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शर्मनाक! दुराचारियों के गुनाहों की सजा भुगत रही दुष्कर्म की शिकार दो छात्राएं, बनी मां

By Prabhat Khabar Print Desk
Updated Date
दुराचारियों के गुनाहों की सजा भुगत रही दुष्कर्म की शिकार दो छात्राएं
दुराचारियों के गुनाहों की सजा भुगत रही दुष्कर्म की शिकार दो छात्राएं
सांकेतिक तस्वीर

gumla news, physical assault in gumla गुमला : जो बच्चियां अब तक खुद जीने का सलीका नहीं सीख पायीं, वे आज दुराचारियों के गुनाह की सजा भुगत रही हैं. मां होना क्या होता है, मां की जिम्मेदारियां क्या होती हैं, दुधमुंहे बच्चे को कैसे संभाला जाता है और उसकी परवरिश कैसे की जाती है, इन सवालों से अनजान गुमला की दो नाबालिग छात्राएं मां बन गयी हैं.

नौ माह पहले दुष्कर्म का शिकार हुई इन लड़कियों ने 26 जनवरी को गुमला सदर अस्पताल में दो बच्चों (दोनों लड़के) को जन्म दिया है. समाज के तानों से बचने के लिए दोनों पीड़िता ने अपने बच्चों को सीडब्ल्यूसी को अपने संरक्षण में लेने की गुहार लगायी है, ताकि उनकी परवरिश अच्छी तरह से हो सके. दोनों बच्चियों का जिंदगी नरक बनानेवाले आरोपी फिलहाल जेल में हैं.

जानकारी के अनुसार, दुष्कर्म पीड़िताओं में से पहली 14 वर्षीय लड़की रायडीह प्रखंड की रहनेवाली है. गांव के ही एक युवक ने उसे प्रेमजाल में फंसा कर दुष्कर्म किया था. जब वह गर्भवती हुई, तो मामले का खुलासा हुआ. 10 दिन पहले इस मामले में केस दर्ज किया गया था. वहीं, दूसरी 16 वर्षीया पीड़िता बिशुनपुर प्रखंड की रहनेवाली है. उसके साथ जंगल में दुष्कर्म हुआ था. संबंधित थानों में केस दर्ज किये जाने के बाद से ही दोनों सीडब्ल्यूसी के संरक्षण में थीं.

प्रसव की अवधि पूरी होने पर दोनों लड़कियों को 25 जनवरी को अस्पताल में भर्ती कराया गया था. बच्चों को जन्म देने के बाद दोनों लड़कियों को सुरक्षा के साथ अस्पताल में ही रखा गया है. अस्पताल के डॉक्टरों के अनुसार दोनों पीड़िता और उनके बच्चे स्वस्थ हैं.

26 जनवरी को हुआ दोनों बच्चों का जन्म

एक पीड़िता रायडीह प्रखंड की और दूसरी बिशुनपुर प्रखंड की रहनेवाली है

पुख्ता सुरक्षा के बीच बच्चों के साथ सदर अस्पताल में भर्ती है दोनों पीड़िताएं

दोनों बच्चियों की जिंदगी नरक बनानेवाले आरोपी पहुंच चुके हैं सलाखों के पीछे

गर्भपात की मंजूरी चाहती थी पीड़िता

बिशुनपुर निवासी दुष्कर्म पीड़िता को जब पता चला कि वह गर्भवती है, तो उसने समाज के डर से सीडब्ल्यूसी को आवेदन सौंप कर बच्चे को गर्भ में ही मारने की इजाजत मांगी. इधर, बच्चे के जन्म का समय पूरा हो चुका था, इसलिए सीडब्ल्यूसी ने कानून का हवाला देते हुए ऐसा करने से इनकार कर दिया और लड़की को अपने संरक्षण लिया.

दुष्कर्म पीड़ित दो नाबालिग लड़कियों ने अस्पताल में ही बच्चे को जन्म दिया है. मां व बच्चे स्वस्थ हैं. दोनों लड़कियां अपने बच्चों को सीडब्ल्यूसी को हैंडओवर करना चाहती हैं. कागजी प्रक्रिया के बाद दोनों बच्चों को हैंडओवर लिया जायेगा. तब तक दोनों लड़कियों व उनके बच्चों को सीडब्ल्यूसी के संरक्षण में रखा गया है.

- सुषमा देवी,

सदस्य, सीडब्ल्यूसी, गुमला

Posted By : Sameer Oraon

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Published Date

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