मुंगेर से फरार होने के बाद हथियार तस्कर मंजर आलम पांच दिन तक गिद्दी में रुका था
Updated at : 05 Oct 2018 1:37 AM (IST)
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गिद्दी (हजारीबाग) : मुंगेर से फरार होने के बाद हथियार तस्कर मंजर आलम उर्फ मंजी अपने परिवार के साथ पांच दिनों तक गिद्दी में अपने साला मोनाजिर हसन उर्फ लक्की के क्वार्टर में ठहरा था. वह सफेद रंग की स्कॉर्पियो से यहां आया था. वह यहां गुप्त ढंग से रहता था. दिन में वह नहीं […]
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गिद्दी (हजारीबाग) : मुंगेर से फरार होने के बाद हथियार तस्कर मंजर आलम उर्फ मंजी अपने परिवार के साथ पांच दिनों तक गिद्दी में अपने साला मोनाजिर हसन उर्फ लक्की के क्वार्टर में ठहरा था. वह सफेद रंग की स्कॉर्पियो से यहां आया था. वह यहां गुप्त ढंग से रहता था. दिन में वह नहीं निकलता था, लेकिन रात के अंधेरे में वह क्वार्टर से बाहर निकलता था.
जब उसे लगने लगा कि यह जगह हमारे लिए सुरक्षित नहीं है, तब यहां से भी वह अंडरग्राउंड हो गया. मुंगेर पुलिस इस बात की जांच कर चुकी है. वह जहां भी रहा है, वहां पर उसने हथियार की तस्करी की है.
पुलिस को इस बात का संकेत मिल रहा है कि रामगढ़ कोयला क्षेत्र के नामचीन अपराधी गिरोह के हाथों में जो एके-47 है, वह मंजर आलम ने ही बेचा है. पुलिस इसकी तफ्तीश कर रही है. पुलिस को इस बात की पक्की जानकारी है कि मंजर आलम बिहार, झारखंड व उत्तरप्रदेश के कई जिलों में वह हथियार का तस्करी कर चुका है.
मुंगेर पुलिस इस बात से ज्यादा परेशान है कि मंजर आलम मुंगेर में रहता था. उसका मतदाता परिचय पत्र, पेन कार्ड, आधार कार्ड गिद्दी के पते से कैसे बन गया. पुलिस ने इसे गंभीरता से लिया है. इसकी जांच पुलिस कर रही है. जो लोग दोषी होंगे, उन पर कार्रवाई निश्चित रूप से हो सकती है.
गिद्दी के एक पंचायत प्रतिनिधि ने बताया कि कुछ वर्ष पहले मोनाजिर हसन अपने जीजा मंजर आलम का पेन कार्ड के लिए फोटो व कागजात पर हमसे हस्ताक्षर कराने आया था, लेकिन उसने इंकार कर दिया था.
पंचायत चुनाव में हार गया था मोनाजिर
दिलचस्प बात यह है कि मोनाजिर हसन उर्फ लक्की वर्ष 2010 के पंचायत चुनाव में पंसस के लिए गिद्दी क पंचायत से अपना किस्मत भी अाजमाया था, लेकिन उसे हार मिली थी. अब इस बात को बल मिल रहा है कि हथियार तस्कर मंजर आलम का परिचय पत्र बनाने के लिए ही वह चुनाव में कूदा था. मुंगेर पुलिस के सूत्रों से जानकारी मिली है कि मंजर आलम के पूरे पैसे की देखरेख मोनाजिर हसन उर्फ लक्की ही करता था. इसके कई सबूत पुलिस को हाथ लग गयी है.
मंजर आलम का मतदान पहचान पत्र, पेन कार्ड जब्त कर लिया है. मंजर आलम के आधार कार्ड से मोनाजिर ने कई सिम खरीदे थे. उसका इस्तेमाल मोनाजिर कोयला कारोबार के लिए करता था. मंजर आलम हथियार तस्करी का अच्छा-खासा पैसा कोयला कारोबार में लगाता था. दो नंबर का पैसा एक नंबर बनाने के लिए वह यह करता था.
कोयला कारोबार के माध्यम से वह करोड़ों कमा चुका है
पुलिस सूत्रों से जानकारी मिली है कि उसका कोयला कारोबार यहां पर लगभग 15 वर्षों से मंजर आलम फर्म के नाम से चल रहा था. कोयला कारोबार के माध्यम से वह करोड़ों कमा चुका है. पैसे से संबंधित कई बैंक के खाते पुलिस के हाथ लगे हैं. मुंगेर पुलिस ने मंजर आलम का स्कॉर्पियो (जेएच01सीक्यू-1885) जब्त कर लिया है.
यह स्कॉर्पियो मोनाजिर हसन ने अपने नाम से जीजा के लिए खरीदा था. खरीदारी के बाद मंजर आलम के पास यह वाहन मुंगेर में बहुत दिनों तक रहा. मंजर आलम 10 सितंबर को गिद्दी अपने परिवार के साथ स्कॉर्पियो से आया था, लेकिन 14 सितंबर को वाहन छोड़ कर यहां से अंडरग्राउंड हो गया. पहले मोनाजिर हसन अल्टो में चलता था, लेकिन फिलहाल वैगनआर में चल रहा था. मुंगेर पुलिस मोनाजिर हसन से पूछताछ कर रही है. चर्चा है कि गिद्दी में पुलिस को मोनाजिर के क्वार्टर से पैसे भी हाथ लगे हैं.
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