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अल्पवर्षा से जमुआ में तीन-चार फीसदी ही धनरोपनी

Updated at : 05 Aug 2019 8:35 AM (IST)
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अल्पवर्षा से जमुआ में तीन-चार फीसदी ही धनरोपनी

सुनील वर्मा, जमुआ : जमुआ प्रखंड में अल्पवर्षा से किसानों में मायूसी है. पानी की कमी से मकई की फसल सूखकर झूक रही है. वहीं धान के बिचड़े भी पीले पड़ने लगे हैं. प्रखंड में सुखाड़ के संकेत स्पष्ट दिख रहे हैं. सावन के 19 दिन बीतने के बाद भी बारिश नहीं होने से किसान […]

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सुनील वर्मा, जमुआ : जमुआ प्रखंड में अल्पवर्षा से किसानों में मायूसी है. पानी की कमी से मकई की फसल सूखकर झूक रही है. वहीं धान के बिचड़े भी पीले पड़ने लगे हैं. प्रखंड में सुखाड़ के संकेत स्पष्ट दिख रहे हैं. सावन के 19 दिन बीतने के बाद भी बारिश नहीं होने से किसान परेशान हैं. एक सप्ताह पूर्व हुई हल्की बारिश के बाद लोगों को राहत मिली थी, लेकिन बीते 15 जुलाई से बारिश बंद है. तेज धूप एवं गर्मी ने एक बार फिर लोगों की परेशानी बढ़ा दी है.

क्या कहते हैं कृषि पदाधिकारी
जमुआ प्रखंड कृषि पदाधिकरी ने कहा कि हमलोग जमुआ की हर पंचायत की वर्तमान स्थिति का आकलन कर रहे हैं. जो स्थिति सामने आ रही है जिसमें तीन से चार प्रतिशत ही धनरोपनी हुई है. हमने जिला कृषि कार्यालय को सूचना दे दी है.
उन्होंने किसानों से अपील की है कि तीन नंबर वाले खेत में दलहन की फसल लगाने की तैयारी करें. सरकार से जो निर्देश प्राप्त होगा किसान तक पहुंचाया जायेगा. फसल बीमा की सूची तैयार कर ली गई है. वर्ष 2018 में किये फसल बीमा का भुगतान दुर्गा पूजा के आस-पास होने की संभावना है.
जय प्रकाश शर्मा, कृषि पदाधिकारी, जमुआ
पशुओं के लिए भोजन और चारा जुटाना भी मुश्किल होने लगा है. मौसम कीबेरुखी से किसानों के सामने दोहरी परेशानी आ रही है. किसान निजी पंप सेट से किसी तरह बिचड़ा बचाने में जुटे हैं. बारिश नहीं हुई तो सिंचाई और पेयजल संकट के साथ-साथ किसानों को कई समस्याएं झेलनी पड़ेंगी.
मो. मतीन, किसान, मनरायटोला
इंद्रदेव की कृपा के इंतजार में किसान सूखे खेत की जुताई करने को विवश हैं. बिचड़ा को देखकर मायूस होना पड़ रहा है. रोज आसमान की ओर टकटकी लगाये रहते हैं कि आज बारिश होगी. हम सभी अपने बाल-बच्चों के भरण-पोषण धान की फसल पर ही निर्भर हैं.
आजाद कु. साव, किसान, लताकी पंचायत
धान की रोपाई का मुख्य नक्षत्र भी धीरे-धीरे निकल रहा है. समुचित बारिश नहीं होने से किसानों के समक्ष विकट समस्या उत्पन्न होने लगी है. आमलोग अपने भोजन की व्यवस्था किसी न किसी ढंग से कर लेगें, मगर मवेशियों के लिए चारा तक जुटाना काफी मुश्किल हो जायेगा.
शिवशंकर सिंह, किसान, टीकामगहा
धान की रोपनी होने पर उपज चाहे जो हो पशुओं के लिए चारा की समस्या नहीं रहती है. पर जब खेत आबाद ही नहीं होंगे तो पशुओं के लिए चारा कहां से आयेगा. सरकार को चाहिए कि झारखंड को सुखाड़ क्षेत्र घोषित कर विशेष राहत कार्य चलाने के व्यवस्था करे.
मो. महाशर ईमाम, किसान काजीमगहा
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