जलनिकासी व सिंचाई साधनों की कमी से मिले निजात, भारी वर्षा से फसल हुई बर्बाद

Updated at : 03 Aug 2025 11:28 PM (IST)
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जलनिकासी व सिंचाई साधनों की कमी से मिले निजात, भारी वर्षा से फसल हुई बर्बाद

प्रभात संवाद. मूसलाधार बारिश से प्रभावित कृषि कार्य के मुद्दे पर आयोजित कार्यक्रम में बोले किसान

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पथरगामा प्रखंड के सोनारचक पंचायत अंतर्गत बाबूपुर-गोड़धोय गांव में रविवार को प्रभात खबर के तत्वावधान में संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम की अध्यक्षता गोपाल यादव ने की. संवाद के दौरान किसानों ने मूसलाधार वर्षा के कारण कृषि कार्यों पर पड़े गहरे प्रभाव विषय पर अपनी गहन चिंता व्यक्त की. उन्होंने बताया कि क्षेत्र की नीचली कृषि भूमि में तीन से चार फीट तक पानी भर गया है, जिससे धान सहित सब्जियों की फसल बर्बादी के कगार पर है. जलनिकासी और सिंचाई के किसी सरकारी साधन के अभाव में किसान पूरी तरह मानसून पर निर्भर हैं. किसानों ने यह भी बताया कि सापिन नदी पर बने चेकडैम एवं डांड़ उपयोगी साबित नहीं हो रहे, जिससे सिंचाई व्यवस्था पूरी तरह विफल है. बताया कि खेतों में जमा पानी की निकासी का कोई रास्ता नहीं है. यदि खेत के मेड़ को काटा जाता है तो दूसरे किसानों के खेतों में पानी जमा होने लगता है. बताया कि अत्यधिक बारिश से धान के साथ-साथ खीरा, झिंगली, परवल, बोड़ा, केलाई का फसल प्रभावित हो रहा है. किसानों ने बताया कि बाबूपुर-गोड़धोय के खेतों में 90 प्रतिशत धान रोपनी का कार्य पूरा हो चुका था. बताया कि लगातार बारिश होने से 40 प्रतिशत धान के फसल को क्षति पहुंच चुकी है. बताया कि बाबूपुर-गोड़धोय में बारिश का पानी स्टोर करने के लिए कोई भी सरकारी साधन नहीं है. यहां तक की एक सिंचाई कूप भी नहीं है और न ही एक भी डोभा. किसान मानसून के भरोसे कृषि कार्य किया करते हैं. किसानों ने बताया कि जब बारिश शुरू हुई तो किसानों में हर्ष का माहौल था, कि अब धान रोपनी का कार्य हो सकेगा. लेकिन बारिश इतनी अधिक हो रही है कि धान का पौधा अब नष्ट होने लगा है. किसानों ने बताया कि सापिन नदी के सोनारचक व कुड़ेरीचक में विगत साढ़े तीन वर्ष पूर्व बनाया गया. चेकडैम हाथी का दांत बनकर रह गया है. बताया कि इसकी मुख्य वजह यह है कि कुड़ेरीचक में बना कच्ची डांड़ बारिश के कारण कट गया है जिससे बारिश का पानी खेतों में न जाकर सापिन नदी में बह रहा है. वहीं सोनारचक के पास बनाया गया पक्की डांड़ नीचा होने की वजह से उपयोगी साबित नहीं हो रहा. उक्त डांड़ से भी पानी खेतों में न जाकर सापिन नदी में उतर जाता है. इस वजह से श्रेत्र के किसानों को सिंचाई की कोई सुविधा नहीं मिल पाती है. बताया कि सापिन नदी के सोनारचक व कुड़ेरीचक के डांड़ को सुदृढ़ कर दिया जाय तो बाबूपुर-गोड़धोय का लगभग एक हजार कृषि योग्य भूमि लाभान्वित हो जाएगा. किसानों के खेतिहर भूमि में सुगमता पूर्वक पटवन कार्य हो सकेगा. कार्यक्रम का संचालन शशांक विक्रम ने किया.

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