गठन के बाद भी वजूद में नहीं डीआरए

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डीएसी-एसपी तक होते हैं डीआरए में, सीएस तक को कमेटी की जानकारी नहीं जिला के स्वास्थ्य तंत्र की निर्णायक संस्था कागजों में तोड़ रही दम गिरिडीह : जिला में क्लिनिकल इस्टैबलिशमेंट एक्ट के अनुपालन की मॉनीटरिंग को लेकर छह सदस्यीय डीआरए (डिस्ट्रिक रजिस्ट्रेशन अथॉरिटी) के गठन को डेढ़ साल हो गये, पर अब तक जिला […]

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डीएसी-एसपी तक होते हैं डीआरए में, सीएस तक को कमेटी की जानकारी नहीं

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जिला के स्वास्थ्य तंत्र की निर्णायक संस्था कागजों में तोड़ रही दम
गिरिडीह : जिला में क्लिनिकल इस्टैबलिशमेंट एक्ट के अनुपालन की मॉनीटरिंग को लेकर छह सदस्यीय डीआरए (डिस्ट्रिक रजिस्ट्रेशन अथॉरिटी) के गठन को डेढ़ साल हो गये, पर अब तक जिला में इसका वजूद नहीं. विडंबना है कि जिला के स्वास्थ्य तंत्र का दारोमदार जिनके (सीएस के) कंधे पर होता है, उन्हें ही इसकी कोई जानकारी नहीं. फलत: जिला में नर्सिंग होम व निजी प्राइवेट क्लिनिक की कायदे से निगरानी नहीं हो पा रही.
राज्य सरकार के स्वास्थ्य, शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव के निर्देश पर जिला में डीआरए का गठन हुआ था.
डीसी से लेकर आइएमए अध्यक्ष हैं सदस्य : डीआरए के लिए बनी कमेटी में डीसी, सिविल सर्जन, पुलिस अधीक्षक या उनके द्वारा मनोनीत प्रतिनिधि, जिप अध्यक्ष, आइएमए के जिलाध्यक्ष तथा जिला आयुष चिकित्सा पदाधिकारी सदस्य बनाये गये.
गठन के बाद तत्कालीन सिविल सर्जन डा रामरेखा प्रसाद ने इसके गठन की जहमत नहीं उठायी और अपर मुख्य सचिव का आदेश फाइलों में गुम हो गया.
अपर नुख्य सचिव के निर्देश का पता नहीं : डीआरए के सदस्य सह आइएमए के जिलाध्यक्ष डा विद्याभूषण की मानें तो क्लीनिक्ल इस्टेबलिशमेंट एक्ट के तहत डीआरए की सिफारिश पर ही जिला में किसी भी नर्सिंग होम, प्राइवेट क्लिनिक व जांच घर खोलने की इजाजत दी जानी थी.
निबंधन के अतिरिक्त संपूर्ण जिला में स्वास्थ्य संबंधी संस्थानों का पर्यवेक्षण कर सुनिश्चित किया जाना था कि कोई भी निजी नर्सिंग होम, प्राइवेट क्लीनिक या जांच घर अनिबंधित न रहे. कमेटी को नर्सिंग होम, निजी क्लिनिक या जांच घर में अग्निशमन व्यवस्था एवं बायोकेमिकल बेस्ट डिस्पोजल जैसे जरूरी मानकों का अनुपालन सुनिश्चित करना था. मानकों के उल्लंघन की स्थिति में संस्था की मान्यता रद्द करने तक का अधिकार इसके दायरे में है. गिरिडीह में अब भी पुराने ढर्रे पर काम हो रहा है.

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