कैमिकल युक्त रंग बेहद खतरनाक, होली में हर्बल रंगों का ही करें इस्तेमाल

Updated at : 04 Mar 2025 10:48 PM (IST)
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कैमिकल युक्त रंग बेहद खतरनाक, होली में हर्बल रंगों का ही करें इस्तेमाल

‘होली में ना करें कैमिकलयुक्त रंगों का इस्तेमाल’ विषय पर बोले बुद्धिजीवी

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बसंतराय प्रखंड मुख्यालय स्थित ऐतिहासिक तालाब के किनारे मां दुर्गा मंदिर प्रांगण में प्रभात खबर पाठक संवाद का आयोजन किया गया. दर्जनों लोगों ने संवाद में हिस्सा लिया, जिसकी अध्यक्षता समाजसेवी वरुण यादव ने की. इस दौरान वक्ताओं ने होली के अवसर पर केमिकल युक्त रंगों के प्रयोग पर आपत्ति दर्ज किया. कहा कि होली सादगी व प्रेम के साथ मनाने का त्योहार है. बुद्धिजीवियों ने रासायनिक रंगों के इस्तेमाल से त्वचा पर होने वाले प्रभाव एवं स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर की बातों को रखा. ऐसे केमिकल युक्त रंगों के इस्तेमाल से बचने की बात कही गयी. रासायनिक रंग के अधिक इस्तेमाल से होने वाले परिणाम पर लोगों को आवश्यक रूप से ध्यान देने की जरूरत पर बल दिया गया. कहा कि आने वाले कुछ दिनों में रंगों का त्योहार होली मनायी जायेगी. रंग-गुलाल व पुआ-पकवान से ही होली की पहचान है. पर्व पर लोग एक-दूसरे के गले मिलकर गुलाल व रंग लगाकर होली खेलते हैं. लोगों ने कहा कि किसी जमाने में पलाश के फूल का रंग बनाकर होली खेला जाता था. आज लोग रासायनिक रंगों के इस्तेमाल तक सिमट जा रहे हैं. होली के आते ही बाजारों में विभिन्न प्रकार के कैमिकल युक्त रंगों की दुकानें सज जाती है. हर्बल रंगों के मुकाबले रसायनिक रंग सस्ते होने की वजह से इसकी बिक्री खूब होती है. मुनाफे के लिए दुकानदार बेचने से परहेज नहीं करते हैं. रासायनिक रंग त्वचा के लिए बेहद घातक हो सकता है. रासायनिक रंग की वजह से आंखों में परेशानी हो सकती है. रासायनिक रंग मनुष्य की त्वचा के लिए काफी खतरनाक हैं. बाजार में बिकने वाले रसायनिक रंग सस्ते होने की वजह से लोग इसे खरीदते हैं. यह रंग काफी नुकसानदायक साबित हो रहा है. इसमें घातक रसायन मिल होता है. उत्पादन के साथ बिक्री करने वाले इसे और खतरनाक बनाते हुए बालू व मिट्ठी मिलाने से परहेज नहीं करते हैं. होली में रसायनिक रंगों के प्रयोग की वजह से फगुआना रंग को फीका कर दिया है. खतरनाक रंग की वजह से होली त्योहार की प्रेम और सौहार्द की भावना को भी खराब कर देता है. कार्यक्रम का संचालन मो परवेज आलम ने किया.

लोगों ने कहा

पलाश के फूल से पहले रंग तैयार किया जाता था. इससे प्राकृतिक रंग तैयार की जाती थी. पलाश के फूल से आंखों को उर्जा प्राप्त होती है. रासायनिक रंगों से स्वास्थ्य पर प्रतिकुल असर पड़ता है. इससे बचना चाहिए.

-वरूण यादव, समाजसेवी

रासायनिक रंग त्वचा पर भी बुरा प्रभाव डालता है. यह त्वचा रोग और एलर्जी पैदा कर सकता है. दूसरी ओर आंखों में खुजली व लालीपन के अलावा दर्द का कारण बन जाता है. रासायनिक रंगों के इस्तेमाल से बचना चाहिए.

-भारत पंडित, समाजसेवी

इस बात को याद रखने की जरूरत है कि वो रंग भी किस काम का, जो लोगों में मलकर सौहार्द बढ़ा न पाये. रंगों को आपसी सौहार्द का ही उदाहरण मानते हैं. हर्बल रंगों के इस्तेमाल से लोगों के बीच सौहार्द बना रहता है.

-कैलाश पंडित, व्यवसायी

कैमिकल युक्त रंग से स्किन संबंधी समस्या का खतरा रहता है. वहीं आंखों की रोशनी तक जाने की संभावना बनी रहती है. हर्बल रंग से ही होली त्योहार मनायें, ताकि परेशानी न हो सके. इस सोच से समाज में प्रभाव पड़ेगा.

-विभाष चौधरी, व्यवसायी

प्राकृतिक फूलों से बना रंग जहां लोगों के शरीर व त्वचा को काफी खूबसूरत व स्वस्थ बनाता है, वहीं केमिकल युक्त रंग से त्वचा खराब हो जाता है. फुल से रंग तैयार कर होली खेलना चाहिए. डाक्टरों के पास खर्च बोने वाले पैसे बचेंगे.

– गोपाली, समाजसेवी

कैमिकल मिला रंग अगर डाला जाता है, उसे तकलीफ होती है. इस वजह से लड़ाई का रूप ले लेता है. समाज में लोगों के बीच बेवजह द्वेष पनपता है. इससे होली का रंग फीका पड़ जाता है. अबीर-गुलाल से होली पर्व मनाना चाहिए.

– वेणु शंकर

होली पर रासायनिक रंगों के तड़क-भड़क से फगुआ का रंग फीका होता जा रहा है. यह रंग शरीर के लिए बेहद घातक है. आमलोगों को ऐसे रंग से बचना चाहिए. साथ ही लोगों को सादगी से होली मनाने की जरूरत है.

-मो हासीम, समाजसेवी

सस्ते दामों पर बाजार में कैमिकल युक्त रंग उपलब्ध रहने से लोग इस्तेमाल कर रहे हैं. मुनाफा अधिक तो होता है, लेकिन परिणाम खतरनाक है. समाज के लोगों को इससे परहेज करना चाहिए. इससे भाईचारगी फीका हो रहा है.

-कृष्ण कुमार कौशलB

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