:4:::: नि:शक्त बहनों का कोई नहीं है खेवनहार
बघिमा गांव के बंधन सिंह की सड़क हादसे में मौत के बाद नि:शक्त बेटियां दर दर ठोकरें खा रही हैं.सीएम को दुखड़ा सुनाने बघिमा स्कूल पहुंची पर किसी ने मिलने नहीं दिया.30 गुम 1 में मां शंखावती देवी के साथ चामीन कुमारी.प्रतिनिधि, गुमलापालकोट प्रखंड के बघिमा गांव की दो नि:शक्त बहन चामीन कुमारी (19 वर्ष) […]
बघिमा गांव के बंधन सिंह की सड़क हादसे में मौत के बाद नि:शक्त बेटियां दर दर ठोकरें खा रही हैं.सीएम को दुखड़ा सुनाने बघिमा स्कूल पहुंची पर किसी ने मिलने नहीं दिया.30 गुम 1 में मां शंखावती देवी के साथ चामीन कुमारी.प्रतिनिधि, गुमलापालकोट प्रखंड के बघिमा गांव की दो नि:शक्त बहन चामीन कुमारी (19 वर्ष) व शशिबाला कुमारी (16) दर दर की ठोकरें खाने को विवश हैं. 10 मार्च 2015 को सड़क हादसे में उसके पिता बंधन सिंह की मौत हो गयी. पिता की मौत के बाद पूरे परिवार में दुखों का पहाड़ टूट पड़ा. क्योंकि किसी प्रकार मजदूरी कर वह अपनी दो नि:शक्त बेटियों की परवरिश कर रहा था. मां शंखावती देवी वृद्ध हैं. वह कुछ नहीं कर पाती. किसी प्रकार घर का चूल्हा जल रहा है. सुबह खाते हैं तो शाम के लिए सोचना पड़ता है. गुरुवार को चामीन अपनी मां के साथ मुख्यमंत्री रघुवर दास से मिलने बघिमा स्कूल पहुंची थी. लेकिन जैसे ही भाषण खत्म हुआ. सीएम वहां से निकल गये. चामीन सीएम से मिलने का प्रयास की, लेकिन कोई उसे मिलने नहीं दिया. अंत में लाचार दोनों मां-बेटी वापस घर लौट गयी. शंखावती ने बताया कि वह अब वृद्ध हो चुकी है. शरीर काम नहीं करता. उसे सरकारी सुविधा के नाम पर कुछ नहीं मिला है. वृद्धावस्था पेंशन भी नहीं मिलता है. इन लोगों ने प्रशासन से सहयोग की गुहार लगायी है.
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