हजारीबाग के 1457 सरकारी स्कूलों में फंड की किल्लत, शिक्षक अपनी जेब से चला रहे शिक्षा व्यवस्था

हजारीबाग में उत्तरी छोटानागपुर का क्षेत्रीय शिक्षा संयुक्त निदेशक का कार्यालय
Hazaribagh News: हजारीबाग जिले में 1457 सरकारी स्कूलों को विकास कोष की राशि नहीं मिली, शिक्षा अधिकारी मौन, शिक्षक अपने पैसे से खरीद रहे नामांकन और उपस्थिति पंजी. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.
हजारीबाग से आरिफ की रिपोर्ट
Hazaribagh News: झारखंड के हजारीबाग जिले में अधिकांश सरकारी स्कूलों के शिक्षकों की परेशानी कम नहीं हो रही है. 1 अप्रैल से नया सत्र चालू है. एक ओर बच्चों को समय पर किताबें नहीं मिली है. वहीं, दूसरी ओर विद्यालय विकास कोष की राशि भी स्कूलों तक समय पर नहीं पहुंचा है. ऐसे में अधिकतर शिक्षक नामांकन पंजी और उपस्थिति पंजी दोनों की खरीदारी अपने पैसों से किया है. कई शिक्षकों ने बताया शिक्षा विभाग की कार्यशैली से वे परेशान है. विद्यालय विकास कोष सत्र 2025-26 का पैसा 31 मार्च से पहले मिलना था. वह नहीं मिला बल्कि लेप्स कर गया है. वहीं, 2026-27 का पैसा सत्र चालू के 24 दिनों बाद भी नहीं मिला है. शिक्षक बता रहे हैं कि उनकी समस्या सुनने के बाद शिक्षा अधिकारी पूरी तरह मौन हैं. कुछ भी कहने से परहेज कर रहे हैं.
क्या है मामला?
जिले में प्रारंभिक यानी कक्षा 1 से 8 के 1457 स्कूल है. नए विद्यार्थियों के लिए नामांकन पंजी के साथ-साथ उपस्थिति पंजी की खरीदारी को लेकर विभाग पैसा देती है. इस पैसे से एक वर्ष के लिए शिक्षक चॉक, डस्टर, खली के साथ अन्य महत्वपूर्ण शिक्षण सामग्री की खरीदारी करते हैं. विभाग की ओर से अब-तक स्कूलों को पैसा (ग्रांट राशि) नहीं भेजा गया है. कई शिक्षक जुगाड़ माध्यम से स्कूलों में बच्चों के शिक्षण कार्य को पूरा कर रहे है. वहीं, अधिकांश शिक्षकों ने सत्र चालू होने के बाद नामांकन और उपस्थिति पंजी की खरीदारी अपने-अपने वेतन के पैसे से किया है. इससे कहीं-कहीं एक-एक शिक्षकों ने अपने जेब से 10,000 तक खर्च किया है.
विद्यालय विकास कोष और स्वच्छता व्यवस्था पर प्रावधान
राज्य स्तर पर समग्र शिक्षा अभियान के तहत झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद (रांची) प्रारंभिक स्कूलों को प्रतिवर्ष मार्च महीने के शुरू में विद्यालय विकास कोष की राशि जारी करता है. इससे स्कूलों में पठन-पाठन की सामग्री समय पर खरीदारी कर पढ़ाई को सुचारू रूप से जारी रखा जा सके. इतना ही नहीं विद्यालय विकास कोष की 10 प्रतिशत राशि स्वच्छता कार्य पर खर्च करने का प्रावधान है. इसमें स्कूल की साफ-सफाई, पेयजल की व्यवस्था और शौचालय की समय-समय पर सफाई जैसे कार्य शामिल है.
छात्रों की संख्या अनुसार पैसा
विद्यालय विकास कोष की राशि स्कूलों में छात्रों की संख्या अनुसार मिलता है. 100 छात्र पर एक स्कूल को 25 हजार, 101 से 200 छात्र वाले स्कूल को 50 और 201 से 300 छात्र वाले स्कूल को 75 हजार रूपये मिलता है. यह राशि विद्यालय प्रबंधन समिति (एसएमसी) के खाते में पहुंचता है. समिति से जुड़े स्कूल के शिक्षक (पदेन सचिव) एवं अध्यक्ष दोनों मिलकर राशि की निकासी कर इसे खर्च करते हैं.
विद्यालय विकास कोष की राशि सभी माध्यमिक और प्रारंभिक स्कूलों को उपलब्ध
माध्यमिक स्कूलों यानी कक्षा 9 से 12 में विद्यालय विकास कोष की राशि प्राप्त हो चुकी है. इसके साथ ही प्रारंभिक विद्यालयों को भी यह राशि मिलने की प्रक्रिया तय है. हजारीबाग के जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) प्रवीण रंजन ने इसकी जानकारी दी.
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By Priya Gupta
प्रिया गुप्ता प्रभात खबर के लाइफस्टाइल बीट पर 1 साल से काम कर रही हैं. यहां वे हेल्थ, फैशन और भी ट्रेंड से जुड़ी आर्टिकल लिखती हैं. ये हर लेख को दिल से लिखती है, जो पाठकों को सिर्फ जानकारी नहीं, एक एहसास पहुंचा सकें.
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