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झारखंड : गुमला में बारिश की स्थिति चिंताजनक, मोटे अनाजों की खेती पर फोकस

Updated at : 24 Jun 2023 7:23 PM (IST)
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झारखंड : गुमला में बारिश की स्थिति चिंताजनक, मोटे अनाजों की खेती पर फोकस

मॉनसून के आगमन के साथ ही खेती-बारी की तैयारियां जोर पकड़ने लगी है. हालांकि अभी तक खेतीबारी लायक पर्याप्त बारिश नहीं हो सकी है. खेती-बारी के लिए पूरे जून माह में लगभग 205 मिमी सामान्य वर्षापात की जरूरत होती है.

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गुमला, जगरनाथ. मॉनसून के आगमन के साथ ही खेती-बारी की तैयारियां जोर पकड़ने लगी है. हालांकि अभी तक खेतीबारी लायक पर्याप्त बारिश नहीं हो सकी है. खेती-बारी के लिए पूरे जून माह में लगभग 205 मिमी सामान्य वर्षापात की जरूरत होती है. जिसके विरूद्ध एक जून से 24 जून तक लगभग 45 मिमी ही वर्षा हो सकी है. जो चिंताजनक है. हालांकि जून माह गुजरने में अभी कुछ दिन शेष है. तब तक और भी बारिश हो सकती है. परंतु पिछले तीन-चार दिनों में जितनी बारिश हुई है, उससे खेतों की मिट्टी हल्की नम हो गयी है. जिसका आकलन करते हुए कई जगहों पर किसान खेतों की जुताई कर रहे हैं. कोई गाय-बैल तो कोई किसान ट्रैक्टर के माध्यम से खेतों की जुताई कर रहे हैं.

कृषि विभाग का मुख्य फोकस मोटे अनाजों की खेती कराने की ओर

इस खरीफ मौसम में जिला कृषि विभाग का मुख्य फोकस मोटे अनाजों की खेती कराने की ओर है. खरीफ मौसम में गुमला जिला में मोटे अनाज में मड़ुआ, ज्वार, बाजरा और गोंदली की खेती की जाती है. हालांकि, जिला प्रशासन द्वारा इस खरीफ मौसम में मड़ुआ की खेती 10 हजार हेक्टेयर भूमि पर कराने की तैयारी की है. परंतु इसके साथ ही जिले में होने वाले अन्य मोटे अनाज ज्वार, बाजरा और गोंदली की खेती कराने पर भी विशेष रूप से कार्य किया जा रहा है. जिला कृषि विभाग की मानें तो इस वर्ष गुमला जिला समेत पूरे झारखंड राज्य में कम वर्षा होने की संभावना है. जिससे खरीफ फसलों की खेती-बारी पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है. जिसे ध्यान में रखते हुए मोटे अनाजों की खेती को बढ़ावा देने पर कार्य किया जा रहा है. मोटे अनाजों की खेती कम पानी में भी किया जा सकता है.

बीज-खाद दुकानों में किसानों की उमड़ रही भीड़

बीज-खाद दुकानों में किसानों की भीड़ उमड़ने लगी है. दुकानों से किसान अपने-अपने खेतों में खेती करने के लिए धान, मक्का, ज्वार, बाजरा, अरहर, उरद, मूंग, मूंगफली, तिल समेत अन्य खरीफ फसलों के बीजों एवं खाद की खरीदारी कर रहे हैं. पिछले तीन-चार दिनों में हुई बारिश से किसानों के चेहरे पर खुशी झलक रही है.

धान के नुकसान की भरपाई मोटे अनाजों से होगी : डीएओ

जिला कृषि पदाधिकारी (डीएओ) अशोक कुमार सिन्हा ने मौसम के पूर्वानुमान के आधार पर अधिक से अधिक किसानों को मड़ुआ, ज्वार, बाजरा और गोंदली की खेती करने की अपील की है. उन्होंने कहा कि कम बारिश की स्थिति में धान का आच्छादन की संभावना कम है. गत वर्ष ही देर से मॉनसूनी बारिश के कारण लगभग 75 प्रतिशत पर ही धान का आच्छादन हो पाया था. इस वर्ष भी यदि वही स्थिति रही तो धान की खेती प्रभावित होगी. इससे बेहतर है कि किसान मोटे अनाजों की खेती पर फोकस करें. ताकि धान में होने वाले नुकसान की भरपाई मोटे अनाजों से की जा सके.

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