मानसून आधारित खेती बना किसानों की मजबूरी, सिंचाई व्यवस्था के अभाव में किसान हर वर्ष भगवान भरोसे करते हैं खेती

Updated at : 13 Jul 2025 11:19 PM (IST)
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मानसून आधारित खेती बना किसानों की मजबूरी, सिंचाई व्यवस्था के अभाव में किसान हर वर्ष भगवान भरोसे करते हैं खेती

हनवारा में प्रभात संवाद कार्यक्रम में किसानों ने सुनायी पीड़ा

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प्रभात खबर की ओर से रविवार को हनवारा थाना क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ता रितेश कुमार के आवास के समीप प्रभात संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रीतेष कुमार ने की. इस संवाद में ‘मानसून आधारित खेती की वजह से किसानों को हो रही कठिनाई’ विषय पर विस्तार से चर्चा हुई. इस अवसर पर किसानों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और क्षेत्र की कृषि समस्याओं को मुखर रूप से सामने रखा. किसानों ने अपने संबोधन में बताया कि क्षेत्र की भूमि कृषि के लिए अत्यंत उपजाऊ है और यहां गेरूआ जैसी बड़ी और चौड़ी नदी बहती है, जो पूरे जिले की एक महत्वपूर्ण जलस्रोत मानी जाती है. बावजूद इसके, आज तक क्षेत्र में सिंचाई की समुचित व्यवस्था नहीं हो सकी है. उन्होंने कहा कि इस संबंध में कई बार कृषि विभाग और जनप्रतिनिधियों को जानकारी दी गयी है, लेकिन अभी तक कोई ठोस पहल नहीं हुई है. ग्रामीण किसानों ने बताया कि हर वर्ष बारिश पर निर्भर रहकर खेती करना उनकी विवशता बन चुकी है. कभी बारिश समय पर नहीं होती, तो कभी जरूरत से ज्यादा हो जाती है, जिससे फसलें बर्बाद हो जाती हैं. सिंचाई के वैकल्पिक साधनों के अभाव में किसान आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं. किसानों ने सरकार से मांग की है कि गेरूआ नदी से स्थायी सिंचाई योजना बनाई जाए, ताकि वे मानसून पर निर्भरता से मुक्त होकर सुनिश्चित कृषि उत्पादन कर सकें.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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