राज्य वित्त रहित शिक्षा संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने मुख्यमंत्री से वेतनमान व सुविधाएं देने की मांग

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को विषय-वित्त रहित शिक्षा नीति को समाप्त करते हुए सरकारी संवर्ग में करने के संबंध में ज्ञापन सौंपा
महागामा. महागामा इंटर कॉलेज के वित्त रहित शिक्षकों ने झारखंड राज्य वित्त रहित शिक्षा संयुक्त संघर्ष मोर्चा के महासचिव मलय कांति दास के नेतृत्व में महागामा में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को विषय-वित्त रहित शिक्षा नीति को समाप्त करते हुए सरकारी संवर्ग में करने के संबंध में ज्ञापन सौंपा. वित्त रहित शिक्षकों ने मुख्यमंत्री व कृषि मंत्री को पुष्प गुच्छ देकर स्वागत किया. वित्त रहित कर्मियों ने कहा कि विगत पांच वर्षों से मुख्यमंत्री के नेतृत्व में राज्य में अनेक विकास के कार्य चल रहे हैं. कहा कि झारखंड जैसे अविकसित राज्य की मूल समस्या शिक्षा है. विदित है कि राज्य की 500 से ज्यादा संस्थायें जिन्हें सरकार द्वारा स्थाई प्रस्वीकृति प्राप्त है. जिसमें 2,50,000 बच्चें शिक्षा प्राप्त करते पर इनमें कार्यरत शिक्षाकर्मियों को वेतन के मद में कुछ रुपये अनुदान में प्राप्त होता है. सदन में कई विधायकों ने खासकर वर्तमान कृषि सहकारिता मंत्री दीपिका पांडेय सिंह के सवाल के जवाब में आश्वासन दिया था कि वित्त रहित शिक्षा नीति जल्द ही समाप्त कर सरकारी संवर्ग के तहत वेतनमान एवं अन्य सुविधायें दी जायेगी. परंतु आश्चर्य की बात है कि अबतक इस विषय पर कोई ठोस पहल नहीं हो पाई है. वर्तमान में इससे संबद्ध संचिका कार्मिक विभाग में लंबित है. वित्त रहित शिक्षा नीति समाप्त करने की दिशा में पूर्व शिक्षा मंत्री जगन्नाथ महतो ने भी वित्त रहित शिक्षा कर्मियों को आश्वासन दिया था. शिक्षा वित्त रहित नीति समाप्त करते हुए सरकारी संवर्ग में इसे शामिल किया जायेगा, पर उनके निधन से मामला लंबित हो गया है. वित्त रहित शिक्षकों ने कहा कि आपके चुनावी घोषणा पत्र 2019 में वित्त रहित शिक्षा नीति के समापन की बात कही गयी है. कहा कि कर्मियों के वर्षों के दुःख-दर्द को दूर करने की दिशा में आवश्यक कदम अवश्य उठायें.
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