श्रीनगर-पंडुका पुल का काम फिर से शुरू, 30 माह में तैयार करने का लक्ष्य

बिहार, झारखंड, यूपी, एमपी और छत्तीसगढ़ के लोगों को मिलेगा सीधा लाभ
बिहार, झारखंड, यूपी, एमपी और छत्तीसगढ़ के लोगों को मिलेगा सीधा लाभ धर्मेंद्र सिंह, हरिहरपुर केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना श्रीनगर-पंडुका पुल का निर्माण कार्य एक बार फिर युद्धस्तर पर शुरू हो गया है. यह पुल गढ़वा जिले के कांडी प्रखंड के श्रीनगर गांव में सोन नदी पर बन रहा है और इस परियोजना का कार्य अब दिल्ली की कंपनी गुप्ता कंस्ट्रक्शन द्वारा किया जा रहा है. 155 करोड़ रुपये की नयी निविदा के तहत इस पुल का निर्माण 30 माह के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. इस पुल के बन जाने से झारखंड और बिहार के अलावा उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के बीच भी सीधा संपर्क स्थापित होगा. वर्तमान में स्थानीय लोग 3 किलोमीटर की दूरी तय करने के लिए 150 किलोमीटर का चक्कर लगाते हैं. पुल बनने के बाद न केवल समय की बचत होगी, बल्कि इस क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों और व्यापार को भी नया आयाम मिलेगा. कार्य पुनः शुरू होने पर क्षेत्र के समाजसेवी व दृष्टि यूथ ऑर्गनाइजेशन के प्रधान सचिव शशांक शेखर, मुखिया अनुज कुमार सिंह, भाजपा मंडल अध्यक्ष संतोष कुमार सिंह, विनोद बिहारी द्विवेदी, सुरेंद्र पासवान, रामणी तिवारी सहित दर्जनों ग्रामीणों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, नितिन गडकरी, सांसद बीड़ी राम और बिहार सरकार के प्रधान सचिव अमृतलाल मीणा के प्रति आभार व्यक्त किया. लापरवाही पर पिछली कंपनी ब्लैकलिस्टेड, 14 करोड़ रुपये का लगा जुर्माना पहले इस पुल का निर्माण कार्य बृजेश अग्रवाल कंस्ट्रक्शन द्वारा किया जा रहा था, लेकिन निर्माण में लापरवाही और गुणवत्ता में कमी के कारण कंपनी को कार्यमुक्त कर दिया गया. जांच के दौरान आइआइटी की टीम और अभियंताओं ने पाया कि पुल के 8 पिलरों में ””हेयर क्रैक”” (दरारें) आ गयी थीं. इसके बाद कंपनी पर 14 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया और उसे ब्लैकलिस्ट कर दिया गया. स्थानीय मुखिया भानु मिश्रा और पूर्व विधायक ललन पासवान की शिकायतों के बाद इस मामले की जांच की गयी और नये डिजाइन के आधार पर टेंडर प्रक्रिया फिर से पूरी की गयी. कार्यपालक अभियंता खुर्शीद ने बताया कि इस महत्वपूर्ण पुल का शिलान्यास 22 दिसंबर 2022 को केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी द्वारा किया गया था. हालांकि, पुरानी कंपनी ने 41 पिलर में से 33 पिलर खड़े किये थे, लेकिन तकनीकी खामियों के कारण कार्य रुक गया था. अब नयी कंपनी को 10 वर्षों तक पुल के रखरखाव की जिम्मेदारी भी सौंपी गयी है.
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