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गुमला के लोहरा उरांव ने पाकिस्तान के खिलाफ लड़े थे 2 युद्ध, 1965 और 1971 में दिखाया था पराक्रम

Updated at : 30 Nov 2025 5:41 AM (IST)
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Lohra Oraon Death Anniversary

लोहरा उरांव की प्रतिमा और उनका फाइल फोटो. फोटो : प्रभात खबर

Lohra Oraon Death Anniversary: भारत-पाक युद्ध के नायक परमवीर चक्र विजेता लांसनायक अलबर्ट एक्का को तो सभी जानते हैं, लेकिन इसी जिले के बरगांव के लोहरा उरांव के बारे में बहुत कम लोगों को जानकारी है. हालांकि, गुमला के युवाओं के लिए लोहरा उरांव आज भी प्रेरणास्रोत हैं. महज 27 साल की उम्र में 1 दिसंबर 1971 को पाकिस्तानी सैनिकों से लोहा लेते हुए शहीद हो गये थे.

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Lohra Oraon Death Anniversary: झारखंड में गुमला जिले के सिसई प्रखंड के बरगांव गांव में एक साधारण किसान परिवार में जन्मे लोहरा उरांव आज भी युवाओं के प्रेरणास्रोत हैं. 19 फरवरी 1946 को जन्मे लोहरा उरांव के पिता किसान थे. उनकी मां गृहिणी थीं. बचपन से ही लोहरा उरांव में देशभक्ति और पराक्रम की झलक दिखने लगी थी. कठिन परिस्थितियों में भी उन्होंने अपने जीवन का लक्ष्य मातृभूमि की रक्षा को बनाया.

7 साल 135 दिन की नौकरी में 2 बड़े युद्ध लड़े लोहरा उरांव

भारतीय सेना में 20 जुलाई 1964 को क्राफ्टमैन (सिपाही) के रूप में भर्ती हुए. सेना में शामिल होते ही उन्होंने अनुशासन, समर्पण और अदम्य साहस का परिचय दिया. 7 वर्ष और 135 दिनों की सेवा के दौरान उन्होंने 2 बड़े युद्धों में हिस्सा लिया .भर्ती के महज एक वर्ष बाद ही 1965 में भारत-पाक युद्ध शुरू हो गया. 1965 के भारत-पाक युद्ध में उनके शौर्य को देखते हुए उन्हें रक्षा पदक प्रदान किया गया.

Lohra Oraon Death Anniversary: मात्र 27 साल की उम्र में 1 दिसंबर 1971 को शहीद हुए लोहरा

भारत-पाक युद्ध के दौरान 1 दिसंबर 1971 को लोहरा उरांव मातृभूमि की रक्षा करते हुए मात्र 27 वर्ष की आयु में शहीद हो गये. राष्ट्र के प्रति उनका सर्वोच्च बलिदान देशवासियों के दिलों में हमेशा अमर रहेगा. उनके स्मरण में सिसई थाना रोड पर उनकी प्रतिमा स्थापित की गयी है, जहां हर साल 1 दिसंबर को लोग उन्हें श्रद्धांजलि देते हैं.

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सिसई में रहती है लोहरा उरांव की पत्नी, बेटा एचइसी में कार्यरत

लोहरा उरांव के शहीद होने से पहले उनकी शादी हो चुकी थी. उनकी पत्नी बंधाईन देवी ने एक पुत्र को जन्म दिया था, जिसका नाम मंगल नाथ उरांव रखा गया था. बंधाईन देवी वर्तमान में सिसई में रहतीं हैं. मंगल नाथ उरांव रांची में एचईसी में काम करते हैं. लोहरा का परिवार आज भी गर्व के साथ उनके बलिदान को याद करता है.

लोहरा उरांव की पत्नी बंधाईन उरांव अपने बेटे, बहू और उनके बच्चों के साथ. फोटो : प्रभात खबर

बरगांव के वीर सपूत से आज भी युवा लेते हैं प्रेरणा

बरगांव के इस वीर सपूत से आज भी आने वाली पीढ़ियां सच्ची देशभक्ति की प्रेरणा लेते हैं. उन्हें इस बात के लिए आज भी याद किया जाता है कि इस गांव के एक वीर सपूत ने राष्ट्र की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने का साहस रखता है. शहीद लोहरा उरांव का बलिदान सदैव स्मरणीय और प्रेरणादायी रहेगा.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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