थोड़ी सी आग है बहुत धुआं है

थोड़ी सी आग है बहुत धुआं है हजारीबाग. शहर में साहित्यिक गतिविधियां तेज हो गयी है. इस सिलसिले में परिवेश की ओर से रविवार शाम काव्य-गोष्ठी हुई. कार्यक्रम सीआरपीएफ मुन्ना सिंह के झील स्थित आवास पर हुआ. अध्यक्षता वरिष्ठ कवि डॉ शंभु बादल व संचालन शिक्षक बलदेव पांडेय ने किया. सुप्रसिद्ध कवि डॉ भारत यायावर […]
थोड़ी सी आग है बहुत धुआं है हजारीबाग. शहर में साहित्यिक गतिविधियां तेज हो गयी है. इस सिलसिले में परिवेश की ओर से रविवार शाम काव्य-गोष्ठी हुई. कार्यक्रम सीआरपीएफ मुन्ना सिंह के झील स्थित आवास पर हुआ. अध्यक्षता वरिष्ठ कवि डॉ शंभु बादल व संचालन शिक्षक बलदेव पांडेय ने किया. सुप्रसिद्ध कवि डॉ भारत यायावर ने जीवन के बड़े संदर्भों को छूनेवाली कविता सुनायी- थोड़ी सी है आग, बहुत धुआं है़ डॉ शंभु बादल नदी में कोई कंकड़ न डाले कविता सुनायी. गणेश चंद्र राही ने बाजार कविता पढ़ी. मनुष्य के हालात पर कविता चोट करती है-चीजों का भाव बढ़ा है,और आदमी का घटा है. मुन्ना सिंह ने प्राकृतिक परिवेश एवं मानवीय संवेदनाओं को उजागर करनेवाली कविता अहं का अनुस्वार पढ़ा.अजय कुमार ने यूं लबालब आंसुओं का जाम है, मन्मथनाथ गुप्त ने रूप चलन भी सुंदर है़ बृजलाल राणा ने बसुला मेरे प्यारे व प्रकृति परक कविता पढ़ी. विकास कुमार एवं प्रमोद कुमार सिंह ने भी कविताएं सुनायीं. जिसमें वर्तमान राजनीति की विसंगतियों का चित्रण है.बलदेव पांडेय ने बाल श्रम के दर्द को कविता में उभारा. शंभु बादल ने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि नयी प्रतिभाओं को ऐसी गोष्ठियों में उभरने का अवसर मिलता है. इन कविताओं ने श्रोताओं का मन मोह लिया.
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