Giridih News :कांग्रेस जिलाध्यक्ष के समक्ष होंगी कई चुनौतियां

Edited by PRADEEP KUMAR
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Giridih News :गिरिडीह जिले में कांग्रेस का स्वर्णिम इतिहास रहा है. एक दौर था जब लोकसभा से लेकर विधानसभा सीटों पर कांग्रेस का दबदबा हुआ करता था. बदलते राजनीतिक हालात में कांग्रेस यहां संघर्ष कर रहा है.

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इस बीच कांग्रेस के नये जिलाध्यक्ष के रूप में सतीश केडिया के नाम की घोषणा की गयी. जो राजनीतिक स्थितियां हैं, उसमें श्री केडिया के समक्ष कई चुनौतियां है. पार्टी नेताओं के बीच समन्वय स्थापित कर जिला स्तर से लेकर प्रखंड स्तर तक संगठन को सशक्त करने के लिए उन्हें काफी मशक्कत करना होगा. इसके अलावा जिला कमेटी गठन को लेकर भी माथापच्ची होगी. कांग्रेस जिलाध्यक्ष पद की रायशुमारी को लेकर गुटबाजी स्पष्ट रूप से उजागर हो चुकी है. कई वरिष्ठ नेताओं ने रायशुमारी के दौरान खूब ताकत झोंकी. जिला मुख्यालय से लेकर प्रखंड स्तर पर रायशुमारी के क्रम में जिलाध्यक्ष पद के दावेदारों द्वारा शक्ति प्रदर्शन किया जा चुका है. यह देखना दिलचस्प होगा कि गुटबाजी को खत्म करते हुए श्री केडिया अपनी जिम्मेदारी का किस तरह से निवर्हन करते हैं.

गिरिडीह में कांग्रेस का न कोई सांसद है और ना कोई विधायक

गिरिडीह जिले में छह विधानसभा सीट है. इनमें से किसी भी सीट पर कांग्रेस का कोई विधायक नहीं है. गिरिडीह व गांडेय विस सीट पर झामुमो, जमुआ, धनवार व बगोदर सीट पर भाजपा एवं डुमरी सीट पर जेएलकेएम का कब्जा है. वहीं गिरिडीह लोकसभा सीट और कोडरमा लोकसभा सीट भी क्रमश: एनडीए के खाते में है. अहम बात यह है कि गत विधानसभा चुनाव में जिले के छह विस सीटों में से किसी भी सीट पर कांग्रेस ने अपना उम्मीदवार तक नहीं उतारा था. वर्ष 2019 के विस चुनाव में कांग्रेस ने जमुआ और बगोदर विस सीट पर उम्मीदवार दिया था. लेकिन, दोनों उम्मीदवारों को पराजय का सामना करना पड़ा था. आने वाले दिनों में नगर निगम मेयर पद का चुनाव होना है. ऐसे में कांग्रेस की राजनीतिक दिशा क्या होगी, इस पर सबकी नजर रहेगी.

ग्रास रूट पर संगठन को सशक्त करना है : सतीश केडिया

कांग्रेस जिलाध्यक्ष सतीश केडिया कहते हैं कि ग्रास रूट पर संगठन को सशक्त करना है. कांग्रेस का संगठन सृजन अभियान को गति प्रदान करना है. पार्टी कार्यक्रमों में पंचायत व बूथ स्तर पर स्वयं की उपस्थिति सुनिश्चित करना है. कोशिश रहेगी कि तमाम कार्यकर्ताओं को सक्रिय करते हुए पार्टी संगठन को धारदार बनाया जाये. पार्टी कार्यकर्ताओं व वरिष्ठ नेताओं के साथ समन्वय बनाकर कार्य किया जायेगा. कार्यकर्ताओं को यह बताने की जरूरत है कि पार्टी उनके साथ खड़ी है. भले ही उनका काम चुनौती भरा है, लेकिन असंभव नहीं है.

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