दिवाली में ऊंची आवाज वाले पटाखों पर लगे रोक, शोर से बीमारों को तकलीफ, तय हो समय-सीमा

Published by : SANJEET KUMAR Updated At : 15 Oct 2025 11:24 PM

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प्रभात संवाद. शांत दिवाली की अपील को लेकर एकजुट हुए तमाशाचक के ग्रामीण.

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ठाकुरगंटी प्रखंड के तमाशाचक गांव में प्रभात खबर की ओर से मंगलवार को प्रभात संवाद का आयोजन किया गया. यह संवाद गांव के मध्य एक व्यक्तिगत आवास परिसर में आयोजित हुआ, जिसकी अध्यक्षता सामाजिक कार्यकर्ता मिहिर महतो ने की. संवाद का मुख्य विषय था ‘दिवाली में ऊंची आवाज वाले पटाखों के इस्तेमाल पर लगे पाबंदी, प्रदूषण से प्रशासन करे बचाव’. इस विषय पर गांव के बुजुर्गों, महिलाओं और युवाओं ने सक्रिय भागीदारी निभायी और अपने अनुभवों एवं समस्याओं को साझा किया. ग्रामीणों ने बताया कि दिवाली के अवसर पर तेज आवाज वाले पटाखों से बुजुर्गों, हृदय रोगियों व सांस के मरीजों को गंभीर परेशानी होती है. शोर और धुएं से होने वाला प्रदूषण स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव डालता है, जिससे गांव के अधिकांश बुजुर्गों को सांस लेने में दिक्कत होती है. ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग किया कि पटाखों के उपयोग को लेकर समय सीमा निर्धारित की जाये और कम आवाज वाले पर्यावरण अनुकूल पटाखों को ही अनुमति दी जाये. उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि जैसे डीजे पर नियंत्रण किया जाता है, उसी तरह पटाखों पर भी सख्ती से निगरानी की जाये. प्रभात संवाद के माध्यम से ग्रामीणों ने एकजुट होकर दिवाली को शांतिपूर्ण और प्रदूषणमुक्त तरीके से मनाने का संकल्प लिया और प्रशासन से इस दिशा में ठोस पहल की अपेक्षा जतायी.

लोगों ने कहा –

तेज आवाज और धमाकेदार पटाखों से हृदय रोगियों सहित अन्य बीमार व्यक्तियों को परेशानी होती है. प्रशासन को चाहिए कि इस पर गंभीरता से कार्रवाई करते हुए ऐसी आतिशबाजी पर रोक लगाये.

-मिहिर महतो

गांव और शहर दोनों में प्रदूषण बढ़ता जा रहा है. सरकार और प्रशासन को चाहिए कि अधिक आवाज और धुएं वाले पटाखों पर सख्ती से प्रतिबंध लगाये ताकि आमजन को राहत मिल सके.

-विभीषण महतो

ठाकुरगंगटी क्षेत्र के दूरस्थ गांवों में बीमार लोगों को धुएं और आवाज़ से परेशानी होती है. ऐसे में पटाखों के सीमित उपयोग की जरूरत है, ताकि लोगों की सेहत सुरक्षित रह सके.

-पंचानन महतो

ग्रामीण क्षेत्र में लोग जल्दी सो जाते हैं. पटाखों की आवाज से नींद में खलल पड़ता है, जिससे बीमारियां बढ़ सकती हैं. इसलिए रात में पटाखे छोड़ने की समय-सीमा तय की जानी चाहिए.

-योगेंद्र महतो

रात नौ बजे के बाद पटाखों की तेज आवाज ग्रामीणों के लिए बड़ी परेशानी बन जाती है. इससे उनकी नींद प्रभावित होती है. ऐसे शोरपूर्ण गतिविधियों पर रोक जरूरी है.

-सुखदेव महतो

रात के समय तेज आवाज वाले पटाखों से आम लोगों को काफी दिक्कत होती है. इसलिए जनता की मांग है कि रात नौ बजे के बाद आतिशबाजी पर पूरी तरह से रोक लगे.

-रामेश्वर महतो

प्रदूषण के कारण लोग सांस लेने और अच्छी नींद लेने में असमर्थ हो जाते हैं. यह स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक है. सरकार को इस दिशा में सख्त कदम उठाना चाहिए.

-लाल टुडू

पर्वों का मकसद सुख और शांति फैलाना होना चाहिए. लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में इलाज में बाधा और बीमारियों की आशंका को देखते हुए सतर्कता जरूरी है.

-संझला टुडू

जैसे डीजे पर प्रतिबंध लगाया जाता है, वैसे ही तेज धमाकेदार पटाखों पर भी रोक लगनी चाहिए. शांतिपूर्ण त्योहार मनाने के लिए प्रशासन को गंभीर कदम उठाने चाहिए.

-कलावती देवी

दीपावली के समय धुएं और तेज आवाज के कारण ग्रामीण महिलाओं को स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ता है. इससे बचने के लिए प्रभावी रोकथाम आवश्यक है.

-सबीना देवी

ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याओं को देखते हुए प्रशासन को चाहिए कि रात 9 बजे के बाद आतिशबाजी पर सख्ती से पाबंदी लगाये और तेज आवाज वाले पटाखों पर भी रोक लगायी जाये.

-रुनिंया देवीB

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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