UPSC के 301वें रैंक पर दो आकांक्षा सिंह का दावा, सोमवार को आयोग बताएगा सच्चाई
Published by : Paritosh Shahi Updated At : 07 Mar 2026 8:21 PM
सोमवार को सुलझ जायेगा UPSC रिजल्ट पर जारी विवाद
UPSC Result Controversy: यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2025 के परिणाम में 301वीं रैंक को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. आरा और गाजीपुर की दो अभ्यर्थी आकांक्षा सिंह एक ही रैंक और रोल नंबर का दावा कर रही हैं. क्यूआर कोड और एडमिट कार्ड की जांच में अंतर सामने आया है, जबकि यूपीएससी सोमवार को स्थिति स्पष्ट करेगा.
UPSC Result Controversy: यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा 2025 के परिणाम में 301वां रैंक को लेकर विवाद पैदा हो गया है. रोल नंबर 0856794 और नाम आकांक्षा सिंह पर दो महिला अभ्यर्थियों ने दावा कर दिया है. एक अभ्यर्थी बिहार के आरा और दूसरी उत्तर प्रदेश के गाजीपुर की है. परिणाम जारी होने के बाद बिहार में रणवीर सेना प्रमुख ब्रह्मेश्वर मुखिया की पोती आकांक्षा सिंह के घर जश्न का माहौल बन गया. उन्होंने मीडिया से बातचीत कर अपनी सफलता की कहानी भी साझा की.
इसी बीच गाजीपुर (उत्तर प्रदेश) की डॉ आकांक्षा सिंह ने दावा किया कि 301वीं रैंक उनकी है. उन्होंने प्रभात खबर से बातचीत में कहा कि उनका नाम डॉ आकांक्षा सिंह है. यूपीएससी 2025 में 301वीं रैंक हासिल की है. वह गाजीपुर की रहने वाली हैं और पेशे से गायनेकोलॉजिस्ट हैं. उन्होंने एम्स पटना से मास्टर्स किया है. उन्हें प्रभात खबर से कहा कि मुझे जानकारी मिली है कि कोई और भी इसी रैंक पर दावा कर रहा है. उन्होंने कहा कि एडमिट कार्ड के बारकोड से पूरी सच्चाई स्पष्ट हो जायेगी.
इस संबंध में यूपीएससी की ओर से आधिकारिक स्पष्टीकरण अब तक जारी नहीं हुआ है. यूपीएससी के अधिकारियों ने कहा है कि सोमवार को स्थिति स्पष्ट हो जायेगी. गलत जानकारी देने वालों पर कार्रवाई भी की जायेगी.
प्रभात खबर ने क्यूआर कोड को किया स्कैन तो दिखा अलग-अलग रोल नंबर
प्रभात खबर ने दोनों के एडमिट कार्ड में दिये गये क्यूआर कोड को स्कैन किया तो दोनों में अलग-अलग रोल नंबर दिख रहा है. आरा की आकांक्षा के क्यूआर कोड में रोल नंबर (0856569) दिखा, जबकि दूसरे गाजीपुर की डॉ आकांक्षा के क्यूआर कोड को स्कैन करने पर रोल नंबर 0856794 ही रहा, जो यूपीएससी के जारी रिजल्ट से मिल रहा है.
एडमिट कार्ड की जांच में सामने फर्क
दोनों अभ्यर्थियों के एडमिट कार्ड की जांच में भी अंतर सामने आया है. गाजीपुर की आकांक्षा के एडमिट कार्ड पर रोल नंबर और बारकोड दोनों मेल खा रहे हैं, जबकि बिहार वाली आकांक्षा के एडमिट कार्ड में रोल नंबर तो समान है, लेकिन बारकोड स्कैन करने पर अलग नंबर दिखाई दे रहा है.
डिटेल एप्लीकेशन फॉर्म में यही रोल नंबर, जो 301 रैंक पर है
आरा की आकांक्षा के पिता इंदुभूषण सिंह ने प्रभात खबर से बातचीत में कहा कि मेरी बेटी का ही रिजल्ट सही है. मेरे पास सभी जरूरी कागजात में वही रोल नंबर हैं जो यूपीएससी की ओर से जारी रिजल्ट में 301 रैंक के स्थान पर दिखा रहा है. उन्होंने कहा कि मेरी बेटी ने आठ पेज की डिटेल एप्लीकेशन फॉर्म (डीएएफ) भरी है. उसमें यही रोल नंबर है.
वीडियो के माध्यम से स्थिति स्पष्ट
डॉ आकांक्षा ने अपना साक्षात्कार एडमिट कार्ड साझा किया, जिसमें वही रोल नंबर 0856794 दर्ज था. उन्होंने लिखा कि कुछ लोग उनके नाम और पद का गलत फायदा उठा रहे हैं, इसलिए उन्होंने अपनी असली पहचान और दस्तावेज सार्वजनिक किए. इसके बाद डॉ आकांक्षा सिंह ने एक वीडियो जारी किया जिसमें उन्होंने पूरी स्थिति स्पष्ट की. वीडियो में उन्होंने बताया कि 301वीं रैंक वाली असली अभ्यर्थी वही हैं और बिहार की तरफ से किया गया दावा गलत था.
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विवाद का कारण
दो अलग-अलग उम्मीदवार (आकांक्षा सिंह गाजीपुर और आकांक्षा सिंह आरा) एक ही रैंक (301) और एक ही रोल नंबर (0856794) का दावा कर रही हैं.
क्या है डीएएफ
यूपीएससी में डीएएफ (डिटेल एप्लीकेशन फॉर्म) वह महत्वपूर्ण फॉर्म होता है जिसे प्रारंभिक परीक्षा पास करने के बाद उम्मीदवारों को मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार के लिए भरना होता है. इस फॉर्म में उम्मीदवार की व्यक्तिगत जानकारी, शैक्षिक योग्यता, हॉबी, उपलब्धियां और सेवा व कैडर की प्राथमिकता जैसी विस्तृत जानकारी देनी होती है. इंटरव्यू के दौरान बोर्ड के सदस्य अक्सर इसी फॉर्म में दी गयी जानकारी के आधार पर सवाल पूछते हैं.
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By Paritosh Shahi
परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.
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