गुमला का पंपापुर विकास से वंचित, वाइल्ड लाइफ क्षेत्र के कारण पर्यटक सुविधाएं नहीं

Published by : Priya Gupta Updated At : 10 Apr 2026 1:24 PM

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गुमला का पंपापुर पहाड़

Gumla News: पौराणिक मान्यताओं से जुड़ा गुमला का पंपापुर क्षेत्र आज भी पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है, लेकिन वाइल्ड लाइफ क्षेत्र में होने के कारण यहां विकास का कार्य नहीं हो पा रहा है.

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गुमला से दुर्जय पासवान की रिपोर्ट 

Gumla News: पौराणिक मान्यता के अनुसार, झारखंड के गुमला जिले के पंपापुर में भगवान श्रीराम और लक्ष्मण के पांव पड़े थे. साथ में हनुमान भी यहां आए थे. पंपापुर, जिसका वर्तमान नाम पालकोट प्रखंड है. यह राज्य स्तरीय पर्यटक स्थल है. यहां साल के 12 महीने पर्यटक घूमने आते हैं. रामायण युग की जो कहानी पंपापुर पहाड़ से जुड़ी हुई है. उसे ही जानने आते हैं. ऐसे में दुर्भाग्य की बात है कि आज भी यहां पर्यटकों के लिए किसी प्रकार की सुविधा नहीं है. वाइल्ड लाइफ के कारण पंपापुर का विकास रूका हुआ है. पालकोट प्रखंड वन्य प्राणी आश्रयणी क्षेत्र में आता है और पंपापुर पहाड़ भी वन्य प्राणी आश्रयणी क्षेत्र में बीच में है. इस कारण प्रशासन यहां किसी प्रकार का विकास का काम नहीं कर पा रही है. वन विभाग भी पंपापुर पहाड़ में पर्यटकों की सुविधा मुहैया कराने में फेल है. यहां संकीर्ण रास्ता है. जिस कारण लोगों को सुग्रीव गुफा जाने में दिक्कत होती है. सिंगल और टूटी सड़क के कारण मुश्किल से गाड़ियां सु्ग्रीव गुफा तक जाती है. वहीं निर्झर झरना तक जाने के लिए कच्ची सड़क है. पहाड़ पर चढ़ने के लिए वर्षो पहले सीढ़ी बनी थी. अभी यह सीढ़ी जगह-जगह टूट गई है. आसपास झाड़ियां उग गई है,  जिससे भक्तों को शीतलपुर, मलमलपुर जाने में परेशानी होती है. पहाड़ की चोटी पर स्थित माता शबरी के आश्रम और मंदिर तक पहुंचने के लिए सुरक्षित सीढ़ी और लोहे का रेलिंग नहीं है. लोगों ने पंपापुर पहाड़ के सुंदरीकरण, विकास करने और पर्यटकों के लिए सुविधा मुहैया कराने की मांग की है.

पंपापुर की पौराणिक मान्यता

जनश्रुति के अनुसार, माता सीता को खोजते हुए श्रीराम, लक्ष्मण व हनुमान पंपापुर पधारे थे. इस दौरान यहां माता शबरी ने श्रीराम को बैर खिलाएं थे. वहीं पंपापुर में ही सुग्रीव गुफा है. जहां सुग्रीव से श्रीराम की मुलाकात हुई थी. रामायण युग के ये सभी स्रोत अभी भी पंपापुर में है. बालि और सुग्रीव का भी राज्य यहां था. यहां तक की शबरी माता का आश्रम भी यहीं है. जहां माता शबरी ने भगवान राम को जूठे बैर खिलाई थी. पंपापुर सरोवर भी यहीं है. जहां भगवान राम अपने भाई लक्ष्मण के साथ रुककर स्नान किए थे. पंपापुर से होकर ही भगवान श्रीराम, लक्ष्मण और हनुमान आगे बढ़ते हुए रामरेखा धाम गए थे.

पंपापुर के संरक्षण की पहल नहीं

महीपाल सिंह ने कहा है कि पंपापुर पहाड़ में घूमने हर दिन भक्त और पर्यटक आते हैं, लेकिन इस क्षेत्र का जितना विकास होना चाहिए था, उतना नहीं हो सका है. यहां रोपवे बनाने की बात हुई थी. प्राचीन तालाब की मरम्मत और संरक्षण की जरूरत है. यहां जितने भी प्राचीन धरोहर है. उसके संरक्षण की पहल आज तक नहीं हुई है. जिला पर्यटन पदाधिकारी प्रवीण कुमार ने कहा पंपापुर का पहाड़ी इलाका वाइल्ड लाइफ में आता है. इस कारण यहां पर्यटन विभाग की ओर से कुछ काम नहीं हो रहा है. यहां विकास के काम वन विभाग ही कर सकता है. ऐसे, पर्यटन विभाग ने पंपापुर के विकास के लिए लगातार प्रयासरत है.

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लेखक के बारे में

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प्रिया गुप्ता प्रभात खबर डिजिटल में जूनियर कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें कंटेंट राइटिंग के क्षेत्र में एक वर्ष से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह झारखंड बीट पर काम कर रही हैं, जहां वह खबरों को आसान भाषा में लिखती हैं. इससे पहले वह लाइफस्टाइल बीट पर काम कर चुकी हैं, जहां उन्होंने हेल्थ, रेसिपी, मेहंदी डिजाइन और फैशन से जुड़ी खबरों पर काम किया. इसके अलावा, उन्होंने नेशनल प्रिंटर और लोकल चैनलों में भी काम किया है. उन्होंने ग्रेजुएशन की पढ़ाई डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय से और मास्टर की पढ़ाई एमिटी यूनिवर्सिटी झारखंड से पूरी की है.

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