नक्सलियों को विस्फोटक पहुंचाने में तीन को आठ-आठ वर्ष की कैद

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गिरिडीह : जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश तृतीय शैलेंद्र कुमार सिंह की अदालत ने नक्सली को विस्फोटक पहुंचाने के मामले में गुरुवार को तीन लोगों को आठ-आठ वर्ष सश्रम कारावास की सजा सुनायी है. तीनों को पांच-पांच हजार रुपये का जुर्माना भी किया है. जुर्माना जमा नहीं करने पर छह-छह माह साधारण कारावास की सजा […]

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गिरिडीह : जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश तृतीय शैलेंद्र कुमार सिंह की अदालत ने नक्सली को विस्फोटक पहुंचाने के मामले में गुरुवार को तीन लोगों को आठ-आठ वर्ष सश्रम कारावास की सजा सुनायी है. तीनों को पांच-पांच हजार रुपये का जुर्माना भी किया है. जुर्माना जमा नहीं करने पर छह-छह माह साधारण कारावास की सजा भुगतनी होगी. सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी.
मामला तिसरी थाना अंतर्गत गुमगी का है. तिसरी के थाना प्रभारी विनोद उरांव ने 12 मार्च 2014 को तिसरी थाना में मामला दर्ज कराया था. इसमें थानेदार ने कहा था कि कि उक्त दिन वह कोबरा 207 के सहायक कमांडेंट विकास कुमार व सहायक कमांडेंट नागेश्वर कुमार के साथ विशेष अभियान चला रहे थे. इस दौरान सूचना मिली कि एक चारपहिया बोलेरो पर कुछ लोग विस्फोटक लेकर जा रहे हैं. इसी थाना अंतर्गत गुमगी के पश्चिम पुलिया के पास बोलेरो की घेराबंदी की गयी .
जांच के दौरान वाहन में 25 किलोग्राम विस्फोटक के साथ नक्सली साहित्य व 24 पीस इलेक्ट्रिक डेटोनेटर पाया गया. वाहन सवार गोड्डा जिला अंतर्गत सुंदरपहाड़ी थाना क्षेत्र के सिमलढाब निवासी अगस्टिन हांसदा पिता (स्व. होपना हांसदा), भेलवाघाटी थाना अंतर्गत करकाटांड़ के बरनाली मरांडी (पिता सनातन मरांडी) एवं जमुई जिला अंतर्गत चरकापत्थर थाना क्षेत्र के ताराबांक निवासी अधीक यादव उर्फ सुशील यादव (पिता सहदेव यादव) से विस्फोटक के कागजात प्रस्तुत करने को कहा गया, लेकिन संबंधित लोग कागजात प्रस्तुत नहीं कर सके.
जांच के दौरान पता चला कि एमसीसी के चिराग दा के दस्ते को विस्फोटक पहुंचाने के लिए संबंधित लोग जा रहे थे. इस बाबत तिसरी थाना में उसी दिन कांड संख्या 12/14 के तहत तीनों लोगों को आरोपित करते हुए मामला दर्ज किया और इनके विरुद्ध न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया गया.
सत्रवाद संख्या 187/14 में अभियोजन पक्ष की ओर से 9 गवाह प्रस्तुत कराये गये. इस मामले में अदालत ने विस्फोटक अधिनियम की धारा 3 व सीएलए 17 के तहत अगस्टिन हांसदा, बरनाली मरांडी व अधीक यादव उर्फ सुशील यादव को दोषी पाया. मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से लुकस मरांडी व बचाव पक्ष की ओर से दुर्गा पांडेय ने बहस की.
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