पहाड़ी क्षेत्रों में पेयजल की व्यवस्था से राहत

Updated at : 03 Apr 2025 11:50 PM (IST)
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पहाड़ी क्षेत्रों में पेयजल की व्यवस्था से राहत

बोआरीजोर व सुंदरपहाड़ी के 123 गांव में एसवीएस के तहत पहुंचाया जा रहा पानी

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गोड्डा जिले के ऐसे सूदूर, निर्जन और पगडंडी रास्तों से घिरे जंगलों और पहाड़ों से घिरे विरल आबादी वाले गांवों के लोगों को प्यास बुझाने की महत्वाकांक्षी योजना – सिंगल विलेज स्कीम के तहत पहाड़िया और संताल आदिवासियों को लाभ दिया जा रहा है. इस योजना में जिले के दो प्रखंड, मुख्य रूप से सुंदरपहाड़ी और बोआरीजोर, को शामिल किया गया है. इस योजना के तहत ऐसे गांवों को प्राथमिकता दी जा रही है, जो पहाड़ों के करीब स्थित हैं और जहां पानी की आपूर्ति पहुंचाना कठिन है. जिन गांवों की आबादी कम से कम दस घर और अधिकतम बीस घर है, उन्हें इस योजना का लाभ मिल रहा है. योजना के अंतर्गत जिले के दोनों प्रखंडों के कुल 123 गांवों को शामिल किया गया है.

सुंदरपहाड़ी के 85 और बोआरीजोर के 38 गांवों को किया गया शामिल

यह योजना केंद्र और राज्य सरकार द्वारा आवंटित राशि के समान 50-50 प्रतिशत हिस्से से संचालित होती है. यह योजना जल जीवन मिशन से भी जुड़ी हुई है. योजना के तहत गोड्डा जिले के दो प्रखंडों का चयन किया गया है, जहां लोग अभी भी कठिन परिस्थितियों में रहते हैं और सूदूर पहाड़ियों पर जीवन यापन करते हैं. योजना के अंतर्गत सुंदरपहाड़ी के 85 और बोआरीजोर के 38 गांवों को शामिल किया गया है. कुल मिलाकर योजना में 123 गांवों को शामिल किया गया है और इसके लिए कुल 5.50 करोड़ रुपये की राशि खर्च की जा रही है. प्रत्येक गांव में लगभग 5 से 6 लाख रुपये खर्च किए जा रहे हैं.

सोलर आधारित पंप से पानी के संचय की व्यवस्था

इस योजना में यह भी ध्यान रखा गया है कि जिन गांवों में अब तक बिजली की सुविधा नहीं पहुंची है, वहां पहले पानी की आपूर्ति की जाएगी. योजना के तहत पहले पगडंडी काटकर ऊपर बोरिंग वाहन को लाकर चापानल बोरिंग कराया जाता है, और इसके बाद वहां सोलर आधारित पंप से पानी का संचय किया जाता है. जिन गांवों में बोरिंग की व्यवस्था नहीं हो पाती, वहां परंपरागत जल स्रोत के स्थान पर कूप बनाकर उसे पूरी तरह से ढक दिया जाता है, ताकि पानी स्वच्छ रहे. फिर इन स्थानों पर 5000 लीटर की पानी टंकी लगाई जाती है. साथ ही, इन टंकियों की घेराबंदी गैल्वेनाइज्ड लोहे के धातु से की जाती है. पानी के संचय के बाद सोलर सिस्टम के माध्यम से पानी को खींचकर टंकी में भरा जाता है, और फिर टंकी से पानी को गांव के घरों तक टोंटी लगे बूथ के जरिए सप्लाई किया जाता है.

जल स्रोत सूखने और बोरिंग की व्यवस्था खराब होने पर योजना में बदलाव

कुछ गांवों में जल स्रोत के सूखने या बोरिंग की व्यवस्था खराब होने पर पेयजल की आपूर्ति ठप हो जाती है. ऐसी स्थिति में विभाग की ओर से बाहर से पानी टैंकरों के माध्यम से गांव में पानी लाकर टंकी में भरने की व्यवस्था की जा रही है. इन गांवों में बोआरीजोर के छोटे बोआरीजोर, थापर, महावारी बेडो, कड़क धुनी, महुआ कोल, पचरो, गढ़सिंगला, चेबो, तेतरिया जैसे गांव शामिल हैं. अब तक इस योजना में कुल 123 गांवों को कवर किया गया है और 5.50 करोड़ रुपये की राशि खर्च की जा चुकी है. इस प्रकार, यह योजना जिले के दूरदराज के गांवों में जल आपूर्ति की समस्या को हल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है.

क्या कहते हैं अभियंता

योजना में करीब पांच से छह लाख खर्च किये जा रहे हैं. अब तक कुल 123 गांव में योजना में 5.50 करोड़ की राशि खर्च की जा रही है.

आदित्य कुमार , जेई पीएचडी

सिंगल विलेज योजना का लाभ कम आबादी वाले पहाड़ों पर रहने वाले पहाड़िया व अन्य समुदाय से जुड़ा है, जहां करीब 20 घर हैं.योजना का संचालन किया जा रहा है.

संजय शर्मा , कार्यपालक अभियंता , पेयजल स्वच्छता विभागB

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