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सिर्फ सरकारी जमीन प्रतिबंधित सूची में : मंत्री

Updated at : 20 Oct 2019 1:56 AM (IST)
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सिर्फ सरकारी जमीन प्रतिबंधित सूची में : मंत्री

गिरिडीह : भू राजस्व मंत्री अमर बाउरी ने कहा है कि सिर्फ सरकारी जमीन को ही प्रतिबंधित सूची में डालने का आदेश विभागीय अधिकारियों को दिया गया है. सरकार ने यह कदम सरकारी जमीन की खरीद-बिक्री को रोकने के लिए उठाया है.सरकारी जमीन पब्लिक की है, जिसका उपयोग आम लोगों के हित के लिए किया […]

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गिरिडीह : भू राजस्व मंत्री अमर बाउरी ने कहा है कि सिर्फ सरकारी जमीन को ही प्रतिबंधित सूची में डालने का आदेश विभागीय अधिकारियों को दिया गया है. सरकार ने यह कदम सरकारी जमीन की खरीद-बिक्री को रोकने के लिए उठाया है.सरकारी जमीन पब्लिक की है, जिसका उपयोग आम लोगों के हित के लिए किया जाना है, लेकिन कुछ लोग गलत तरीके से सरकारी जमीन की भी खरीद-बिक्री कर रहे थे. ऐसी शिकायत मिलने के बाद ही सरकार ने प्रतिबंधित सूची तैयार कर सरकारी जमीन की खरीद-बिक्री पर रोक लगा दी है. राजस्व मंत्री ने स्पष्ट किया कि रैयतों की जमीन रैयत की है. उनका उस जमीन पर मालिकाना हक है.

सिर्फ सरकारी जमीन प्रतिबंधित…
यदि गलती से या गलत कारणों से गैरमजरूआ जमीन के रैयतों की जमीन इस प्रतिबंधित सूची में डाल दी गयी है, तो रैयतों की जमीन को प्रतिबंधित सूची से बाहर निकाला जायेगा. कहा कि चूंकि गिरिडीह जिले में लाखों रैयतों की जमीन प्रतिबंधित सूची में डाले जाने का मामला उजागर हुआ है, तो ऐसी स्थिति में गिरिडीह जिले में प्रतिबंधित सूची की पुन: समीक्षा की जायेगी.
उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य भर में यदि किसी रैयत की जमीन प्रतिबंधित सूची में डाली गयी है, तो वे एक आवेदन उपायुक्त को दें. जिला प्रशासन के अधिकारी या राजस्व विभाग के अधिकारी उसे संज्ञान में लेकर प्रतिबंधित सूची से निकालेंगे. वहीं, दोषी पदाधिकारियों पर कार्रवाई की जायेगी.
क्या है मामला
सरकारी जमीन की खरीद-बिक्री न हो, इसके लिए विभागीय अधिसूचना 1132 दिनांक 28.08.15 के आलोक में झारखंड के निबंधन महानिरीक्षक ने सभी उपायुक्त को पत्र लिखा था. पत्र में सिर्फ सरकारी भूमि को ही प्रतिबंधित सूची में डालने का निर्देश दिया गया था, परंतु गिरिडीह जिला के तत्कालीन एडिशनल कलेक्टर ने सभी तरह की गैरमजरूआ खास जमीन को प्रतिबंधित सूची में डाल दिया. इसके बाद गिरिडीह जिले में तमाम तरह के गैरमजरूआ खास जमीन की खरीद-बिक्री में रोक लगा दी गयी, जिससे लाखों रैयतों को परेशानी हो रही है.
जमीन विवाद का समाधान सर्वे सेटलमेंट
श्री बाउरी ने कहा कि लंबे अर्से से जमीन का सर्वे सेटलमेंट नहीं होने के कारण जमीन का विवाद झारखंड में काफी ज्यादा है. वर्ष 2000 के बाद जमीन विवाद के मामले तेजी से बढ़े हैं. जमीन विवाद का समाधान एकमात्र सर्वे सेटलमेंट ही है. इस मामले से मुख्यमंत्री को भी अवगत कराया जा चुका है. मुख्यमंत्री ने भी स्पष्ट किया है कि चुनाव के बाद राज्य सरकार प्राथमिकता के आधार पर सबसे पहले जमीन का सर्वे करायेगी.
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