शहीद के जारी प्रखंड को भूल गये नेताजी

Updated at : 14 Nov 2018 3:11 AM (IST)
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शहीद के जारी प्रखंड को भूल गये नेताजी

गुमला : जिस जनता ने वोट दिया. नेताजी को विधायक व मंत्री बनाया. वही, नेताजी अब जनता को ही भूल गये. हम बात कर रहे हैं, शहीद अलबर्ट एक्का जारी प्रखंड का. शहीद को पूरा देश नमन करता है. परंतु हमारे नेताजी शहीद के प्रखंड से मुंह मोड़े हुए हैं. प्रखंड का हाल-ए-सूरत जो है. […]

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गुमला : जिस जनता ने वोट दिया. नेताजी को विधायक व मंत्री बनाया. वही, नेताजी अब जनता को ही भूल गये. हम बात कर रहे हैं, शहीद अलबर्ट एक्का जारी प्रखंड का. शहीद को पूरा देश नमन करता है. परंतु हमारे नेताजी शहीद के प्रखंड से मुंह मोड़े हुए हैं. प्रखंड का हाल-ए-सूरत जो है. नेताजी को जनता कोस रही है. कोसने की कोई एक वजह नहीं है. बल्कि कई वजह है. प्रखंड आज भी विकास के लिए कदमताल कर रहा है. 19 मार्च 2010 को शहीद के पैतृक गांव जारी को प्रखंड का दर्जा मिला.
लोगों को उम्मीद व विश्वास था. बदलाव होगा. परंतु नेताजी की बेरूखी से प्रखंड में बदलाव नहीं होता दिख रहा है. प्लस टू स्कूल में शिक्षक नहीं है. जैसे-तैसे पढ़ाई हो रही है. कॉलेज नहीं है. कब बनेगा. यह सपना है. जारी में स्टेडियम नहीं है. खेल को बढ़ावा पर सवालिया निशान लगा हुआ है. अस्पताल भवन अधूरा है. ठेकेदार भाग गया है. अस्पताल बनेगा या नहीं. किसी के पास जवाब नहीं है. नेताजी को बीमार लोगों से मतलब नहीं है. बस उन्हें अपने स्वास्थ्य की चिंता है. ताकि बीमार व्यक्ति उन्हें दोबारा वोट दें. सिंचाई की सुविधा नहीं है. बरसात के बाद पलायन किसानों की मजबूरी बनी हुई है.
सड़क का हाल खस्ता है. प्रखंड की कोई भी सड़क चलने लायक नहीं है. सरकारी भवनों का जहां-तहां निर्माण हो रहा है. परंतु अधिकांश भवन अधूरे हैं. आइटीआइ कॉलेज इस क्षेत्र के युवक-युवतियों के लिए दिवास्वप्न है. हम बता दें. गुमला जिला का जारी प्रखंड छत्तीसगढ़ राज्य से सटा हुआ है. 19 मार्च 2010 को प्रखंड बने जारी में पांच पंचायत है. इसमें 60 गांव आता है. आबादी 30 हजार 926 है. यह पहला प्रखंड है जहां सोलर से बिजली जलती है. लेकिन कुछ ही इलाकों तक बिजली है.
ग्रामीण विद्युतिकरण के तहत कई गांवों में बिजली नहीं पहुंची है. चार साल पहले एक करोड़ से बनी सड़क टूट गया. टेन प्लस टू स्कूल शुरू हुई. लेकिन महत्वपूर्ण विषयों के शिक्षक नहीं हैं. जारी में नया ब्लॉक भवन, अस्पताल, आइटीआइ भवन बनना है. सात साल पहले इन भवनों का निर्माण शुरू हुआ था. लेकिन तीन साल से काम बंद है.
ठेकेदारों ने काम क्यों बंद किया. इस संबंध में कोई बताने को तैयार नहीं है. जारी के कुछ भवनों पर पुलिस का कब्जा है. अधूरे क्वार्टर में भी पुलिस जवान रहते हैं. बताया जा रहा है कि नया थाना भवन बना है. लेकिन वहां पुलिस जवानों के रहने के लिए उचित कमरे व व्यवस्था नहीं है. जिस कारण जवानों को अधूरे ब्लॉक व क्वार्टर में रहना पड़ रहा है. भ्रष्टाचार किस प्रकार प्रखंड को दीमक की तरह चाट रहा है. इसका उदाहरण परमवीर अलबर्ट एक्का जारी प्रखंड में एक करोड़ रुपये की लागत से बनी अलकतरा सड़क है.
यह सड़क भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गयी. तीन साल पहले सड़क बनी थी. लेकिन एक ओर से सड़क बनते गयी दूसरी और से उखड़ते गयी. आज सड़क के नाम पर सिर्फ गड्ढे हैं. चैनपुर से जारी जाने में हिचकोले खाते हुए जाना पड़ता है. इसी रूट पर पांच किमी सड़क को ठेकेदारों ने नहीं बनाया. जैसी सूची मिली है. विभाग से मिलीभगत कर ठेकेदार अधूरे सड़क का भी पैसा डकार गये. वहीं जो सड़क बनाया. वह दो साल में ही खत्म हो गया. मेराल से जारी तक की भी सड़क की वही स्थिति है. यहां भी तीन साल पहले नयी सड़क बनी. लेकिन सड़क बनने के साथ ही पहले से भी बदतर हो गयी. लोगों को आने-जाने में परेशानी हो रही है. लेकिन नेताजी को इनसे मतलब नहीं है. आखिर नेताजी विकास योजनाओं को लेकर क्यों चुप हैं. किसी को पता नहीं चल रहा है.
आखिर खेल कहां हो रहा है. नेताजी के खेल जनता के लिए सवाल बने हैं. शहीद की पत्नी बलमदीना एक्का जो अब वृद्ध हो गयी है. खुद शहीद की बेवा ने नेताओं से सड़क व अस्पताल बनवाने की मांग कर चुकी है. लेकिन वोट की राजनीति करनेवाले नेताओं को शहीद की बेवा की गुहार भी सुनायी नहीं पड़ रही है. जारी प्रखंड में ही धोबारी, उरईकोना सहित दर्जन भर गांव में विलुप्त प्राय: आदिम जनजाति रहते हैं. इन गांवों की जो हालात है. अगर नेता जी को एक सप्ताह के लिए ठहरने कहेंगे तो वे बीमार हो जायेंगे. जबकि इसी क्षेत्र में रहने वाले लोगों के वोट से नेताजी आज ऊंचे पद पर बैठे हैं.
सरकार की सुविधाओं का लाभ नेताजी खूब उठा रहे हैं. परंतु जनता को सुविधा देने में नेताजी फेल होते दिख रहे हैं. सबसे तकलीफ की बात यह है. अस्पताल नहीं है. बीमार हुए, तो छत्तीसगढ़ राज्य जाना पड़ता है. बगल में चैनपुर प्रखंड है. वहां इलाज की समुचित व्यवस्था नहीं है. इसलिए लाचारी है. छत्तीसगढ़ जाये या फिर 70 किमी की दूरी तय कर गुमला मुख्यालय इलाज कराने आये. जनता बोल रही है. नेताजी चार साल हो गये. अब आप कब काम कीजियेगा.
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