलब्ध दवायें-16
दो माह पूर्व संयुक्त सचिव की मांग पर 893 तरह की दवाअों की सूची भेजी गयी थी, लेकिन अब तक इनकी आपूर्ति नहीं हुई. अस्पताल में जनवरी 2018 के बाद से ही दवाअों का बड़ा स्टॉक नहीं आया है, छिटपुट आपूर्ति ही हुई है.
ब्लड बैंक
स्वीकृत कर्मचारी- 13
वर्तमान कार्यरत-05
आवश्यक रक्त संग्रह-120 यूनिट
अधिकांशत: उपलब्ध रहता है- 10 से 50 यूनिट
ब्लड बैंक में दो साल से ब्लड सेपरेटर मशीन रखी हुई है, पर लाइसेंस न मिलने के कारण शुरू नहीं हो सकी. जिससे प्लेटलेट्स, प्लाज्मा, आरबीसी, एचबीसी आदि नहीं मिलता. ब्लड बैंक में अंडरग्राउंड डबल लाइन वायरिंग न होने के कारण भी ब्लड सेपरेटेर शुरू नहीं हो सकता.
कंडम घोषित भवन
ब्लड बैंक भवन, पुराना जीएनएम स्कूल भवन, नया जीएनएम स्कूल भवन 2015 से ही अधूरा पड़ा हुआ है. इमरजेंसी के प्रथम तल के दायीं अोर का हिस्सा.
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