वार्ड में कितने मरीज भर्ती हैं, यह भी नहीं बता पाये एमजीएम के डॉक्टर

Updated at : 19 Sep 2018 5:20 AM (IST)
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वार्ड में कितने मरीज भर्ती हैं, यह भी नहीं बता पाये एमजीएम के डॉक्टर

जमशेदपुर : प्री पीजी कंप्लेन की पढ़ाई के लिए उपकरण उपलब्ध हैं या नहीं, इसकी जांच करने के लिए मंगलवार को मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआइ) की टीम एमजीएम अस्पताल पहुंची. अस्पताल में 59 पीजी की सीट के लिए आवेदन दिया गया है. वहीं, टीम के सदस्यों ने प्री पीजी के साथ ही 100 सीट […]

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जमशेदपुर : प्री पीजी कंप्लेन की पढ़ाई के लिए उपकरण उपलब्ध हैं या नहीं, इसकी जांच करने के लिए मंगलवार को मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआइ) की टीम एमजीएम अस्पताल पहुंची. अस्पताल में 59 पीजी की सीट के लिए आवेदन दिया गया है. वहीं, टीम के सदस्यों ने प्री पीजी के साथ ही 100 सीट को ध्यान में रखते हुए जांच की. टीम में डॉ गंगाधर गोधा, डॉ बंसल व एक अन्य डॉक्टर शामिल थे. टीम के सदस्य मंगलवार की सुबह लगभग 9.30 बजे अस्पताल पहुंचे.
सदस्यों ने अस्पताल में आइसीयू, आर्थो, सर्जरी, ईएनटी, आई, बच्चा वार्ड, एनआइसीयू, पीआइसीयू, सीटी स्कैन, चर्मरोग विभाग, मेडिकल वार्ड सहित अन्य विभागों को देखा. इस दौरान टीम के सदस्य अस्पताल में भर्ती मरीजों की संख्या लेने के बाद वार्ड में मरीजों से जाकर मिले. साथ ही कौन मरीज कब से भर्ती है, इसकी भी जानकारी ली.
जांच के दौरान कई विभाग में बहुत ही कम मरीज मिले, जिसके बाद विभाग में मरीजों की संख्या कम होने का कारण पूछे जाने पर कोई भी डॉक्टर सही से जानकारी नहीं दे पाये. यहां तक कि वार्ड में कितने मरीज भर्ती हैं, यह जानकारी भी कई वार्ड के डॉक्टर नहीं दे पाये. वहीं, ईएनटी और आई विभाग के वार्ड में सिर्फ एक-एक मरीज ही मिले.
टीम के सदस्यों ने किस वार्ड में कितने मरीज हैं, पुरुष व महिला की संख्या क्या है, इसके अलग-अलग संख्या की मांग की. जिसकी जांच में डॉक्टरों ने जो बताया था उससे वार्ड में जांच करने पर कम मिले. इसके साथ ही सभी विभागों में मरीजों के रजिस्टर व मरीजों की बीएचटी की जांच की. टीम द्वारा अस्पताल में दो दिनों के अंदर इलाज कराये मरीजों की संख्या, सर्जरी, एक्सरे, सिटी स्कैन से संबंधित रिपोर्ट लेकर गये. इसके रिपोर्ट पर ही अस्पताल में पीजी की पढ़ाई शुरू हो सकेगी.
मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों के कागजात की जांच
टीम के सदस्य अस्पताल का निरीक्षण करने के बाद मेडिकल कॉलेज पहुंचे. वहां इ-लाइब्रेरी, ई-क्लास सहित अन्य जगहों का निरीक्षण किया. इसके साथ ही मेडिकल कॉलेज व अस्पताल के डॉक्टरों का हाजिरी रजिस्टर सहित अन्य कागजातों की जांच की.
निरीक्षण में एबीजी मशीन मिली खराब, गुस्साये टीम के सदस्य
एमसीआइ की टीम ने अस्पताल में एबीजी (आरटेरियल ब्लड गैस) एनालाइजर की बारे में पूछा गया, तो पहले डॉक्टरों व नर्सों ने टीम को बताया कि एबीजी मशीन अस्पताल में उपलब्ध है, लेकिन जब टीम के सदस्यों ने मशीन को चालू करके दिखाने को कहा तो बताया गया कि उसमें काटरेज नहीं है. काटरेज खत्म होने की बात सुनते ही टीम के सदस्य गुस्सा हो गये.
वहीं सभी को सही-सही चीजों की जानकारी देने के लिए कहा, ताकि सही रिपोर्ट तैयार किया जा सके. इसके साथ ही आइसीयू में एक वेंटीलेटर चालू हालत में मिला, बाकी चार खराब हैं. जो चालू है, उसका भी दो महीने से उपयोग नहीं किया गया. इसके साथ ही सर्जरी वार्ड में बने सेंट्रल इस्टेलाइजेशन को भी दो भागों में नहीं बांटा गया है. अस्पताल में तीन एक्सरे मशीन की जगह दो ही मिली. किसी भी वार्ड में पैंट्रीकार नहीं था. वहीं ऑर्थो विभाग में पैंट्रीकार है, लेकिन उसको स्टोर बनाकर रखा गया है. इसके साथ ही मेडिकल वार्ड में भी पैंट्रीकार बनाया गया है, लेकिन उसमें ताला लगा हुआ था.
कई ओपीडी में नहीं मिले जूनियर रेजीडेंट
टीम ने जांच के दौरान पाया कि कई ओपीडी में सीनियर डॉक्टर मरीजों को देख रहे थे. उनके साथ जूनियर रेजीडेंट नहीं थे. टीम द्वारा पूछने पर वहां पर उपस्थित डॉक्टर इसकी जानकारी नहीं दे सके.
नहीं बना मनोरोग विभाग
टीम अस्पताल में मनोराेग विभाग का वार्ड खोजती ही रही, लेकिन डॉक्टरों द्वारा बताया गया कि अभी तक अस्पताल में इस विभाग के लिए वार्ड नहीं बनाया गया है. जबकि 10 बेड का वार्ड बनना था.
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