गुमला : बेटी हुई, तो गरीब मां ने अपनाने से किया इंकार
Updated at : 21 Jul 2019 7:51 AM (IST)
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दुर्जय पासवान/स्वप्निल गुमला : बेटियों को अभिशाप और बेटों को वरदान माननेवाली मानसिकता से समाज अब भी नहीं उबर पा रहा है. ऐसा ही मामला शनिवार को गुमला सदर अस्पताल में देखने को मिला. खोरा पतराटोली गांव निवासी मजदूर बुधवा उरांव की पत्नी सूरजमुनी देवी ने रात करीब 8.25 बजे बेटी को जन्म दिया. नर्स […]
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दुर्जय पासवान/स्वप्निल
गुमला : बेटियों को अभिशाप और बेटों को वरदान माननेवाली मानसिकता से समाज अब भी नहीं उबर पा रहा है. ऐसा ही मामला शनिवार को गुमला सदर अस्पताल में देखने को मिला. खोरा पतराटोली गांव निवासी मजदूर बुधवा उरांव की पत्नी सूरजमुनी देवी ने रात करीब 8.25 बजे बेटी को जन्म दिया. नर्स ने जैसे ही यह खबर सूरजमनी व उसके साथ आये एक रिश्तेदार को दी. दोनों मायूस हो गये. साथ आया रिश्तेदार सूरजमनी को छोड़ कर चला गया. वहीं सूरजमनी बच्ची को घर ले जाने से इंकार करने लगी. उसकी इच्छा थी कि पहला संतान पुत्र हो, लेकिन उल्टा हुआ. हमलोग गरीब हैं. पति मजदूरी करने हिमाचल प्रदेश गये हैं.
बेटी की कैसे परवरिश करेंगे. उसकी शादी कैसे कर पायेंगे. यह कह कर वह रोने लगी. वह बेटी को घर नहीं ले जायेगी. यह बात सुन अस्पताल पहुंचे कई लोग नवजात को खरीदने को तैयार हो गये. दूसरी ओर बाल कल्याण समिति की टीम भी अस्पताल पहुंच गयी. चेयरमैन ने सूरजमनी को समझाया और लिखित लिया कि वह अपनी बेटी को अपने साथ रखेगी. किसी को नहीं देगी.
डीएस ने सीडब्ल्यूसी को लिखा पत्र
सूरजमुनी द्वारा बेटी को अपनाने से इंकार करने की सूचना अस्पताल के डीएस डॉ आरएन यादव के पास पहुंचा. डीएस ने जांच पड़ताल कराने के बाद तुरंत सीडब्ल्यूसी (बाल कल्याण समिति गुमला) के चेयरमैन शंभु सिंह को पत्र लिखा.
सूरजमुनी को समझाया गया है. वह अभी बेटी को रखने के लिए तैयार है. लेकिन अभी भी डर है कि कहीं ले जाने के बाद वह अपनी बेटी को बेच न दे. इसलिए एक साल तक सीडब्ल्यूसी नवजात बच्ची व परिवार पर नजर रखेगी.
शंभु सिंह, चेयरमैन, सीडब्ल्यूसी, गुमला
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