आध्यात्मिक नवजीवन का प्रतीक है राख बुध पर्व : फादर ब्यातुष

आध्यात्मिक नवजीवन का प्रतीक है राख बुध पर्व : फादर ब्यातुष
डुमरी. प्रखंड स्थित आरसी नवाडीह चर्च व रजावल चर्च में बुधवार को राख बुध पर्व श्रद्धा, भक्ति व धार्मिक उत्साह से मनाया गया. मौके पर चर्च में मिस्सा अर्पित किया गया. पहली पाली में मुख्य अनुष्ठाता फादर ब्यातुष किंडो, फादर दोमनिक तिर्की व दूसरी पाली में फादर देवनीश तिर्की व फादर एडवर्ड लकड़ा पवित्र मिस्सा अर्पित किया. मिस्सा को लेकर सुबह से ही दोनों गिरजाघरों में श्रद्धालुओं की भीड़ रही. फादर ब्यातुष किंडो ने कहा कि बुध राख आत्मचिंतन, पश्चाताप व आध्यात्मिक नवजीवन का प्रतीक है. उन्होंने कहा कि मनुष्य जीवन क्षणभंगुर है. इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने कर्मों का मूल्यांकन करते हुए ईश्वर की ओर लौटना चाहिए. उन्होंने चालीसाकाल में सच्चाई और प्रेम को अपनाने, क्षमा व दया का मार्ग चुनने, गरीबों व जरूरतमंदों की सहायता करने तथा प्रार्थना, उपवास व दान को जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान करते हुए कहा कि सच्ची आस्था केवल बाहरी अनुष्ठानों में नहीं, बल्कि हृदय की पवित्रता और अटूट विश्वास में है. मिस्सा के दौरान श्रद्धालुओं के माथे पर राख का चिह्न लगाया गया. इसके माध्यम से यह संदेश दिया गया कि मनुष्य मिट्टी से बना है और एक दिन मिट्टी में ही विलीन हो जायेगा. यह प्रतीक विनम्रता, पश्चाताप व आत्म संयम का संदेश देता है. कार्यक्रम में फादर पिंगल कुजूर, फादर अमर, फादर अजय, फादर अलोइस ठिठियो, फादर क्रिस्टोफर डुंगडुंग, सिस्टर बेरनासिया, सिस्टर फ्लोरा, सिस्टर सिलिबिया, सिस्टर भलेरिया, सिस्टर दिव्या केरकेट्टा, सिस्टर इरमीना, सिस्टर फिलिसितस, सिस्टर अमिता, सिस्टर आरती, सिस्टर भियान्नी आदि उपस्थित थे.
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By Prabhat Khabar News Desk
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