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टिड्डियों से सावधान, फसलों को पहुंच सकता है नुकसान

By Prabhat Khabar Digital Desk
Updated Date
टिड्डियों का झुंड.
टिड्डियों का झुंड.
फोटो : सोशल मीडिया.

गुमला : लॉकडाउन के बीच में प्राकृतिक आपदा की मार झेल रहे किसानों के सामने फसलों को क्षति पहुंचाने वाले जीव टीडी (लोकस्ट) की भी समस्या आन पड़ी है. टीडी के नाम से जाना जाने वाला यह जीव हरे-भरे खेत में लहलहा रहे फसलों व हरी साग-सब्जियों को भारी नुकसान पहुंचाता है. टीडी क्या है और कैसे बचें, पढ़ें, जगरनाथ की रिपोर्ट.

जिला कृषि पदाधिकारी डॉ रमेश चंद्र सिन्हा ने बताया कि यह रेगिस्तानी टीड्डा है, जो एक्रीडिडे परिवार का एक छोटे सिंग वाला टिड्डा है. यह दुनिया में सबसे विनाशकारी प्रवासी कीटों में से एक है और अधिक गतिमान वाला है. अनुकुल परिस्थितियों में एक दल में लगभग 8 करोड़ तक टिड्डियां होती है, जो अपने रास्ते में आने वाले सभी प्रकार के फसलों एवं गैर फसलों को चट कर जाते हैं. यह किसानों के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है.

यह टिड्डियां देश के कई राज्यों में प्रवेश कर चुकी है. विशेष रूप से उत्तर प्रदेश के पश्चिमी सीमावर्ती राज्य, मध्य प्रदेश, राजस्थान, पंजाब व हरियाणा जैसे राज्य में प्रवेश कर चुकी है. सूचना है कि झारखंड के कई जिलों में भी इन टिड्डियों को देखा जा रहा है, जो किसानों के फसलों को नुकसान पहुंचा सकते हैं.

श्री सिन्हा ने किसानों से अपील किया है कि टिड्डी दल के प्रकोप से फसलों को बचाने के लिए एक साथ इकट्ठा होकर ढोल, नगाड़ा, टीन के डब्बे व तालियां बजा कर बचाया जा सकता है. शोर से टीडी भागते हैं. इसके अलावा गैर फसली क्षेत्रों में मेलाथियान एवं फसली क्षेत्रों में क्लोरपाइरीफस, लेमडासाइहैलोथिन, मेलाथियान, फेनाइट्रोथियान, डेल्टामेथ्रीन, फिप्रोनिल अथवा मेटाराइजियम एनीसोपली में से किसी भी एक कीटनाशक का उपयोग कर फसलों को टीड्डियों के प्रकोप से बचाया जा सकता है.

श्री सिन्हा ने कहा है कि यदि किसी क्षेत्रों में टीडी फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं, तो कृषि विभाग को सूचना दे सकते हैं. विभागीय स्तर पर भी फसलों को बचाने एवं टिड्डियों को भगाने का उपाय किया जायेगा.

Posted By : Samir ranjan.

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