फ्लैशबैक : सादगीपूर्ण राजनीति के मिसाल थे ललित उरांव
Updated at : 26 Oct 2019 7:36 AM (IST)
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दुर्जय पासवान गुमला : बाबा के नाम से लोकप्रिय स्वर्गीय ललित उरांव सिसई विधानसभा सीट से तीन बार विधायक रह चुके हैं. तत्कालीन बिहार में 1969, 1977 तथा 1980 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने जीत हासिल की थी. पहले 1969 में उन्हें बिहार सरकार का अादिवासी कल्याण मंत्री तथा फिर 1977 में वन मंत्री बनाया […]
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दुर्जय पासवान
गुमला : बाबा के नाम से लोकप्रिय स्वर्गीय ललित उरांव सिसई विधानसभा सीट से तीन बार विधायक रह चुके हैं. तत्कालीन बिहार में 1969, 1977 तथा 1980 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने जीत हासिल की थी. पहले 1969 में उन्हें बिहार सरकार का अादिवासी कल्याण मंत्री तथा फिर 1977 में वन मंत्री बनाया गया था. बाद में वह दो बार (1991 व 1996) लोहरदगा सीट से सांसद भी रहे.
ललित उरांव सन 1962 में कांग्रेस के कार्तिक उरांव के साथ राजनीति में आये थे. इसी वर्ष कांग्रेस पार्टी से विधानसभा चुनाव लड़े, पर जीत नहीं मिली. इसके बाद 1965 में जनसंघ पार्टी में शामिल हो गये. 1969 में जनसंघ पार्टी से पहली बार विधायक बने और बिहार में आदिवासी कल्याण मंत्री बने. आज भी लोग उन्हें बड़े सम्मान के साथ याद करते हैं. जेपी आंदोलन से जुड़े रहे स्व उरांव को तब जेल भी जाना पड़ा था. शिक्षण से लेकर राजनीति तक के सफर में स्वर्गीय ललित उरांव ने कई महत्वपूर्ण काम किये, जिसे आज भी गुमला जिले की जनता याद करती है. उनका निधन 27 अक्तूबर 2003 को हुआ था. क्षेत्र की जनता आज भी उनकी ईमानदारी व काम करने के तरीके को याद करती है.
विधायक व सांसद रहते हुए भी वह खेती-बारी से जुड़े रहे. गुमला जिला के सिसई प्रखंड स्थित पोटरो गांव निवासी ललित उरांव के राजनीति जीवन में लगनशीलता, शालीनता, ईमानदारी व सादगी थी. स्व उरांव का परिवार आज भी खेती-बारी कर जीवन यापन कर रहा है.
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