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हजारीबाग : ....जब सैकड़ों पारा शिक्षकों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर अपने खून से पत्र लिखकर दी बधाई

Updated at : 18 Sep 2018 7:23 AM (IST)
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हजारीबाग : ....जब सैकड़ों पारा शिक्षकों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर अपने खून से पत्र लिखकर दी बधाई

संजय सागर हजारीबाग : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के मौके पर हजारीबाग जिले के सभी पारा शिक्षकों ने हज़ारीबाग के समक्ष एकजुट होकर खून से खत लिखकर पीएमओ भेजा है.इसका नेतृत्व एकीकृत पारा शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष संजय दुबे ने किया. झारखंड के छात्र नेता मनोज यादव भी शामिल होकर पारा शिक्षकों को […]

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संजय सागर
हजारीबाग : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के मौके पर हजारीबाग जिले के सभी पारा शिक्षकों ने हज़ारीबाग के समक्ष एकजुट होकर खून से खत लिखकर पीएमओ भेजा है.इसका नेतृत्व एकीकृत पारा शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष संजय दुबे ने किया. झारखंड के छात्र नेता मनोज यादव भी शामिल होकर पारा शिक्षकों को हौसला बढ़ाया.
हजारीबाग के समाहरणालय के समक्ष हजारीबाग जिले की विभिन्न प्रखंडों के आए हुए सैकड़ों पारा शिक्षकों ने आकर धरना प्रदर्शन किया .और अपने लहू से प्रधानमंत्री के नाम पत्र लिखा .पारा शिक्षकों ने इंजेक्शन दिए जाने वाले सीरीज से अपने शरीर से खून निकालकर पत्र में अपने दुख और व्यथा को वर्णन किया.
पारा शिक्षकों ने सर्वप्रथम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर हार्दिक बधाई दी है. और साथ ही अपने दुखों की कहानी का वर्णन करते हुए समान कार्य, समान वेतन, टेट पास पारा शिक्षकों को नियुक्ति समेत विभिन्न मांगों को वर्णन किया है.
पत्र में पारा शिक्षकों ने वर्णन किया है कि वे 10- 15 वर्षों से सरकारी स्कूलों में सेवा देते आ रहे हैं. वह सरकारी शिक्षकों की तरह समान काम करते हैं. लेकिन सरकार इस ओर ध्यान नही दिया गया.सरकारी शिक्षकों के अपेक्षा इन्हें बहुत ही कम मानदेय दी जा रही है.
जिससे इन्हें अपने परिवारों को पालन पोषण करने में काफी परेशानियां होती है .इस आंदोलन का नेतृत्व करने में संजय दुबे ,मनोज यादव, चंदन ठाकुर, मो शमशेर आलम ,जय जैलाल आदि ने की. ज्ञातव्य हो कि पारा शिक्षक 2003 से सरकारी स्कूलों में ग्राम शिक्षा समिति के द्वारा बहाली किए जाने के बाद वे सेवा देते आ रहे हैं .इन्हें आरंभ में कोई मानदेय नहीं मिलता था। कई महीनों तक निशुल्क सेवा दिया गया। जब पारा शिक्षकों ने मानदेय की मांग किया तो उन्हें आराम में ₹1000 दी जाने लगी. उसके बाद से कई आंदोलनों के बाद इन्हें अब तक 7:50 हजार से लेकर ₹8000 मानदेय दी जा रही है.
जबकि समान काम करने वाले सरकारी शिक्षकों का वेतन 40000 से लेकर ₹80000 तक दी जा रही है .लेकिन विडंबना है कि समान काम के बदले समान वेतन पारा शिक्षकों को नहीं दी जा रही है .इस मांग को लेकर पारा शिक्षकों ने सैकड़ों बार आंदोलन कर चुके हैं.
राज्य सरकार द्वारा कई बार आश्वासन दिए जा चुके हैं फिर भी इनके मांग अभी तक पूरी नहीं हो पाई. ज्ञात हो कि 3 माह पूर्व झारखंड सरकार के नेतृत्व में अष्ट मंडल कमेटी बनाकर विभिन्न प्रदेशों के पारा शिक्षकों के हाल और स्थिति को अध्ययन किया गया .अध्ययन किये जाने के बाद भी झारखंड सरकार द्वारा अब तक उदासीनता दिख रही है .इसमें पारा शिक्षक आंदोलन करने के मूड में है.
पारा शिक्षकों के प्रदेश स्तर पर आंदोलन तेज करने वाले संजय दुबे ने कहा कि पूरे झारखंड के पारा शिक्षक आज खून से खत लिखकर प्रधानमंत्री को जन्मदिन की बधाई दी है .और अपने दुख का वर्णन की है.
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