गुमला : डॉक्टर ने लिखी खांसी की दवा, निजी दुकानदार ने दिया विटामिन, जानें क्या है पूरा मामला

Updated at : 12 Dec 2021 1:24 PM (IST)
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गुमला : डॉक्टर ने लिखी खांसी की दवा, निजी दुकानदार ने दिया विटामिन, जानें क्या है पूरा मामला

सदर अस्पताल गुमला में इलाजरत मरीजों को आयुष्मान कार्ड में चिकित्सक द्वारा लिखी जानेवाली दवाइयां निजी दवा दुकानदार द्वारा उपलब्ध कराने में असक्षम है. चूंकि अस्पताल के चिकित्सक द्वारा जो दवा लिखी जाती है.

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सदर अस्पताल गुमला में इलाजरत मरीजों को आयुष्मान कार्ड में चिकित्सक द्वारा लिखी जानेवाली दवाइयां निजी दवा दुकानदार द्वारा उपलब्ध कराने में असक्षम है. चूंकि अस्पताल के चिकित्सक द्वारा जो दवा लिखी जाती है. निजी दवा दुकानदार उक्त दवा न देकर दूसरी दवा दे रहे हैं. ऐसा ही एक मामला प्रकाश में आया है. डॉक्टर ने पर्ची में खांसी की दवा लिखी.

परंतु दुकानदार ने मरीज को विटामिन की दवा दे दी. इस मामले का खुलासा शनिवार को चिकित्सक द्वारा वार्ड में इलाजरत मरीजों के स्वास्थ्य अवलोकन में हुआ. यहां बताते चलें कि सदर प्रखंड के करौंदी गांव निवासी शंकर नायक अस्पताल में सोमवार से भरती है. उसके सीने में दर्द, खांसी व बुखार है. डॉक्टर मिथिलेश कुमार ने जांच के बाद उसे अस्पताल में एडमिट किया.

चिकित्सक ने उसके पुर्जा में दवा लिखी थी. परंतु दवा अस्पताल में उपलब्ध नहीं थी. तो मरीज के पुर्जा में आयुष्मान का मोहर मार कर उसे बाहर से दवा लाने के लिए उसकी पत्नी को बोला गया था. मरीज की पत्नी एक निजी दवा दुकान में पुर्जा लेकर दवा लायी. जब शनिवार को डॉक्टर मिथिलेश कुमार राउंड-अप विजिट कर मरीजों का अवलोकन कर रहे थे. उसी समय शंकर नायक की पत्नी ने चिकित्सक से दवा खिलाने के बाद मरीज के ठीक नहीं होने की शिकायत की.

तब चिकित्सक ने उसके द्वारा लायी गयी दवा की जांच की. जांच में पाया कि चिकित्सक ने उसे मुसीनेक 600 एमजी की टैबलेट लिखी थी. लेकिन दवा दुकानदार द्वारा माइलोनियम गोल्ड मल्टी विटामिन की दवा दी थी. इस पर चिकित्सक ने उन्हें पुन: पुर्जा देकर उक्त दवा दुकान से दवा वापस कर पुन: जो दवा लिखी गयी है. उसे मंगाने की बातें कहीं.

डॉक्टर मिथिलेश कुमार ने प्रभात खबर से बातचीत में कहा कि आयुष्मान कार्ड का लाभ लेने वाले मरीज द्वारा अगर बाहर से दवा लायी जा रही है, तो अब उसकी जांच कर ही दवा शुरू करायी जायेगी. चूंकि अगर चिकित्सक द्वारा कोई और दवा लिखी गयी है, और दवा दुकानदार उसे दूसरी दवा देंगे, तो मरीज की जान भी जा सकती है. जिससे सदर अस्पताल की बदनामी होगी.

इस मामले को लेकर मैं अस्पताल प्रबंधन को अवगत करा कर आयुष्मान कार्ड के जितने भी मरीज अस्पताल में इलाजरत हैं. उसकी दवा आने पर बिना चिकित्सक को दिखाये शुरू नहीं कराने की अपील करूंगा. आयुष्मान कार्ड से पैसा कमाने के लिए निजी दवा दुकानदार ऐसा कर रहे हैं, जो गलत है.

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