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छह माह में ही बंद हो गया सदर अस्पताल परिसर का कैफे हाउस

Updated at : 17 Feb 2020 8:47 AM (IST)
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छह माह में ही बंद हो गया सदर अस्पताल परिसर का कैफे हाउस

गिरिडीह : महिला मंडल को रोजगार से जोड़ने के उद्देश्य से सदर अस्पताल परिसर में जून 2018 में कैंटीन का निर्माण किया गया. कैंटिन की जिम्मेदारी बेंगाबाद के मोतीलेदा आजीविका महिला ग्राम संगठन कैटरिंग ग्रुप को दी गयी. आजीविका दीदी कैफे नाम से खुले इस कैटिंन में सदर अस्पताल में भर्ती मरीजों व कार्यरत कर्मचारियों […]

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गिरिडीह : महिला मंडल को रोजगार से जोड़ने के उद्देश्य से सदर अस्पताल परिसर में जून 2018 में कैंटीन का निर्माण किया गया. कैंटिन की जिम्मेदारी बेंगाबाद के मोतीलेदा आजीविका महिला ग्राम संगठन कैटरिंग ग्रुप को दी गयी. आजीविका दीदी कैफे नाम से खुले इस कैटिंन में सदर अस्पताल में भर्ती मरीजों व कार्यरत कर्मचारियों को यहां चाय नाश्ते से लेकर भोजन की व्यवस्था की गयी थी.

तात्कालीन डीडीसी किरण पासी की पहल के बाद की गयी इस व्यवस्था का छह माह बाद ही दम निकल गया. छह माह बाद ही माह दिसंबर में कैटिंन पर ताला लटक गया.
कैफे की संचालिका सह मोतीलेदा आजीविका महिला ग्राम संगठन कैटरिंग ग्रुप की अध्यक्ष सावित्री देवी की मानें तो लगातार घाटे में चल रहे कैफे को बंद कर देना पड़ा, तब से कैंटिंन वीरान पड़ा है. कैटिंन के परिसर में पांच छतरी के नीचे कई कुर्सिया लगायी गयीं. इसकी खासियत यह थी कि कैटिंन का संचालन सात महिला सदस्य कर रही थीं.
अच्छी सेवा के बावजूद कैटिंन के विफल होने के मूल कारणों में सदर अस्पताल में भर्ती मरीजों की संख्या भी बतायी जा रही है. मिली जानकारी के अनुसार सदर अस्पताल में ज्यादा से ज्यादा रोजाना 15-20 मरीज ही भर्ती होते है. इन्हें अस्पताल द्वारा नाश्ता व भोजन उपलब्ध कराया जाता है. यह भी सच है कि यहां अधिकतर गरीब तबके के लोग ही भर्ती होते हैं. ऐसी स्थिति में कैटिंन में जाकर नाश्ता व भोजन करना मरीज व उनके परिजनों के लिए संभव नहीं है.
जिला अनाबद्ध निधि से 7. 65 लाख से बना था कैंटीन
जिला अनाबद्व निधि से कैटिंन का निर्माण 7,65,665 रुपये की लागत से वितीय वर्ष 2017-18 में किया गया था. यहां सदर अस्पताल में भर्ती मरीज, उनके परिजन व कर्मचारियों के लिए खाने-पीने की सभी व्यवस्था सस्ती दर पर की गयी. ग्राहक के अभाव में विवश होकर कैटिन बंद कर देना पडा. बाद में इसे खोलने की पहल किसी स्तर से नहीं की गयी. समूह की संचालिका ने बताया कि सदर अस्पताल में भर्ती मरीजों के भोजन की जिम्मेदारी महिला ग्रुप को दी जाती, तभी इसके संचालन की संभावना थी.
अस्पताल का कोई दखल नहीं: उपाधीक्षक
सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डाॅ उपेंद्र दास ने बताया कि कैटिंन मेरे कार्यकाल में न खुला और न बंद हुआ. कहा कि जहां तक मेरी जानकारी है मामले में सदर अस्पताल का कोई दखल नहीं था. उन्होने कहा कि प्रशासनिक स्तर पर इसे खोलने की पहल की गयी थी और महिला समूह ने घाटे के कारण बंद कर दिया.
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