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पूर्व मंत्री देवदयाल नहीं रहे, राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार आज, मुख्यमंत्री सहित राजनीतिक दलों के नेताओं ने जताया शोक

Updated at : 18 Oct 2018 4:18 AM (IST)
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पूर्व मंत्री देवदयाल नहीं रहे, राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार आज, मुख्यमंत्री सहित राजनीतिक दलों के नेताओं ने जताया शोक

हजारीबाग : राज्य के पूर्व कृषि मंत्री देवदयाल कुशवाहा का बुधवार दोपहर 1.15 बजे रांची के एक निजी नर्सिंग होम में निधन हो गया़ वे 82 वर्ष के थे. पैतृक आवास झुमरा के तिलैया शमशान घाट में गुरुवार को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार होगा. मुख्यमंत्री रघुवर दास ने शोक व्यक्त करते हुए जिला […]

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हजारीबाग : राज्य के पूर्व कृषि मंत्री देवदयाल कुशवाहा का बुधवार दोपहर 1.15 बजे रांची के एक निजी नर्सिंग होम में निधन हो गया़ वे 82 वर्ष के थे. पैतृक आवास झुमरा के तिलैया शमशान घाट में गुरुवार को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार होगा. मुख्यमंत्री रघुवर दास ने शोक व्यक्त करते हुए जिला के उपायुक्त को राजकीय सम्मान के साथ अंत्येष्टी का निर्देश दिया है़
इधर निधन की सूचना मिलते ही हजारीबाग सहित उनके पैतृक आवास में शोक की लहर दौड़ गयी़ झुमरा स्थित आवास में उनके समर्थक और सगे-संबंधी जुटने लगे़ स्व कुशवाहा की पत्नी लोचनी देवी, भाई प्रभु दयाल, जर्नादन देव, बंशीधर, पुत्र प्रकाश दयाल, तापेश्वर दयाल, बेटी विमला देवी, तारा देवी समेत पूरा परिवार शोकाकुल है.
जनता से जुड़कर राजनीति की : देवदयाल के निधन पर राजनीतिक दलों के नेताओं ने शोक व्यक्त किया है. सभी नेताओं ने कहा कि सादगी से राजनीति कर समाजसेवा का सबसे सशक्त उदाहरण देवदयाल जी ने दिया है. केंद्रीय नागरिक उडडयन राज्यमंत्री जयंत सिन्हा, विधायक मनीष जायसवाल, भाजपा नेता दीपक प्रकाश, राजकुमार लाल, झाविमो केंद्रीय नेता शिवलाल महतो, प्रदीप प्रसाद, कांग्रेस जिलाध्यक्ष देवकुमार राज, भाजपा जिलाध्यक्ष टुन्नू गोप आदि ने कहा कि देवदयाल जी ने सादगी से राजनीति कर समाजसेवा का सबसे सशक्त उदाहरण दिया है. भाजपा के वरिष्ठ नेताओं में से एक देवदयाल कुशवाहा ने हमेशा जनता से जुड़कर राजनीति की. राजनीतिक चमक दमक से काफी दूर रहते थे.
शिक्षक से मंत्री तक का सफर, सादगी भरा था जीवन : देवदयाल कुशवाहा का जन्म 1936 में हजारीबाग जिले के झुमरा में हुआ था. जिला स्कूल हजारीबाग से मैट्रिक और संत कोलंबा कॉलेज से बीए की पढाई करने के बाद महेशरा हाई स्कूल में शिक्षक बने. दस वर्षों तक शिक्षण कार्य के बाद इस्तीफा देकर राजनीति में प्रवेश किया.
महेशरा से दो बार सरपंच बने. 1980 में भाजपा की राजनीति से जुड गये. 1985 में भाजपा जिलाध्यक्ष किसान मोरचा का दायित्व संभाला. 1985 में भाजपा के टिकट से पहलीबार चुनाव लडे. लेकिन कांग्रेस प्रत्याशी एचएच रहमान से हार गये. 1990, 1995 और 2000 में लगातार तीन बार भाजपा के टिकट से हजारीबाग सदर विधानसभा से एमएलए बने.
2000 में पहली बार कृषि मंत्री बने. बाद में अर्जुन मुंडा की सरकार में पीडब्लूडी भवन मंत्री का भी दायित्व संभाला. स्व कुशवाहा अपनी सादगी को लेकर राजनीतिक गलियारे में जाने जाते थे़ वह सरल स्वाभाव के थे और मूल रूप से कृषक रहे़
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