Giridih News :गुणायतन में पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव का समापन

Published by :PRADEEP KUMAR
Published at :02 May 2026 11:31 PM (IST)
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Giridih News :गुणायतन में पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव का समापन

Giridih News :पावन तीर्थ श्री सम्मेद शिखर जी की तलहटी में स्थित गुणायतन में आयोजित सात दिवसीय पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव का समापन शनिवार को श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक वातावरण के बीच मोक्ष कल्याणक के साथ संपन्न हुआ.

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गुणायतन मध्यभारत के राष्ट्रीय प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया कि इस सात दिवसीय महोत्सव में देश-विदेश, विशेषकर सिंगापुर और मलेशिया से आये जैन श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर भक्ति का अनुपम अनुभव प्राप्त किया. समापन पर सुबह कैलाश पर्वत से भगवान के मोक्षगमन की भावपूर्ण झांकी प्रस्तुत की गयी. इसने उपस्थित श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया. भगवान के शरीर के कपूर के समान विलीन होने तथा अग्निकुमार देवों द्वारा अंतिम संस्कार की मनोहारी प्रस्तुति ने वातावरण को आध्यात्मिक भावनाओं से सराबोर कर दिया. इसके हवन में आहुति देकर महायज्ञ का समापन किया गया,

निकली भव्य रथयात्रा

समापन पर भव्य रथयात्रा निकाली गयी, जो प्रमुख मार्गों से होती हुई पुनः गुणायतन परिसर पहुंची. अंत में नव-प्रतिष्ठित जिनप्रतिमाओं का अभिषेक हुआ. धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनिश्री प्रमाण सागर महाराज ने कहा कि जब पंचकल्याणक के अंतिम दिवस भगवान को मोक्ष प्राप्त होता है, तब मन में यह भाव उठता है कि प्रभु आप तो चले गये, हमारा क्रम कब आएगा? उन्होंने कहा कि ऐसी भावना प्रत्येक साधक के अंतर्मन में जागृत होनी चाहिए. उन्होंने भरत चक्रवर्ती का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि भगवान के मोक्षगमन पर वे व्यथित हो उठे थे. मुनिश्री ने कहा कि भले ही हमें अभी मोक्ष प्राप्त नहीं हुआ है, लेकिन मोक्ष मार्ग हमारे सामने है. इस मार्ग पर चलकर ही मोक्ष सुख की प्राप्ति संभव है. उन्होंने श्रद्धालुओं ने सात दिनों तक की गयी साधना, सेवा व भक्ति की सराहना की.

संयम, स्वाध्याय व प्रभु भक्ति को जीवन में अपनाने का दिया संदेश

प्रमाण सागर जी महाराज ने संयम, स्वाध्याय और प्रभु भक्ति को जीवन में अपनाने का संदेश दिया. गुणायतन की विशेषता पर प्रकाश डालते हुए मुनिश्री ने कहा कि यह देश की ऐसी संस्था है, जहां अनेक लोग निःस्वार्थ भाव से अवैतनिक सेवाएं दे रहे हैं. वर्तमान भौतिकवादी युग में यह सेवा भाव ही सच्ची साधना का प्रतीक है. समारोह में मुनिश्री संधान सागर, मुनिश्री सार सागर, मुनिश्री समादर सागर, मुनिश्री रूप सागर सहित चतुर्विध संघ की गरिमामयी उपस्थिति रही. समापन के अवसर पर महोत्सव में सहभागी सभी श्रद्धालुओं का गुणायतन के पदाधिकारियों ने प्रतीक चिह्न देकर सम्मानित किया. प्रतिष्ठाचार्य अशोक भैया, अभय भैया, संजय भैया, सुदर्शन शास्त्री एवं प्रचार-प्रसार से जुड़े सभी सहयोगियों को आशीर्वाद दिया.

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