100 रुपये के चालान की आड़ में पूरे दिन किया जा रहा बालू का अवैध उठाव

Updated at : 02 Feb 2025 11:36 PM (IST)
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100 रुपये के चालान की आड़ में पूरे दिन किया जा रहा बालू का अवैध उठाव

कैटेगरी वन के बालू घाटों से बालू उठाव कर ऊंची कीमत पर शहरों में खपा कर चांदी काट रहे हैं माफिया

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गोड्डा जिले में कैटेगरी वन के बालू घाटाें से बालू का उठाव नियमों को ताक पर रखकर किया जा रहा है. बालू उठाव के मापदंड का पालन नहीं हो रहा है. नियमों को ताक पर रख बालू का उठाव करके व्यापारीकरण किया जा रहा है. 100 रुपये के चालान की आड़ में पूरे दिन बालू का उठाव किया जा रहा है और ट्रैक्टर से ढुलाई कर शहर में ऊंची कीमत पर खपाया जा रहा है. चालान की आड़ में उन घाटों से भी बालू का उठाव किया जा रहा है, जो कैटगरी वन में नहीं आता है. धड़ल्ले से उन घाटों से बालू का उठाव रात में प्रशासन की आंखों में धूल झोंक कर दिन-प्रतिदिन किया जा रहा है. कैटेगरी वन के बालू घाटाें से जैसे-तैसे बालू उठाव को करने में पंचायत के प्रतिनिधि भी कम जिम्मेवार नहीं हैं. उनकी तो लॉटरी ही लग गयी है. यह किसी एक जगह का मामला नहीं है. जहां-जहां कैटेगरी वन के तहत बालू घाटों की बंदोबस्ती की गयी है, वहां इस प्रकार की अनियमितता देखने को मिल जाएगी, जिस पर किसी का नकेल नहीं है.

बालू उठाव की स्वीकृति मिलने के बाद राजस्व का हो रहा नुकसान

बालू उठाव की स्वीकृति मिलने के बाद दोनों हाथों से बालू का अवैध उठाव किया जा रहा है औैर सरकार के राजस्व को नुकसान पहुंचाया जा रहा है. कैटेगरी वन बालू घाट से रात में बालू उठाव की प्रक्रिया नहीं है. लेकिन रात में ट्रैक्टर से बालू की चोरी कर आपूर्ति शहरों में की जा रही है. इसमें बालू कारोबारियों का संगठित गिरोह काम करता है, जिसका पुलिस के संरक्षण में रात के अंधेरे में बालू सही जगह पर पहुंच जाता है. हालांकि ऐसा नहीं है कि केवल पुलिस की ही इसमें संलिप्तता है. संबंधित विभाग जानबूझ कर इस मामले में धृतराष्ट्र बना हुआ है, जो विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़ा करता है.

बालू उठाव में लगे अधिकांश ट्रैक्टर भी रजिस्टर्ड नहीं

बालू उठाव में लगे अधिकांश ट्रैक्टर भी रजिस्टर्ड नहीं है. कई के तो नंबर तक नहीं हैं. दुर्घटना हो गयी तो पुलिस को वाहन का नंबर पता करने में परिवहन विभाग का चक्कर काटना पड़ता है. इस मामले में हर स्तर पर खामी है. जिला टास्क फोर्स की बैठक को केवल फाइलों में ही रखने का काम अधिकारी करते हैं. ऐसे में कारोबारियों को लूट की छूट प्रदान कर दी गयी है. इस संबंध में जिला खनन पदाधिकारी से संपर्क करने पर मोबाइल नहीं उठाया गया.

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