गुमला में 85 पूजा पंडालों की साज-सज्‍जा में खर्च होंगे करीब 64 लाख

Updated at : 25 Sep 2019 8:39 PM (IST)
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गुमला में 85 पूजा पंडालों की साज-सज्‍जा में खर्च होंगे करीब 64 लाख

।। दुर्जय पासवान ।। गुमला : आदिवासी बहुल गुमला जिले में दुर्गा पूजा की तैयारी शुरू हो चुकी है. पूजा पंडाल बनाने का काम भी तेजी से चल रहा है. सभी पूजा समिति एक से बढ़कर एक पंडाल बनाने की होड़ में लग गये हैं.गुमला में कुल 85 स्थानों पर पंडाल बनाकर दुर्गा पूजा की […]

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।। दुर्जय पासवान ।।

गुमला : आदिवासी बहुल गुमला जिले में दुर्गा पूजा की तैयारी शुरू हो चुकी है. पूजा पंडाल बनाने का काम भी तेजी से चल रहा है. सभी पूजा समिति एक से बढ़कर एक पंडाल बनाने की होड़ में लग गये हैं.गुमला में कुल 85 स्थानों पर पंडाल बनाकर दुर्गा पूजा की जाती है. इस वर्ष समिति के लोग बृहत रूप से पूजा की तैयारी में जुटे हैं. इसके लिए पैसा भी खूब खर्च हो रहा है.

गुमला में एक समय था. जब एक पूजा समिति महज 10 रुपये से 100 रुपये में दुर्गा पूजा का आयोजन कर लेती थी, लेकिन अब पूजा समिति का बजट लाखों रुपये की हो गयी है.ग्रामीण क्षेत्र में एक पूजा समिति का 50 हजार रुपये तक का बजट होता है. एक आंकड़ा के अनुसार गुमला जिले में लगभग 64 लाख रुपये सिर्फ दुर्गा पूजा में खर्च किये जाते हैं. अकेले शहरी क्षेत्र में 36 लाख रुपये खर्च किये जाते हैं.

* श्रीबड़ा दुर्गा मंदिर गुमला के सचिव राजेंद्र प्रसाद गुप्ता ने कहा

श्रीबड़ा दुर्गा मंदिर गुमला के सचिव राजेंद्र प्रसाद गुप्ता ने कहा कि गुमला जिले के 12 प्रखंडों में 85 स्थानों पर पंडाल बनाकर पूजा होती है. इसमें सिर्फ गुमला में 18 स्थानों पर भव्य पंडाल बनता है.गुमला में जिन 18 पूजा समितियों द्वारा पूजा के बाद जुलूस निकाली जाती है. उसमें सात पूजा समिति के पास सिर्फ लाइसेंस है. बाकी 11 पूजा समितियों के पास लाइसेंस नहीं है.जिन पूजा समितियों के पास शहरी क्षेत्र में लाइसेंस नहीं हैं. वे पूजा समिति श्रीबड़ा दुर्गा मंदिर के लाइसेंस से जुलूस निकालते हैं. उन्होंने कहा कि गुमला शहरी क्षेत्र में एक पूजा समिति तीन से पांच लाख रुपये खर्च करती है.

* इधर शहर की ये बड़ी समस्याएं चिढ़ा रही हैं मुंह

सफाई : शहर में कई मुहल्लों में कूड़ा कचरा का ढेर लगा हुआ है. कई ऐसे इलाके हैं, जहां महीनों भर गंदगी रहती है. दुर्गा पुजा में घूमने वालों के लिए ये बड़ी समस्‍या बन सकती है, लेकिन अब तक इसकी ओर किसी का ध्‍यान नहीं गया है.

वेपर लाइट : शहरी क्षेत्र में कई स्थानों पर वेपर लाइट लगाया गया है, लेकिन अधिकांश बेकार पड़े हैं. अष्टमी, नवमी व दशमी को शहर में घूमने वालों की संख्‍या अच्‍छी-खासी होती है, वैसे में लोगों को बड़ी परेशानी हो सकती है.

सुरक्षा : इन दिनों शहर में चोरों व लूटेरों का आतंक है. हर महीने व दो महीने किसी न किसी के घर व दुकान में चोरी हो रही है. चोरी की घटनाओं को रोकने के लिए पुलिस की गश्ती जरूरी है.

सड़क जाम : शहर के कई दुकानदार मुख्य सड़कों के किनारे तक अपनी दुकान बढ़ा दिये हैं. इससे जाम की स्थिति उत्पन्न होती है. पर्व में जाम से निपटने की पहल होनी चाहिए.गड्ढा : शहर में कई स्थानों पर गड्ढा है. नेशनल हाइवे में भी कई स्‍थानों पर बड़े-बड़े गड्ढे हो गये हैं, जिसे अब तक ठीक नहीं कराया जा सका है. गड्ढों को अगर नहीं भरा गया, तो दुर्गा पूजा के दौरान रात में कोई बड़ा हादसा हो सकता है.वाहन

पड़ाव : पर्व में वाहन खड़ा करने को लेकर परेशानी होती है. कई बार तो लोग पंडाल के समीप तक वाहन ले जाते हैं. जिससे भीड़ में लोगों को परेशानी होती है.छिनतई : पर्व के अवसर पर छिनतई की घटनाएं अधिक होती हैं. खासकर महिलाएं जो आभूषण पहनकर निकलती हैं. वे सड़क लूटेरों का ज्यादा शिकार होती हैं.

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