गुमला : प्राचीन धरोहर टांगीनाथ धाम की कलाकृतियां व नक्कासी बयां करती हैं देवकाल की कहानी

Updated at : 24 Dec 2018 5:42 PM (IST)
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गुमला : प्राचीन धरोहर टांगीनाथ धाम की कलाकृतियां व नक्कासी बयां करती हैं देवकाल की कहानी

दुर्जय पासवान, गुमला टांगीनाथ धाम में कई पुरातात्विक व ऐतिहासिक धरोहर हैं, जो आज भी विद्यमान हैं. यहां की कलाकृतियां व नक्कासी, देवकाल की कहानी बयां करती हैं. साथ हैं कई ऐसे स्रोत, जो 7वीं व 9वीं शताब्दी में ले जाता है. यह धार्मिक के अलावा पर्यटक स्थल के रूप में भी विश्व विख्यात है. […]

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दुर्जय पासवान, गुमला

टांगीनाथ धाम में कई पुरातात्विक व ऐतिहासिक धरोहर हैं, जो आज भी विद्यमान हैं. यहां की कलाकृतियां व नक्कासी, देवकाल की कहानी बयां करती हैं. साथ हैं कई ऐसे स्रोत, जो 7वीं व 9वीं शताब्दी में ले जाता है. यह धार्मिक के अलावा पर्यटक स्थल के रूप में भी विश्व विख्यात है. मान्‍यता है कि गुमला से 70 किमी दूर डुमरी प्रखंड के टांगीनाथ धाम में साक्षात भगवान शिव निवास करते हैं.

सैलानियों को यहां धर्म कर्म के अलावा सुंदर व मनमोहक प्राकृतिक दृश्य देखने को मिलेगा. 1989 में पुरातत्व विभाग ने टांगीनाथ धाम के रहस्य से पर्दा हटाने के लिए अध्ययन किया था. यहां जमीन की भी खुदाई की गयी थी.

उस समय भारी मात्रा में सोना व चांदी के आभूषण सहित कई बहुमूल्य समान मिले थे. लेकिन कतिपय कारणों से खुदाई पर रोक लगा दिया गया. इसके बाद टांगीनाथ धाम के पुरातात्विक धरोहर को खंगालने के लिए किसी ने पहल नहीं की.

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टांगीनाथ में क्या देंखे

टांगीनाथ धाम में यत्र-तत्र सैंकड़ों की संख्या में शिवलिंग है. कहा जाता है कि यह मंदिर शाश्वत है. स्वयं विश्वकर्मा भगवान ने टांगीनाथ धाम की रचना की थी. यहां की बनावट, शिवलिंग व अन्य स्रोतों को देखने से स्पष्ट होता है कि इसे आम आदमी नहीं बना सकता है.

1989 में खुदाई में जमीन से आभूषण प्राप्त हुआ था, जो डुमरी थाने में है. त्रिशूल आज भी साक्षात है. त्रिशूल जमीन के नीचे कितना गड़ा है. यह कोई नहीं जानता है. लेकिन कहा जाता है कि पांच फीट तक नीचे है. जमीन के ऊपर स्थित त्रिशूल के अग्र भाग में कभी जंग नहीं लगता है. यहां कई प्राचीन धरोहर हैं. आसपास का माहौल खुशनुमा है.

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कैसे जायें और कहां ठहरें

डुमरी से 10 व गुमला से 75 किमी दूर है. यहां तक जाने के लिए सुगम सड़क है. नदी में पुल बन गया है. ठहरने की कोई व्यवस्था नहीं है. इसके लिए सैलानियों को गुमला में ठहरना होगा. यहां जाने के लिए गुमला से सुबह छह बजे निकलें तो आठ बजे तक पहुंच जायेंगे. पानी की समुचित व्यवस्था है. झरना से पानी गिरता है, जो स्वच्छ है. मान्‍यता है कि यहां नहाने से कई रोगों से मुक्ति भी मिलती है. यहां शाम चार बजे तक ठहरा जा सकता है. उसके बाद समय का ख्याल रखते हुए वापस लौट जाएं.

सावधानी बरतें

आसपास घना जंगल व पहाड़ है. इसलिए इधर-उधर जाने से बचे. अगर कहीं जा रहे हैं तो तीन चार लोग समूह में घूमने जाये. अगर कोई सूचना देनी हो तो नजदीक में डुमरी थाना है. डुमरी थाना का नंबर 9431706209 है.

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