कागजात पर अजय के हस्ताक्षर

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 21 Jun 2016 7:13 AM

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पीरटांड़. नक्सली के शव से एक रजिस्टर मिला है. रजिस्टर में पेट्रोल, मोबाइल रिचार्ज, दाल-जूता खरीदने, मेला घूमने के खर्च का हिसाब लिखा हुआ है. संगठन के किन लोगों को नगद दिया गया है, इसका भी उल्लेख है. कागजात पर किये गये हस्ताक्षर को नक्सली नेता अजय महतो का बताया जा रहा है. लेवी रसीद […]

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पीरटांड़. नक्सली के शव से एक रजिस्टर मिला है. रजिस्टर में पेट्रोल, मोबाइल रिचार्ज, दाल-जूता खरीदने, मेला घूमने के खर्च का हिसाब लिखा हुआ है. संगठन के किन लोगों को नगद दिया गया है, इसका भी उल्लेख है. कागजात पर किये गये हस्ताक्षर को नक्सली नेता अजय महतो का बताया जा रहा है.

लेवी रसीद में एक करोड़ से अधिक का हिसाब

मृत नक्सली के पास से मिले लेवी रसीद में कई ठेकेदारों के नाम का जिक्र है. जिन नामों का जिक्र किया गया है उसमें से कुछ ठेकेदार स्थानीय तो कुछ ठेकेदार बोकारो के हैं. ‘महान भारतीय क्रांति को सफल बनाने के लिए भारत कम्युनिस्ट पार्टी माओवादी उतरी छोटानागपुर जोनल कमेटी के सहायता कोष को मजबूत करो’ के नाम से छपी लेवी रसीद में जो अधकटी मिली है उसमें लगभग एक करोड़ रुपये की राशि उगाही का जिक्र है.

पीरटांड़ की कई सड़कों के ठेकेदारों से भी मोटी राशि लेने का जिक्र इस रसीद में किया गया है. रसीद में रानी कोरहा पुल गोमिया, झरहा रोड, हरलाडीह रोड सहित कई अन्य रोड का भी जिक्र है. इस मामले में एसपी ने कहा है कि अभी सभी कागजात का अध्ययन किया जा रहा है. इसमें आने वाले नामो को भी देखा जा रहा है, जिसकी जांच की जा रही है. वहीं बरामद मोबाइल बिल रौशनी टेलीकॉम बोकारो के नाम से है जो बिहारी हेंब्रम के नाम का है.

जोनल कमांडर गाजो के रूप में पहचान, विष्णुगढ़ का है रहनेवाला

बरामद किये गये नक्सली के शव की पहचान कर ली गयी है. मारा गया नक्सली भाकपा माओवादी का जोनल कमांडर बेहराम मुर्मू उर्फ गाजो उर्फ पंकज उर्फ बाढ़ो है. एएसपी कुणाल ने इसकी पुष्टि की है. बताया कि गाजो उत्तरी जोन का जोनल कमांडर था. यह जिलगा एवं ऊपरघाट का काम देख रहा था. इधर शव को पहचानने के लिये सोमवार को विष्णुगढ़ से लोगों को बुलाया गया था. शव को पहचानने के लिये वहां से सेबिया मांझी समेत कई लोग पहुंचे थे.

परिजनों ने कहा सात वर्ष से घर नहीं आया था पंकज, सरकार ने रखा था इनाम

सोमवार को जब शव को पोस्टमार्टम के लिये सदर अस्पताल लाया गया तो पंकज के परिजन भी पहुंचे. परिजनों ने बताया कि सात वर्ष से पंकज उर्फ बेहराम मांझी घर नहीं आया है.

शव को देखने के बाद परिजन पूरी तरह से पहचान नहीं कर रहे थे, लेकिन पंकज का होने का संदेह कर रहे थे. बाद में शव की पहचान कर ली गयी. बताया जाता है कि इस नक्सली जोनल कमांडर पर सरकार ने इनाम भी रखा है.

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