लिवंस के आदर्शों को अपनायें

Published at :17 Oct 2016 12:53 AM (IST)
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लिवंस के आदर्शों को अपनायें

आकर्षक झांकी व नृत्य प्रस्तुत की गयी चैनपुर (गुमला) : चैनपुर प्रखंड के बारवे क्षेत्र में फादर कोनस्टंट लिवंस के आगमन का 127वां वार्षिकोत्सव रविवार को बेंदोरा गांव में धूमधाम से मनाया गया. मुख्य अधिष्ठाता गुमला धर्मप्रांत के बिशप पॉल लकड़ा थे, जिनकी अगुवाई में पवित्र मिस्सा बलिदान अर्पित किया गया. बिशप ने अपने संदेश […]

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आकर्षक झांकी व नृत्य प्रस्तुत की गयी
चैनपुर (गुमला) : चैनपुर प्रखंड के बारवे क्षेत्र में फादर कोनस्टंट लिवंस के आगमन का 127वां वार्षिकोत्सव रविवार को बेंदोरा गांव में धूमधाम से मनाया गया. मुख्य अधिष्ठाता गुमला धर्मप्रांत के बिशप पॉल लकड़ा थे, जिनकी अगुवाई में पवित्र मिस्सा बलिदान अर्पित किया गया. बिशप ने अपने संदेश में कहा कि कोनस्टंट लिवंस के बताये मार्ग पर चलने से ही ख्रीस्तीय धर्म समाज का उद्धार हो सकता है.
हमें उनके बताये मार्ग पर चलने की आवश्यकता है. फादर लिवंस विकट परिस्थितियों के बावजूद ख्रीस्तीयों के अधिकार के लिए लड़ाई लड़ी. आदिवासियों के अस्तित्व को बचाने के लिए लंबी लड़ाई लड़ी. लोगों को अपने अधिकार के प्रति जागरुक करते हुए एकता के सूत्र में बांधे रखा. शिक्षा के प्रति अलख जगाया. आज फादर लिवंस के कारण मिशनरी संस्थानों के कई विद्यालय चल रहे हैं.
सन 1889 में फादर लिवंस पहली बार इंडिया आये थे. इसी दौरान बारवे के कई इलाकों बेंदोरा, सिरसी, पुटरुंगी गांव पहुंचे. दबे-कुचले लोगों के अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ी. इसी क्रम में सिरसी में पहली बार 124 लोगों को बपतिस्मा ग्रहण करा कर ख्रीस्तीय धर्म में प्रवेश कराया और धीरे-धीरे यह कारवां बढ़ता गया. आज यह क्षेत्र विकास के पथ पर बढ़ रहा है.
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