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पूजा स्थल तोड़े जाने से दो पक्षों के बीच तनाव, पुलिस ने स्थिति नियंत्रित किया

Updated at : 22 Jul 2024 9:44 PM (IST)
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पूजा स्थल तोड़े जाने से दो पक्षों के बीच तनाव, पुलिस ने स्थिति नियंत्रित किया

पूजा स्थल तोड़े जाने से दो पक्षों के बीच तनाव

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भंडरिया थाना क्षेत्र के बरकोल कला गांव के गढ़ बरकोल स्थित जमीन को लेकर सोमवार को दो पक्षों के बीच तनाव उत्पन्न हो गया. गांव में तनावपूर्ण माहौल की सूचना मिलते ही भंडरिया थाना पुलिस ने स्थिति को नियंत्रण में लेकर बड़ी घटना होने से बचा लिया. घटना की सूचना पाकर भंडरिया अंचल के राजस्व उप निरीक्षक पवन कुमार सिंह व टेहरी पंचायत की मुखिया बिन्को टोप्पो भी मौजूद थे. बताया गया कि उत्पन्न विवाद का कारण गढ़ बरकोल की भूमि पर सावन मास की पहली सोमवारी पर धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन किये जाने की तैयारी थी. इसके लिए गांव के लोगों ने पूजा स्थल के रूप में राजा रानी के स्मारक का निर्माण दो दिन पूर्व किया था. इसे सोमवार की सुबह लगभग 9:30 बजे लगभग डेढ़ सौ की संख्या में पहुंचे महिलाओं एवं पुरुषों ने साबल, गैंता, कुदाल से ध्वस्त कर दिया. जिस वक्त स्मारक तोड़ा जा रहा था, उस वक्त गांव के सैकड़ों लोग सावन की पहली सोमवारी पर जल यात्रा के लिए निकले थे. स्मारक तोड़े जाने की सूचना पर सभी लोग उक्त विवादित स्थल की ओर दौड़ पड़े. लेकिन भीड़ में शामिल कुछ बुद्धिजीवियों के समझाने बुझाने पर लोग शांत हुए तथा इसकी सूचना प्रशासन को दी. पुलिस प्रशासन की तत्परता से एक बड़ी घटना होने से बच गयी. लोगों का कहना है कि स्मारक तोड़े जाने की घटना सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की सोची-समझी साजिश थी. प्रशासन ने दोनों पक्षों को निर्देश दिया कि उक्त भूमि गैर मजरुआ है. प्रशासन के बिना अनुमति के लोग न तो उस पर खेती करेंगे और न ही उक्त स्थल पर कोई निर्माण कार्य करेंगे.

विवाद का कारण : जानकारी के अनुसार उक्त विवादित भूमि पर एक पक्ष के व्यक्ति के द्वारा जोत कोड़ कर खेती किये जाने पर दूसरे पक्ष को आपत्ति है. दूसरे पक्ष के लोगों का कहना है कि उक्त भूमि पर वर्षों पहले किसी राजा का गढ़ था. वह हमलोगों के लिए धरोहर है तथा हमारी आस्था जुड़ी है. कई दशकों से हमारे पूर्वज उक्त स्थल पर रानी सती की पूजा करते आ रहे हैं. वहां दूसरा पक्ष कई वर्षों से जोतकोड़ कर उक्त जमीन पर काबिज होने का दावा कर रहा है जबकि उक्त भूमि सरकारी दस्तावेज में खाता नंबर 84 में गैर मजरुआ दर्ज है. वहीं दूसरे पक्ष ने अड़नलाइन रिकार्ड में उक्त भूमि को रंका गढ़ परिवार की रानी राजमाता गुंजेश्वरी देवी के नाम पर होने का दावा किया है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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