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बभनिया गांव में पानी के लिए हाहाकार, दूसरे गांव से पानी लाने को मजबूर

Updated at : 09 Nov 2025 11:16 PM (IST)
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बभनिया गांव में पानी के लिए हाहाकार, दूसरे गांव से पानी लाने को मजबूर

जलमीनार बनी ग्रामीणों के लिए बड़ी चुनौती, स्वच्छ पेयजल की सुविधा अब भी दूर

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सरकार के लाख दावे और भारी खर्च के बावजूद ग्रामीण क्षेत्र के लोग आज भी स्वच्छ पेयजल से वंचित हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में लाखों रुपये की लागत से बनाये गये जलमीनार अब बेकार साबित हो रहे हैं. ठेकेदारी और कागजी कार्यवाही के चलते अधिकांश जलमीनार संचालनहीन हैं. अमरपुर पंचायत के बभनिया गांव का उदाहरण इसकी पुष्टि करता है. ग्रामीणों के अनुसार, गांव में बने जलमीनार लंबे समय से बंद हैं और महिलाओं व बच्चों को एक किलोमीटर पैदल चलकर दूसरे गांव से पानी लाना पड़ता है. ग्रामीणों ने बताया कि पूरे एक साल बीतने को हैं, लेकिन विभाग और प्रखंड प्रशासन अभी तक मरम्मत की दिशा में कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं. गांव के ग्रामीण फ़ुद्दी मड़ैया, गुरुप्रसाद महतो, मनोज महतो, सुभाष महतो और दुखन महतो ने कहा कि सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाएं सिर्फ कागजों तक सीमित रह गयी हैं और लोग भारी परेशानियों का सामना कर रहे हैं. उमस भरी गर्मी और अब सर्दी में भी ग्रामीणों को वही कष्ट झेलना पड़ रहा है. ग्रामीण प्रशासन से तत्काल जलमीनार की मरम्मत और स्वच्छ पेयजल की सुविधा उपलब्ध कराने की मांग कर रहे हैं, ताकि उनकी परेशानियों का स्थायी समाधान हो सके.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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SANJEET KUMAR

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