अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रहा पावापुर डैम

Updated at : 14 Apr 2019 2:01 AM (IST)
विज्ञापन
अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रहा पावापुर डैम

बहते जल के साथ आने वाली मिट्टी से कम होती जा रही है डैम की गहराई हजारीबाग रोड : कृषि के क्षेत्र में हरित क्रांति लाने के लिए करीब छह दशक पूर्व लुगा-धोबी नाला पर बना पावापुर डैम आज अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रहा है. सिंचाई के लिए किसानों के लिए वरदान साबित […]

विज्ञापन

बहते जल के साथ आने वाली मिट्टी से कम होती जा रही है डैम की गहराई

हजारीबाग रोड : कृषि के क्षेत्र में हरित क्रांति लाने के लिए करीब छह दशक पूर्व लुगा-धोबी नाला पर बना पावापुर डैम आज अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रहा है. सिंचाई के लिए किसानों के लिए वरदान साबित हो रहा सरिया प्रखंड के पावापुर गांव स्थित यह डैम अब अंतिम सांसें गिन रहा है. भू-क्षरण और बहते जल के साथ आने वाली मिट्टी से दिनों-दिन डैम की गहराई कम होती जा रही है.

जिस कारण अब क्षेंत्र के किसानों को सालोभर खेती के लिए जल उपलब्ध नहीं हो पा रहा है. हरित क्रांति योजना के तहत वर्ष 1960 में करीब 50 एकड़ भू-भाग पर बने इस डैम के निर्माण का मुख्य उद्देश्य सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराना था. तत्कालीन मुखिया भिखारी दत्त शर्मा के प्रयास से निर्मित इस डैम से किसानों की खेतों तक पानी उपलब्ध कराने के लिए 1966 में नहर भी खुदवाये गये.

नहर के जरिये किसानों को पानी भी उपलब्ध कराया गया. अकूत जलभंडार के कारण आस-पास के गांवों में किसानों को जीने का एक सबसे बड़ा सहारा मिल गया था. क्षेत्र के किसान छह दशक से डैम के पानी से खेती करते आ रहे हैं. लेकिन डैम की गहराई कम होने के कारण सिंचाई के लिए किसानों को पानी नहीं मिल पा रहा है. इसके अलावा क्षेत्र का जलस्तर भी घटते जा रहा है.

पिकनिक स्थल के रूप में भी हुआ है विकसित : प्रकृति की गोद में बसा यह क्षेत्र वास्तव में अत्यंत रमणीक है. सखुआ के घने जंगलों के बीच स्थित इस डैम के एक ओर जहां पावापुर गांव और पहाड़पुर टोला है, वहीं दूसरी ओर केदार धाम स्थित है. इसके उत्तर व दक्षिण की ओर जलस्रोत तथा अर्द्ध विकसित पार्क भी है, जहां प्रतिवर्ष सैकड़ों लोग पिकनिक का आनंद लेने के लिए पहुंचते हैं.

2006 में हुई थी डैम की मरम्मत :डैम की मरम्मत वर्ष 2006 में लगभग 46 लाख की लागत से करायी गयी थी. इतने बड़े डैम के लिए यह राशि ऊंट में मुंह में जीरा के समान थी. पर्याप्त जल की कमी से किसान अब सालों भर क्षेत्र के किसान खेती भी नहीं कर पा रहे हैं. किसानों का कहना है कि यदि विभाग गंभीर होकर इसकी मरम्मत करायें तो एक बार फिर इस क्षेत्र में कृषि के क्षेत्र में क्रांति आ सकती है.

विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola