पढ़ने की उम्र में दादी की कर रही सेवा
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 17 Jul 2019 2:14 AM
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बसिया(गुमला) : बसिया प्रखंड की कुम्हारी पंचायत में घुनसेरा गांव है. यह गांव दूरस्थ क्षेत्र में है. इस गांव में 12 वर्ष की शिवानी कुमारी रहती है, जो वर्ग पांच में पढ़ती है. शिवानी ने जब होश संभाला, तो उसे पता भी नहीं था कि उसे पारिवारिक दायित्व का सारा बोझ उठाना पड़ेगा. शिवानी समस्याओं […]
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बसिया(गुमला) : बसिया प्रखंड की कुम्हारी पंचायत में घुनसेरा गांव है. यह गांव दूरस्थ क्षेत्र में है. इस गांव में 12 वर्ष की शिवानी कुमारी रहती है, जो वर्ग पांच में पढ़ती है. शिवानी ने जब होश संभाला, तो उसे पता भी नहीं था कि उसे पारिवारिक दायित्व का सारा बोझ उठाना पड़ेगा. शिवानी समस्याओं से जूझ रही है, फिर भी अपनी बीमार दादी की अच्छी तरह देखभाल कर रही है.
जब इसकी जानकारी प्रभात खबर प्रतिनिधि को हुई, तो प्रतिनिधि शिवानी के घर पहुंचा. उस समय दिन के दो बज रहे थे. शिवानी अपनी दादी को पानी पिला रही थी. वह प्रतिनिधि को देख कर अचरज में पड़ गयी. पूछे जाने पर उसने बताया कि उसकी दादी को एक वर्ष से बीमार है. उसे लकवा मार दिया है, तब से वह बेड पर पड़ी हुई है. घर में मेरे अलावा कोई और सदस्य नहीं होने से घर की सारी जिम्मेदारी मेरे कंधे में आ पड़ी.
दादी की देखरेख के अलावा राशन की व्यवस्था से लेकर खाना बनाने और खिलाने की सारी जिम्मेवारी शिवानी के ऊपर है. शिवानी ने बताया कि दादा चामू महतो का निधन 30 वर्ष पहले हो चुका था. दादा के निधन के बाद दादी सरस्वती देवी के ऊपर घर की जिम्मेदारी आ पड़ी. आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण मेरी दादी काम करने पंजाब चली गयी थी. वहीं रह कर मजदूरी कर मेरे पिता विनोद महतो का लालन-पालन किया. वहीं मेरे पिता ने शादी कर ली, फिर मेरी बड़ी बहन मुस्कान का जन्म हुआ, जिसकी उम्र अभी 14 वर्ष है, जो अभी मौसी के पास रहती है. जब मैं दो वर्ष की थी, तो मेरी मां का निधन हो गया.
मां के निधन के बाद मेरे पिता ने हम दोनों बहन की देखरेख के लिए मेरी मौसी से शादी कर ली. लेकिन बाद में मेरे पिता का भी निधन हो गया है. पिता के निधन के बाद मेरी दादी मुझे लेकर बसिया आ गयी, जहां रह कर मेरी देखरेख करने लगी और गांव के विद्यालय में मेरा नामांकन कर दिया. अभी मैं पांचवीं कक्षा में पढ़ रही हूं. एक वर्ष पहले मेरी दादी को लकवा मार दिया. जिस कारण वह पूरी तरह अपाहिज हो गयी है. एक वर्ष से दादी की सेवा की जिम्मेदारी मेरे ऊपर है. सरकार की ओर से हर माह 10 किलो चावल राशन मिलता है, जिसे लेने के लिए सात किमी दूर कुम्हारी जाना पड़ता है.
दादी के वृद्धावस्था पेंशन से किसी तरह घर का गुजारा चलता है. सरस्वती देवी की उम्र 75 वर्ष है. इस संबंध में बीडीओ बसिया विजयनाथ मिश्रा से पूछे जाने पर बताया कि शिवानी के परिवार की स्थिति के बारे में मुझे जानकारी नहीं है. गांव जाकर इसकी जानकारी लूंगा. क्विक एक्सन कमेटी के माध्यम से सरस्वती देवी के इलाज के लिए कुम्हारी मुखिया से बात करूंगा. साथ ही जो भी संभव होगा, सरकारी सहायता की जायेगी.
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