प्रकृति के पुजारी है आदिवासी

Published at :15 Nov 2015 7:46 PM (IST)
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प्रकृति के पुजारी है आदिवासी

प्रकृति के पुजारी है आदिवासीराष्ट्रीय सरना धर्म महासम्मेलन सह प्रार्थना सभा का आयोजनएलडीजीए- 17 मंच पर बैठे अतिथि. एलडीजीए-18 मौके पर उपस्थित लोग. एलडीजीए-19 उपस्थित महिला प्रतिनिधि. एलडीजीए-20 संबोधित करते डॉ करमा उरांव. लोहरदगा. राजी पड़हा प्रार्थना सभा द्वारा अंतरराज्यीय सरना प्रार्थना महासम्मेलन का आयोजन बलदेव साहू महाविद्यालय मैदान में किया गया. इसका शुभारंभ झखरा […]

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प्रकृति के पुजारी है आदिवासीराष्ट्रीय सरना धर्म महासम्मेलन सह प्रार्थना सभा का आयोजनएलडीजीए- 17 मंच पर बैठे अतिथि. एलडीजीए-18 मौके पर उपस्थित लोग. एलडीजीए-19 उपस्थित महिला प्रतिनिधि. एलडीजीए-20 संबोधित करते डॉ करमा उरांव. लोहरदगा. राजी पड़हा प्रार्थना सभा द्वारा अंतरराज्यीय सरना प्रार्थना महासम्मेलन का आयोजन बलदेव साहू महाविद्यालय मैदान में किया गया. इसका शुभारंभ झखरा कुंबा में सरना पूजा के बाद शंख नदी के तट पर स्थित भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर जुलूस की शक्ल में लोग बीएस कॉलेज मैदान गये. जहां धर्मगुरु बंधन तिग्गा द्वारा पूजा संपन्न करायी गयी. श्री तिग्गा ने कुडूख भाषा, संस्कृति व समाजिक परंपरा की सुरक्षा पर अपने विचार व्यक्त करते हुए उनकी रक्षा करने की बात कही. मुकेश विरूआ ने आदिवासियों की घटती संख्या पर चिंता व्यक्त किया. उन्होंने कहा कि हम आदिवासी प्रकृति के पुजारी हैं. डॉ करमा उरांव ने कहा कि आज हम अपनी भाषा, संस्कृति, धार्मिक जमीन, अधिकार से वंचित हो रहे हैं. इसका मुख्य कारण सामाजिक कट्टरता का अभाव है. धर्म समाज की विकृति, कुरीतियों को दूर करना, अंधविश्वास को दूर करना, शराब के सेवन से बचना चाहिए. मौके पर प्रो प्रवीण उरांव, राष्ट्रीय सलाहकार विश्वनाथ तिर्की, राष्ट्रीय प्रचारक चिंतामनी उरांव, लोहरा उरांव, अनिल टोप्पो, सोमे उरांव, दशरथ उरांव, ऐतो उरांव, रंथू उरांव, छत्रपाल उरांव ने भी अपने विचार व्यक्त किये. लोगों ने कहा कि इसाई, मुसलमान या कहे दूसरे धर्म और समाज के लोगों द्वारा हमारी मां, बहन, जगह, जमीन, धर्म,कर्म को सुनियोजित ढंग से विखंडित किया जा रहा है. इसाई मिशनरियों द्वारा शिक्षा व सेवा के आड़ में आज भी धर्मपरिवर्तन का खेल जारी है. इनकी साम्राज्यवादी सोच सुनियोजित ढंग से देश की सत्ता में काबिज होना है. समाज में व्याप्त अंधविश्वास, डायन बिसाही जैसे मामले रुढ़िवादी परंपरा व शराब में डूबे संस्कार से बाहर निकालकर स्वच्छ, सुसंस्कार व सुंदर समाज निर्माण करना मुख्य उद्देश्य है. मौके पर झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सुखदेव भगत, झाविमो के नेता बंधु तिर्की, आजसू नेत्री नीरू शांति भगत, झामुमो नेता सुखदेव उरांव, पवन तिग्गा, शीला उरांव, सुशीला उरांव, सीपी भगत, राधा तिर्की, राम किशुन उरांव, प्रकाश उरांव, पुनी भगत, कहरु उरांव, खदिया उरांव, मंगलदेव उरांव, महेश्वर उरांव, पंकज उरांव, दशमुनी उरांव, राजमनी उरांव, फुलदेव उरांव सहित हजारों की संख्या में लोग मौजूद थे. मौके पर भजन मंडली द्वारा भजन प्रस्तुत किया गया. इस दौरान देर रात तक सांस्कृतिक कार्यक्रम चलता रहा.

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